
पूर्व भारतीय कोच राहुल द्रविड़ ने बताया कि जब वह टीम के साथ थे, तब रोहित शर्मा की सबसे बड़ी खूबी उनकी खुद को हालात के हिसाब से ढालने की क्षमता थी। द्रविड़ के मुताबिक, रोहित का संदेश पूरी टीम तक आसानी से पहुंच जाता था, जिससे कोच के तौर पर उनका काम भी आसान हो जाता था।
रोहित की कप्तानी में द्रविड़ ने करीब तीन साल तक टीम इंडिया को कोचिंग दी और इसी दौरान भारत ने अमेरिका में खेले गए 2024 टी20 वर्ल्ड कप का खिताब जीता। इसके बाद गौतम गंभीर ने हेड कोच की जिम्मेदारी संभाली।
रोहित अपने मज़ाकिया स्वभाव और सहज अंदाज़ के लिए टीम में काफी लोकप्रिय हैं। यही वजह है कि वह साथियों के साथ मज़बूत रिश्ता बना पाए और टीम को बेहतर बनाने के अपने विचार खुलकर रख सके।
मंगलवार को कर्नाटक स्टेट क्रिकेट एसोसिएशन के एक कार्यक्रम में द्रविड़ ने कहा, “सबसे शानदार बात यह थी कि रोहित ने तुरंत नेतृत्व संभाल लिया। उन्होंने दूसरों से कहने के बजाय खुद जिम्मेदारी ली कि वह टीम का टेम्पो सेट करेंगे। जब कप्तान खुद आगे बढ़कर कहता है कि ‘मैं यह करूंगा, भले ही इससे कभी-कभी मेरा औसत या रन प्रभावित हों’, तो यह संदेश टीम तक पहुंचाना बहुत आसान हो जाता है।”
उन्होंने आगे कहा, “मुझे लगा कि रोहित ने लीडरशिप में बदलाव को बहुत अच्छे से संभाला। टीम को कभी यह महसूस नहीं हुआ कि वह बदल गए हैं, और यही एक लीडर की बहुत अहम और दुर्लभ क्वालिटी होती है। उन्होंने खुद उदाहरण पेश किया।”
द्रविड़ ने बताया कि जैसे ही रोहित को लगा कि भारतीय व्हाइट-बॉल क्रिकेट को बदलने की ज़रूरत है, उन्होंने खुद आगे बढ़कर जिम्मेदारी ले ली।
उन्होंने कहा, “रोहित के साथ काम करना आसान था क्योंकि वह खुद समझ रहे थे कि खेल बदल रहा है। पिछले 10 सालों में व्हाइट-बॉल क्रिकेट में बल्लेबाज़ी का अंदाज़ पूरी तरह बदल चुका है। कहीं न कहीं यह महसूस हो रहा था कि हम थोड़ा पीछे हैं और हमें और बेहतर होना होगा। हमें थोड़ा ज्यादा जोखिम लेना होगा। रन रेट बढ़ रहे थे। इन सब बातों पर रोहित पूरी तरह सहमत थे और उन्होंने खेल को आगे ले जाने की जिम्मेदारी खुद ली।”
द्रविड़ ने रोहित की बल्लेबाज़ी की भी तारीफ की और कहा कि उन्होंने आधुनिक क्रिकेट की मांगों के मुताबिक खुद को बखूबी ढाला।
“रोहित का रिकॉर्ड पहले से ही शानदार रहा है। 2019 वर्ल्ड कप में उनका प्रदर्शन कमाल का था—पांच शतक और एक खास टेम्पो। लेकिन समय के साथ उस टेम्पो को बदलने की जरूरत थी।”
द्रविड़ ने कोचिंग को एक लगातार बदलने वाली प्रक्रिया बताया और कहा कि कोच को भी समय के साथ खुद को बदलना पड़ता है।
उन्होंने कहा, “एक कोच के तौर पर सीखने वाली सबसे बड़ी बात यह है कि आपको वैसे कोचिंग नहीं करनी चाहिए, जैसे आपने खुद खेला हो। खेल बहुत बदल चुका है। दिवंगत केकी तारापोर जैसे महान कोच अगर मुझे हवा में शॉट मारते देखते थे, तो मुझे दौड़ लगवा देते थे। वह कहते थे—गेंद ज़मीन पर रखो, नीचे खेलो।”
द्रविड़ ने आगे कहा, “आज अगर वही तरीके अपनाए जाएं और कहा जाए कि गेंद हवा में मत मारो, तो यह काम नहीं करेगा। इसलिए ज़रूरी है कि समय के साथ बदला जाए और यह समझा जाए कि आज की ज़रूरत क्या है।”
इसी के साथ द्रविड़ ने अपनी बात खत्म की और इस बात पर ज़ोर दिया कि क्रिकेट में सफलता के लिए बदलाव को अपनाना बेहद ज़रूरी है।








