टी20 वर्ल्ड कप फाइनल: टीम इंडिया में सूर्यकुमार यादव ने क्यों अपनाई ‘ओपन-डोर लीडरशिप’!

भारत की कप्तानी संभालने के लगभग छह महीने बाद सूर्यकुमार यादव को एहसास हुआ कि टीम के युवा खिलाड़ियों के साथ “पिता समान” या “बड़े भाई” जैसा व्यवहार करना ज्यादा प्रभावी नहीं होगा।

मुंबई के इस खिलाड़ी ने समझ लिया कि सबसे बेहतर तरीका यही है कि खिलाड़ियों को खुलकर अपने विचार रखने की आज़ादी, खुला संवाद और अपनी-अपनी स्टाइल में खेलने की स्वतंत्रता दी जाए।

सूर्यकुमार ने यह भी तय किया कि वह भले ही रोहित शर्मा के नक्शेकदम पर चलेंगे, लेकिन “जूते उनके अपने होंगे।” इस सफर में उन्हें कोच गौतम गंभीर का भी पूरा समर्थन मिला, जो मानते हैं कि 7 गेंदों पर 21 रन की पारी भी उतनी ही अहम हो सकती है जितनी एक शतक।

सूर्यकुमार ने ड्रेसिंग रूम के माहौल के बारे में कहा: “वे मुझे ड्रेसिंग रूम में ज्यादा बोलने ही नहीं देते। वे अपने तरीके से खेलते हैं। मैंने देखा कि जब उन्हें आज़ादी मिलती है तो मैदान पर उनका रूप बिल्कुल अलग होता है। कप्तानी के 5-6 महीने बाद मैं इस टीम को सही तरह से समझ पाया। तब मुझे लगा कि बड़ा भाई या पिता बनने का कोई मतलब नहीं है। खिलाड़ियों को खुला छोड़ना पड़ता है, तभी उनसे सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन निकलता है।”

उन्होंने यह भी महसूस किया कि एक टीम फूलों के गुलदस्ते की तरह होती है, जिसमें हर खूबसूरत फूल की अपनी खास जगह होती है।

सूर्यकुमार ने कहा: “हर खिलाड़ी की अपनी अलग क्षमता और ताकत होती है। ऐसा नहीं है कि मैंने किसी से कुछ कहा ही नहीं। मैंने खिलाड़ियों से बात की है, लेकिन अब पहले की तुलना में खिलाड़ियों को ज़्यादा खुला छोड़ दिया है। इसलिए अब मैं बहुत कम बोलता हूं।”

इतने बड़े मैच से पहले भी सूर्यकुमार ने अपना हास्यभाव नहीं खोया। जब उनसे पूछा गया कि क्या रोहित शर्मा के जूते उनके लिए बहुत बड़े हैं, तो उन्होंने मज़ाकिया अंदाज़ में जवाब दिया:

“सर, जूते मेरे ही हैं, मैं बस उनके कदमों पर चल रहा हूं।”

उन्होंने रोहित शर्मा की कप्तानी से सीखे सबक के बारे में भी बताया।

“जब मैं उनके साथ खेल रहा था, तब उनसे बहुत कुछ सीखा। मैंने वही रणनीति और वही मूल बातें अपनाने की कोशिश की। मैंने रोहित के साथ बहुत क्रिकेट खेली है और जानता हूं कि वे कैसे काम करते हैं। इसलिए मैंने उनकी कई चीजें अपनाईं और अपने भी कुछ विचार जोड़े। यह तरीका काफी अच्छा काम कर रहा है।”

रविवार का फाइनल सूर्यकुमार के लिए दो साल के सफर का अहम पड़ाव है।

उन्होंने कहा: “हम इस मंच के लिए बहुत अच्छी तैयारी कर रहे हैं। यह सफर दो साल पहले शुरू हुआ था और अब हम फिर उसी स्टेडियम में पहुंचे हैं जहां 2023 में यह सफर रुका था। उम्मीद है कि हम अच्छा क्रिकेट खेलेंगे और मुश्किल हालात में भी साहस दिखाएंगे।”