
राजस्थान रॉयल्स के हेड कोच और क्रिकेट डायरेक्टर कुमार संगकारा ने टीम के पहले मैच से पहले बताया कि रियान पराग को कप्तानी के लिए सबसे बेहतर विकल्प क्यों माना गया, जबकि टीम में रविंद्र जडेजा जैसे अनुभवी खिलाड़ी भी मौजूद थे।
असम के इस युवा खिलाड़ी को कप्तान बनाए जाने पर काफी चर्चा हुई, खासकर इसलिए क्योंकि पिछले सीजन में उनकी कप्तानी में टीम ने 8 में से सिर्फ 2 मैच जीते थे। लेकिन संगकारा ने इस फैसले के पीछे की सोच को स्पष्ट किया।
उन्होंने बताया कि कप्तान चुनने के लिए पांच खिलाड़ियों पर विचार किया गया था, जिनमें संदीप शर्मा और रविंद्र जडेजा भी शामिल थे। चयन के लिए एक स्पष्ट प्रक्रिया और कड़े मानदंड तय किए गए थे। सभी उम्मीदवारों से गहन बातचीत की गई और मुश्किल सवाल पूछे गए।
संगकारा के अनुसार, सभी खिलाड़ी कप्तानी के योग्य थे, लेकिन रियान पराग अपने जवाबों और सोच के कारण सबसे आगे नजर आए। उन्होंने कहा कि पराग में परिपक्वता दिखी, वह सवालों पर गंभीरता से विचार कर रहे थे और टीम के लिए उनका विज़न साफ था।
संगकारा ने बताया कि कप्तानी और नेतृत्व अलग-अलग चीजें हैं। चयन करते समय यह देखा गया कि खिलाड़ी खुद को कितना समझता है, कितना ईमानदार है, और टीम पर उसका प्रभाव कितना है।
पराग ने सिर्फ कप्तान बनने की इच्छा नहीं जताई, बल्कि टीम को लीड करने की स्पष्ट सोच दिखाई, जिसने उन्हें बाकी खिलाड़ियों से आगे कर दिया।
उन्होंने यह भी कहा कि पराग को टीम के सीनियर खिलाड़ियों का पूरा समर्थन मिलेगा, जिनमें रविंद्र जडेजा, यशस्वी जायसवाल, ध्रुव जुरेल, संदीप शर्मा, शिमरोन हेटमायर, जोफ्रा आर्चर और दासुन शनाका शामिल हैं।
संगकारा का मानना है कि कोई भी कप्तान परफेक्ट नहीं होता और गलतियों से ही सीख मिलती है। उन्होंने कहा कि पराग भी गलतियां करेंगे, लेकिन टीम का सपोर्ट उन्हें बेहतर बनने में मदद करेगा।
साथ ही उन्होंने संजू सैमसन को टीम से जाने पर दुख जताया, लेकिन माना कि यह बदलाव जरूरी था। उनके अनुसार, जडेजा और सैम करन जैसे खिलाड़ियों के आने से टीम का संतुलन बेहतर हुआ है, हालांकि करन चोट के कारण बाहर हो गए।
इस तरह राजस्थान रॉयल्स ने सोच-समझकर रियान पराग को कप्तान बनाया है, जिसमें उनकी सोच, परिपक्वता और नेतृत्व क्षमता को सबसे ज्यादा महत्व दिया गया।








