
तिलक वर्मा चाहते हैं कि भारत टी20 वर्ल्ड कप 2026 में आक्रामक अंदाज़ में ही खेले, चाहे पावरप्ले में शुरुआती विकेट क्यों न गिर जाएं। बाएं हाथ के बल्लेबाज़ ने कहा कि टीम की तीव्रता और इरादा विपक्षी गेंदबाज़ों में “डर” पैदा कर सकता है।
भारत के टॉप ऑर्डर ने ज़िम्बाब्वे के खिलाफ करो या मरो सुपर एट मुकाबले में शानदार वापसी करते हुए रिकॉर्ड 256 रन बनाए।
मैच के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में तिलक ने कहा, “हम बस इसी चीज़ की तलाश में थे। हम एक टीम के तौर पर रन बनाने की सोच रखते हैं। हमने चर्चा की थी कि परिस्थिति चाहे जैसी हो—अगर पावरप्ले में तीन-चार विकेट भी गिर जाएं—तो भी हम उसी लय में बल्लेबाज़ी करेंगे।”
ओपनर संजू सैमसन और अभिषेक शर्मा ने पावरप्ले में तेज़ शुरुआत देकर बड़े स्कोर की नींव रखी। संजू ने इस मैच में रिंकू सिंह की जगह ली और 15 गेंदों में 24 रन बनाए, जबकि अभिषेक ने 30 गेंदों में 55 रन बनाकर फॉर्म में वापसी की।
तिलक ने कहा, “जब ओपनर अच्छी शुरुआत देते हैं, तो नंबर तीन, चार और पांच को भी वही आत्मविश्वास मिलता है। संजू ने शानदार शुरुआत की। हमने यही चर्चा की थी कि विपक्षी गेंदबाज़ों में यह डर दिखना चाहिए कि ये बल्लेबाज़ हर गेंद पर मारने के लिए तैयार हैं।”
हालांकि भारत ग्रुप स्टेज में अजेय रहा, लेकिन टॉप ऑर्डर का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं था। सुपर एट्स में दक्षिण अफ्रीका से हार टीम के लिए एक चेतावनी साबित हुई। तिलक ने बताया कि ज़िम्बाब्वे के खिलाफ मैच से पहले खिलाड़ियों ने पिछले एक साल के सफल टी20 मैचों के वीडियो देखे।
उन्होंने कहा, “मैच से पहले हमने चर्चा की कि हम सकारात्मक मानसिकता के साथ उतरेंगे। हमने पिछले एक साल का टी20 क्रिकेट देखा, कैसे हम खेले थे। वह वीडियो देखने के बाद सबका आत्मविश्वास बढ़ा और हमने तय किया कि मुस्कुराते हुए खेल का आनंद लेना है।”
तिलक ने मुख्य कोच गौतम गंभीर की भी सराहना की, जिन्होंने टीम को अपने आक्रामक ब्रांड का क्रिकेट खेलने के लिए प्रेरित किया।
“गौतम सर ने कहा कि परिस्थिति चाहे जो भी हो, पिछले साल और न्यूजीलैंड व दक्षिण अफ्रीका सीरीज़ में जो क्रिकेट खेला, उसे याद रखो। मैदान पर जाओ, मुस्कुराओ और खेल का मज़ा लो।”
तिलक ने आगे कहा कि क्रिकेट में मानसिकता बेहद अहम होती है और टी20 वर्ल्ड कप में छोटे बदलाव भी बड़े नतीजे ला सकते हैं।
“अहमदाबाद और दिल्ली की पिच अच्छी थी। लेकिन यह मज़ेदार खेल है— मानसिकता बहुत ज़रूरी है। हमने सोचा कि अगर विकेट गिरा तो थोड़ा समय लेंगे। लेकिन पहले हम ऐसा नहीं करते थे। उस समय दबाव विपक्षी गेंदबाज़ पर होता था। विकेट गिरने के बाद भी अगली गेंद पर छक्का मारते थे। हम सिंगल-डबल से सीधे चौका-छक्का की सोच में आ गए थे। हमने तय किया कि अगर पहली गेंद हमारे दायरे में है, तो उसी पर प्रहार करेंगे।”
उन्होंने कहा, “जब बल्लेबाज़ ऐसे सोचते हैं, तो गेंदबाज़ भी दबाव में आ जाता है कि उसे मार पड़ेगी। मानसिकता में यही बदलाव आया है। टीम के तौर पर हमें बहुत अच्छा महसूस हुआ और हम इस तीव्रता को आगे भी जारी रखेंगे।”








