विराट कोहली के टेस्ट संन्यास पर नई बहस, संजय मांजरेकर की टिप्पणी से मचा हलचल!

पूर्व भारतीय बल्लेबाज़ और मौजूदा कमेंटेटर संजय मांजरेकर ने विराट कोहली के टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लेने के फैसले पर दुख और निराशा जताई है। मांजरेकर का मानना है कि टेस्ट क्रिकेट को इतनी जल्दी अलविदा कहने के बजाय, पूर्व भारतीय कप्तान को अपनी फॉर्म वापस पाने के लिए और मेहनत करनी चाहिए थी।

मांजरेकर ने कहा कि ऐसे समय में कोहली का टेस्ट क्रिकेट से जाना और भी ज्यादा चुभता है, जब उनके समकालीन खिलाड़ी—जो रूट, स्टीव स्मिथ और केन विलियमसन—टेस्ट क्रिकेट में अपनी विरासत को और मजबूत कर रहे हैं, खासकर जो रूट के लगातार ऊंचाइयों को छूने के बीच। उन्होंने यह भी कहा कि कोहली का संन्यास इसलिए ज्यादा अफसोसजनक है क्योंकि करियर के आखिरी दौर में टेस्ट क्रिकेट में उनके बल्लेबाज़ी संघर्ष लंबे समय तक चले।

मांजरेकर ने इंस्टाग्राम पर साझा एक वीडियो में कहा,
“जब जो रूट टेस्ट क्रिकेट में नई ऊंचाइयों को छू रहे हैं, तो मेरा ध्यान विराट कोहली की ओर जाता है। उन्होंने टेस्ट क्रिकेट छोड़ दिया और यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि संन्यास से पहले के पांच सालों में, जब वह टेस्ट क्रिकेट में औसतन 31 रन बना रहे थे, उन्होंने यह समझने के लिए पूरी शिद्दत से कोशिश नहीं की कि समस्या आखिर थी क्या। मुझे बस दुख होता है कि जो रूट, स्टीव स्मिथ और केन विलियमसन जैसे खिलाड़ी टेस्ट क्रिकेट में अपनी पहचान और मजबूत कर रहे हैं।”

मांजरेकर का मानना है कि कोहली तकनीकी और मानसिक बदलावों पर काम कर सकते थे या फिर कुछ समय के लिए टीम से बाहर रहकर घरेलू और अंतरराष्ट्रीय फर्स्ट-क्लास क्रिकेट के जरिए वापसी की कोशिश कर सकते थे।

उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि उन्हें कोहली के टेस्ट से संन्यास के बाद वनडे क्रिकेट खेलने का फैसला और ज्यादा निराशाजनक लगा। मांजरेकर के मुताबिक, टेस्ट क्रिकेट अब भी कौशल, धैर्य और मानसिक मजबूती की सबसे बड़ी परीक्षा है, जबकि शीर्ष क्रम के बल्लेबाज़ के लिए वनडे सबसे आसान फॉर्मेट है।

उन्होंने कहा, “अगर विराट कोहली ने पूरी तरह क्रिकेट से ही संन्यास ले लिया होता, तो वह समझ में आता। लेकिन टेस्ट छोड़कर वनडे खेलना मुझे ज्यादा निराश करता है, क्योंकि मैंने पहले भी कहा है कि शीर्ष क्रम के बल्लेबाज़ के लिए यह सबसे आसान फॉर्मेट है। असली परीक्षा टेस्ट क्रिकेट में होती है, जबकि टी20 की चुनौतियां अलग तरह की हैं।”

मांजरेकर ने आगे कहा, “वह इतने फिट हैं, बेहद फिट, इसलिए और भी ज्यादा लगता है कि वह फॉर्म में लौटने की लड़ाई जारी रख सकते थे। भले ही उन्हें किसी सीरीज से बाहर कर दिया जाता, तो भी वह फर्स्ट-क्लास क्रिकेट में उतरकर—ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड या भारत में और मैच खेलकर—एक और वापसी की कोशिश कर सकते थे।”

टेस्ट क्रिकेट के अपने आखिरी पांच वर्षों में कोहली का फॉर्म लगातार गिरा रहा। 2021 से लेकर संन्यास तक उन्होंने 39 मैचों (69 पारियों) में 2028 रन बनाए, औसत रहा 30.72। इस दौरान उनके नाम तीन शतक और नौ अर्धशतक रहे। इस फेज़ में गेंदबाज़ों ने ऑफ स्टंप के बाहर उनकी कमजोरी का खूब फायदा उठाया और वह कई बार विकेट के पीछे आउट हुए।

इस दौरान ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाज़ स्कॉट बोलैंड ने कोहली को सबसे ज्यादा परेशान किया और पांच बार उनका विकेट लिया। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ अपनी आखिरी टेस्ट सीरीज़ में कोहली ने नौ पारियों में 190 रन बनाए, जिसमें पर्थ टेस्ट का एक शतक शामिल था। उस सीरीज़ में बोलैंड ने उन्हें चार बार आउट किया और कुछ महीनों बाद कोहली ने टेस्ट क्रिकेट से संन्यास ले लिया।

विराट कोहली ने अपने टेस्ट करियर का अंत 123 मैचों (210 पारियों) में 9230 रनों के साथ किया, जिसमें 30 शतक और 31 अर्धशतक शामिल हैं। 2019 के अंत में उनका औसत 54.97 था, जो करियर खत्म होने तक घटकर 46.85 रह गया।