
इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) में लुंगी नगिडी की धीमी और डिप होती हुई गेंद आज भी उतनी ही खतरनाक है, जितनी टी20 वर्ल्ड कप के दौरान थी।
नगिडी ने 2018 में चेन्नई सुपर किंग्स के साथ खेलते हुए ड्वेन ब्रावो के कहने पर अपनी स्लोअर बॉल पर काम करना शुरू किया था। हालांकि, इस महत्वपूर्ण स्किल को निखारने में उन्हें काफी समय लगा।
भले ही उनकी वैरिएशंस कई सालों से उनके खेल का हिस्सा रही हैं, लेकिन दिल्ली कैपिटल्स के इस तेज गेंदबाज को हैरानी है कि अब हर कोई उनकी गेंदबाजी की चर्चा कर रहा है।
हाल ही में एक बातचीत के दौरान नगिडी ने अपनी सबसे सफल गेंद—डिपिंग स्लोअर बॉल—के बारे में बताया, जो बल्लेबाज़ के पास पहुंचते-पहुंचते नीचे गिरती है। यह गेंद तीन अलग-अलग लेंथ पर आ सकती है—लेंथ बॉल, स्लो बाउंसर या स्लो यॉर्कर।
उन्होंने कहा, “एक ही गेंद को तीन अलग-अलग लेंथ पर डालता हूं, जिससे बल्लेबाज़ को अंदाजा लगाना पड़ता है कि अगली गेंद कैसी होगी।”
नगिडी ने कहा कि लोग उनकी इस गेंद से हैरान होते हैं, लेकिन वह कई सालों से इसे डाल रहे हैं।
“मैं शायद इसे थोड़ी ज्यादा फ्लाइट दे रहा हूं। आईपीएल में ट्रेंड देख रहा हूं—हर कोई तेज गेंद डालना चाहता है।”
उन्होंने आगे कहा, “ऐसी बल्लेबाज़ी के अनुकूल पिचों पर आपको कुछ अलग करना ही पड़ेगा, तभी आप प्रासंगिक बने रह सकते हैं। लोग सोचते हैं यह आसान है, लेकिन इसे सीखने में मुझे करीब एक साल लगा।”
उन्होंने बताया कि यह गेंद उनका एक बड़ा हथियार है और सही तरीके से डालने पर विकेट लेने के मौके बनाती है, जो टी20 क्रिकेट में बेहद जरूरी है।
आईपीएल 2026 के पहले चार मैचों में नगिडी ने 5 विकेट लिए हैं और उनकी इकॉनमी 8.04 रही है। उनका मानना है कि टी20 जैसे छोटे फॉर्मेट में एक ही तरह की गेंद पर निर्भर रहना गेंदबाज़ को आसान बना देता है।
उन्होंने कहा, “अगर आप बार-बार एक ही गेंद डालेंगे तो बल्लेबाज़ आपको पकड़ लेगा। छह गेंदें एक ही लेंथ पर डालना सही नहीं है, क्योंकि उनमें से कुछ बाउंड्री के लिए चली जाएंगी। इसलिए वैरिएशन जरूरी है।”
नगिडी के अनुसार, अगर पिच से मदद नहीं मिल रही हो तो गेंदबाज़ को अपनी स्किल्स पर निर्भर रहना पड़ता है, वरना मुश्किल हो सकती है।
हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि टेस्ट क्रिकेट की बेसिक लेंथ हमेशा अहम रहेगी।
“हालात तय करते हैं कि आप कैसे गेंदबाज़ी करेंगे। टेस्ट क्रिकेट की लेंथ कभी खत्म नहीं होगी, लेकिन दबाव में वैरिएशन बहुत मदद करता है।”
उन्होंने मानसिक मजबूती को भी जरूरी बताया।
“यह (डिपिंग स्लोअर बॉल) एक साहसी गेंद है। अगर गलत हो जाए तो फुल टॉस बन सकती है, लेकिन आत्मविश्वास और तैयारी से इसे सही किया जा सकता है।”
नगिडी ने बताया कि वह मैच के दौरान अपने साथियों केएल राहुल, अक्षर पटेल, डेविड मिलर और ट्रिस्टन स्टब्स से लगातार बातचीत करते रहते हैं, ताकि समझ सकें कि बल्लेबाज़ क्या सोच रहे होंगे।
उन्होंने कहा, “मैं क्रिकेट को भावनात्मक तरीके से नहीं खेलता, क्योंकि वह सही जगह नहीं है। यह पूरी तरह एक प्रोफेशनल अप्रोच है।”
अंत में नगिडी ने अपने शुरुआती दिनों में एमएस धोनी से मिली सीख को याद किया।
“मैं बहुत युवा था (21 साल), और एक शांत कप्तान का होना बहुत मददगार रहा। उन्होंने मुझ पर भरोसा किया और मुझे मौके दिए। अपने पहले आईपीएल सीजन में मैं फाइनल में नई गेंद से गेंदबाज़ी कर रहा था।”








