‘लोगों के अपने एजेंडा हैं…’: गौतम गंभीर की आलोचना पर भड़के इंडिया के बैटिंग कोच!

दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ पहले टेस्ट में हार के बाद भारत के मुख्य कोच गौतम गंभीर पर हो रही लगातार आलोचनाओं से टीम के बैटिंग कोच सितांशु कोटाक बेहद नाराज़ हैं। उनका मानना है कि इस आलोचना के पीछे कुछ लोगों के निजी स्वार्थ भी जुड़े हैं।

गंभीर की कोचिंग में भारत ने पिछले एक साल में घरेलू मैदान पर चार टेस्ट हारे हैं, जिनमें कोलकाता में 30 रन की हार भी शामिल है।

कोटाक बोले, “गौतम गंभीर, गौतम गंभीर कर रहे हैं लोग… मैं स्टाफ हूँ और मुझे बुरा लगता है। ये तरीका नहीं है।”

उन्होंने साफ कहा कि इस आलोचना का कुछ हिस्सा एजेंडा-ड्रिवन है। “कुछ लोगों के अपने एजेंडा होंगे। उन्हें शुभकामनाएँ, लेकिन ये बहुत गलत है।”

कोलकाता टेस्ट की पिच को लेकर गंभीर ने जिस तरह उसका बचाव किया— जबकि भारत 124 का छोटा लक्ष्य भी नहीं बचा पाया— उसके बाद से उनपर सवाल उठे। रैंक टर्नर पर मैच सिर्फ तीन दिन चला और बल्लेबाज़ों की असफलता ने कोच की रणनीति पर उंगली उठाई।

गंभीर ने कहा था कि पिच बिल्कुल वैसी ही थी जैसी टीम मैनेजमेंट ने मांगी थी। लेकिन कप्तान शुभमन गिल कुछ हफ्ते पहले कह चुके थे कि टीम स्पोर्टिंग विकेट्स चाहती है।

कोटाक को हैरानी है कि सिर्फ गंभीर को निशाना बनाया जा रहा है। “कोई ये नहीं पूछ रहा कि बल्लेबाज़ ने क्या किया, गेंदबाज़ ने क्या किया… या बल्लेबाज़ी में हम क्या अलग कर सकते थे।”

उन्होंने गंभीर की तारिफ करते हुए कहा: “गौतम ने पिछले मैच में सारी जिम्मेदारी खुद ले ली। उन्होंने कहा कि क्यूरेटर को दोष देना ठीक नहीं, इसलिए ब्लेम खुद लिया।”

कोटाक ने माना कि दक्षिण अफ्रीका उसी विकेट पर हमसे बेहतर खेला। उन्होंने बताया कि बल्लेबाज़ों की रणनीति में कमी थी।

उन्होंने समझाया: “बल्लेबाज़ को हम ये नहीं कह सकते कि पहली गेंद से आक्रामक हो जाओ। उसे खुद प्लान बनाना चाहिए, अपनी टाइमिंग ढूँढनी चाहिए।”

उनका मानना है कि ऐसे विकेट पर “डिफेंसिव नहीं, बल्कि सक्रिय क्रिकेट खेलनी चाहिए—सही फुटवर्क के साथ।”

कोटाक ने बताया कि पिछले 15 वर्षों में T20 क्रिकेट के कारण खिलाड़ियों की तकनीक और मानसिकता बदली है।

“तीनों फॉर्मेट खेलने वाले खिलाड़ी बहुत हैं, लेकिन उनकी तकनीकें अलग होती हैं। टेस्ट में फुटवर्क सबसे बड़ा हथियार है। T20 में पावर हिटिंग के लिए जल्दी बेस तैयार करना पड़ता है, वहाँ फुटवर्क कम दिखता है।”

उन्होंने कहा कि आधुनिक क्रिकेट में खिलाड़ियों को इन तीनों शैलियों में तालमेल बैठाना पड़ता है, लेकिन टेस्ट में स्पिन खेलने की कला का मूल आधार अब भी वही है— मजबूत फुटवर्क।

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Manish Kumar
मनीष कुमार एक अनुभवी खेल पत्रकार हैं, जिन्हें खेल पत्रकारिता में 25 से ज़्यादा सालों का अनुभव है। वह खास तौर पर क्रिकेट के विशेषज्ञ माने जाते हैं, खासकर टेस्ट क्रिकेट जैसे लंबे और चुनौतीपूर्ण फॉर्मेट में। उन्होंने टाइम्स ऑफ इंडिया ऑनलाइन के साथ करीब 16.5 साल तक काम किया, जहां उन्होंने बड़े क्रिकेट आयोजनों की कवरेज की और गहराई से विश्लेषण वाले लेख और उनकी भरोसेमंद राय पेश की। टेस्ट क्रिकेट के प्रति उनका जुनून उनकी लेखनी में साफ दिखाई देता है, जहां वह खेल की बारीकियों, रणनीतिक मुकाबलों और खिलाड़ियों के व्यक्तिगत प्रदर्शन को सरल और स्पष्ट तरीके से समझाते हैं। मनीष अपनी तेज़ नज़र और डिटेल्स पर ध्यान देने के लिए जाने जाते हैं। आज भी वह क्रिकेट के रोमांच, जटिलताओं और कहानी को दुनिया भर के प्रशंसकों तक जीवंत अंदाज़ में पहुंचाते हैं।