बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी विवाद: सौरव गांगुली ने BCCI का समर्थन किया, ईडन गार्डन्स को लेकर दी प्रतिक्रिया!

क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ बंगाल (CAB) के अध्यक्ष और भारत के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली ने कहा कि उन्हें यह देखकर खुशी है कि पारंपरिक प्रारूप (टेस्ट क्रिकेट) अब गुवाहाटी और रांची जैसे नए स्थानों तक फैल रहा है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि वह कोलकाता के ईडन गार्डन्स में ज्यादा से ज्यादा टेस्ट मैच आयोजित होते देखना चाहते हैं।

पिछले हफ्ते BCCI ने 2026–27 के घरेलू सीजन का शेड्यूल जारी किया, जिसमें भारत 21 जनवरी से 25 फरवरी तक नागपुर, चेन्नई, गुवाहाटी, रांची और अहमदाबाद में खेलेगा। इस दौरान ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ होने वाली बड़ी बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी के लिए कोलकाता और मुंबई जैसे पारंपरिक मैदानों को शामिल नहीं किया गया।

इस पर प्रतिक्रिया देते हुए गांगुली ने कहा कि ईडन गार्डन्स पहले ही काफी मैचों की मेजबानी कर चुका है।

उन्होंने कहा, “ईडन गार्डन्स में बड़े टेस्ट मैच होना हमेशा खास होता है। CAB अध्यक्ष और पूर्व खिलाड़ी होने के नाते मैं यहां टेस्ट मैच चाहता हूं, लेकिन यहां हाल ही में साउथ अफ्रीका के खिलाफ टेस्ट, टी20 वर्ल्ड कप के मैच और IPL मुकाबले हो चुके हैं। जितना हम ईडन में मैच चाहते हैं, उतना ही जरूरी है कि अन्य स्थानों को भी मौका मिले।”

2026–27 का घरेलू सीजन काफी व्यस्त रहने वाला है, जिसमें भारत ऑस्ट्रेलिया, जिम्बाब्वे, श्रीलंका और वेस्टइंडीज के खिलाफ अलग-अलग फॉर्मेट में खेलेगा। कोलकाता और मुंबई को इस बार सिर्फ सीमित ओवरों (व्हाइट-बॉल) के मैच ही दिए गए हैं।

अहमदाबाद का नरेंद्र मोदी स्टेडियम, जहां पिछले साल वेस्टइंडीज के खिलाफ मैच हुआ था, फिर से मेजबानी करेगा। वहीं गुवाहाटी, जिसने नवंबर 2025 में अपना पहला टेस्ट मैच आयोजित किया था, एक साल के भीतर दूसरा टेस्ट मैच भी होस्ट करेगा।

गांगुली ने BCCI के इस फैसले का समर्थन करते हुए कहा, “पूरे भारत में स्टेडियम बहुत अच्छे हैं। चेन्नई, गुवाहाटी और रांची जैसे स्थानों पर टेस्ट मैच होना देखकर मुझे खुशी है, जहां सुविधाएं भी शानदार हैं।”

उन्होंने यह भी बताया कि 2001 की ऐतिहासिक टेस्ट टीम का रीयूनियन ईडन गार्डन्स में आयोजित करने की योजना है, जो सचिन तेंदुलकर के बेटे की शादी के कारण टल गई थी।

अपने कप्तानी के दिनों को याद करते हुए गांगुली ने कहा कि कुछ टेस्ट जीतें 2002 के नैटवेस्ट ट्रॉफी से भी ज्यादा खास थीं।

उन्होंने कहा, “मैं नैटवेस्ट जीत को कोलकाता और चेन्नई (2001), पाकिस्तान (2004), हेडिंग्ले (2002) और एडिलेड (2003) की जीत से नीचे रखूंगा। वो जीतें ज्यादा बड़ी थीं।”

ऑस्ट्रेलिया में मिली जीत को याद करते हुए उन्होंने कहा कि विपक्ष ने पहले दिन 400 रन बनाए थे, फिर भी भारत ने पांचवें दिन मैच जीत लिया।

हेडिंग्ले टेस्ट (2002) का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि उन्होंने दो स्पिनर खिलाए थे। टॉस के समय इयान बॉथम ने पूछा था, “क्या आप गंभीर हैं?” और उन्होंने जवाब दिया, “हां, मैं चाहता हूं कि मेरे स्पिनर आखिरी में गेंदबाजी करें।”

पाकिस्तान दौरे को उन्होंने सबसे कठिन बताया और कहा कि वहां टेस्ट और वनडे जीतना एक बड़ी उपलब्धि थी।

वीरेंद्र सहवाग के मुल्तान में तिहरे शतक को याद करते हुए गांगुली ने कहा, “उसने कहा था कि वह 94, 194 और 294 पर छक्का मारेगा। मैंने कहा था कि 300 के पास सिंगल ले लेना, लेकिन उसने मेरी बात नहीं मानी और छक्का मारकर 300 पूरा किया।”

अंत में उन्होंने कहा कि भले ही भारत ने लगातार नौ मैच जीतकर नैटवेस्ट फाइनल में जगह बनाई थी, लेकिन टेस्ट क्रिकेट हमेशा खास रहेगा।