
आईसीसी और एसीसी—दोनों ही टूर्नामेंटों में भारत को खिताब दिलाने के साथ, गौतम गंभीर का रिकॉर्ड भारत के व्हाइट-बॉल कोच के तौर पर काफ़ी शानदार रहा है। लेकिन टेस्ट क्रिकेट की बात करें तो तस्वीर उतनी अच्छी नहीं दिखती, क्योंकि SENA देशों के खिलाफ भारत उनके कार्यकाल में अब तक दस टेस्ट मैच हार चुका है।
माना जा रहा है कि पिछले महीने घरेलू मैदान पर दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ दो टेस्ट मैचों की सीरीज़ में करारी हार के बाद, क्रिकेट बोर्ड के एक प्रभावशाली सदस्य ने अनौपचारिक रूप से एक बार फिर वीवीएस लक्ष्मण से संपर्क किया था, ताकि यह जाना जा सके कि क्या वह रेड-बॉल टीम की कोचिंग में रुचि रखते हैं।
हालांकि रिपोर्ट्स के मुताबिक, लक्ष्मण फिलहाल बेंगलुरु स्थित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में “हेड ऑफ क्रिकेट” की अपनी भूमिका से संतुष्ट हैं।
भले ही गंभीर का बीसीसीआई के साथ कॉन्ट्रैक्ट 2027 वनडे वर्ल्ड कप के बाद खत्म होता हो, लेकिन आने वाले पांच हफ्तों में शुरू होने वाले टी20 वर्ल्ड कप में भारत के प्रदर्शन के आधार पर उनके कार्यकाल की समीक्षा की जा सकती है।
बीसीसीआई के गलियारों में अब भी यह बहस जारी है कि क्या गंभीर वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप 2025–27 चक्र के बचे हुए नौ टेस्ट मैचों के लिए रेड-बॉल टीम को संभालने के सबसे सही विकल्प हैं।
इंग्लैंड में पांच टेस्ट की सीरीज़ 2-2 से ड्रॉ कराने के बाद, भारत को अब दो विदेशी दौरों का सामना करना है—अगस्त 2026 में श्रीलंका के खिलाफ दो टेस्ट और उसके बाद अक्टूबर में न्यूजीलैंड का दो टेस्ट दौरा। इसके बाद जनवरी–फरवरी 2027 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ घरेलू मैदान पर पांच टेस्ट की बड़ी सीरीज़ खेली जाएगी।
एक बीसीसीआई सूत्र के हवाले से PTI ने कहा, “गंभीर को भारतीय क्रिकेट के पावर सर्कल्स में मज़बूत समर्थन हासिल है। अगर भारत टी20 वर्ल्ड कप जीतता है या कम से कम फाइनल तक पहुंचता है, तो वह बिना किसी अड़चन के अपना कार्यकाल जारी रखेंगे। लेकिन यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या वह टेस्ट टीम के साथ भी बने रहते हैं।”
सूत्र ने आगे कहा, “उनके पक्ष में यह बात भी जाती है कि रेड-बॉल फॉर्मेट में ज़्यादा विकल्प मौजूद नहीं हैं, क्योंकि वीवीएस लक्ष्मण सीनियर टेस्ट टीम की कोचिंग में रुचि नहीं रखते।”
राहुल द्रविड़ के दौर के उलट, जब जिम्मेदारियां साफ़ तौर पर तय थीं, मौजूदा समय में भारतीय ड्रेसिंग रूम का माहौल थोड़ा अस्थिर माना जा रहा है। कई खिलाड़ी गंभीर के नेतृत्व में खुद को पूरी तरह सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे हैं। द्रविड़ के तीन साल के कार्यकाल में खिलाड़ियों को खुद को साबित करने के लिए लंबा समय दिया जाता था।
टी20 वर्ल्ड कप टीम से शुभमन गिल को बाहर करने के फैसले में गंभीर की भूमिका साफ़ दिखी, और इससे कई खिलाड़ियों के मन में यह डर बैठ गया है कि अगर टीम के भविष्य के बड़े चेहरे को बाहर किया जा सकता है, तो किसी का भी नाम अगली कट लिस्ट में आ सकता है।
नीतिगत फैसलों को लेकर बीसीसीआई हमेशा सोच-समझकर कदम उठाता है। शेड्यूल के मुताबिक, टी20 वर्ल्ड कप के बाद दो महीने तक इंडियन प्रीमियर लीग खेली जाएगी।
इसके बाद बोर्ड के पास भारत के अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शन की समीक्षा करने और यह तय करने के लिए पर्याप्त समय होगा कि अलग-अलग फॉर्मेट के लिए अलग कोच रखे जाएं या एक ही कोच सभी फॉर्मेट संभाले।
भले ही बीसीसीआई में गंभीर के समर्थक मौजूद हों, लेकिन आने वाले दो महीने “गुरु गंभीर” के लिए बेहद अहम और दिलचस्प रहने वाले हैं।








