विराट कोहली और रोहित शर्मा की तारीफ़ — ‘वो विपक्ष को मज़ाक बना देते हैं’!

दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ रांची में खेले गए पहले वनडे में विराट कोहली और रोहित शर्मा की शानदार पारियों के बाद, टीम इंडिया के कप्तान केएल राहुल ने इन दिग्गजों की उस क्षमता की जमकर सराहना की, जिससे वे विपक्ष को “सिली” यानी बेबस दिखा देते हैं।

भारत ने 17 रन से रोमांचक जीत दर्ज कर तीन मैचों की श्रृंखला में 1-0 की बढ़त हासिल की। कोहली ने 120 गेंदों पर 135 रन की 52वीं वनडे सेंचुरी ठोकी, जबकि रोहित ने 57 रनों की बेहतरीन पारी खेली।

राहुल ने मैच के बाद कहा— “रोहित और कोहली को इस अंदाज़ में खेलते देखना हमेशा मज़ेदार होता है। वो विपक्ष को मज़ाक जैसा दिखा देते हैं और बताते हैं कि क्यों वो ऐसे खिलाड़ी हैं। मैं सालों से ये देखता आया हूँ, ड्रेसिंग रूम में उनके साथ होना और भी मज़ेदार है।”

हालाँकि मैच का रोमांचक अंत उन्हें थोड़ा चिंतित भी कर गया।

“झूठ बोलूँगा अगर कहूँ कि अंत में पेट में तितलियाँ नहीं उड़ रही थीं। काफी समय बाद वनडे खेल रहे थे, उम्मीदें थीं। लेकिन हमने लगातार विकेट लिए और गेंदबाज़ अपनी योजनाओं पर टिके रहे।”

राहुल ने बताया कि नंबर 6 पर बैटिंग करना उनके लिए सीखने जैसा रहा।

“नंबर 6 पर बल्लेबाज़ी करना ठीक है, टीम के लिए वही करना है जो ज़रूरी हो। पिछले 2-3 सीरीज से मेरी यही भूमिका है। यह मेरे व्यक्तिगत विकास में भी मदद करता है।”

उन्होंने कुलदीप यादव और हर्षित राणा की भी जमकर तारीफ़ की।

“हर्षित ने कमाल किया, हमें पता था कि उनमें पोटेंशियल है। लम्बा है, तेज़ गेंदबाज़ी कर सकता है। भले अंतिम ओवरों में रन खा लें, पर शुरुआती विकेट दिलाना बड़ी बात है। कुलदीप तो लगातार यही काम करते आए हैं—विकेट लेना।”

चार विकेट झटकने वाले कुलदीप ने बताया— “पहले स्पेल के बाद KL से बात की— मैदान कठिन था, पर विकेट चाहिए थे, इसलिए अटैक करना था। मैं स्क्रैम्बल्ड सीम और सीम-अप मिला रहा था। थोड़ा बैक ऑफ द लेंग्थ डाल रहा था, क्योंकि फुल लेंग्थ आसान थी।”

उन्होंने बताया कि 34 ओवर के बाद एक गेंद का नियम मुश्किल हो गया।

“गेंद बहुत गीली हो रही थी। हम धूल लगा रहे थे, बार-बार अंपायर से बदलाव मांग रहे थे। बोश और जैनसन दोनों शानदार खेले, इसलिए विकेट निकालना ज़रूरी था। धीमी गति वाली गेंदें भी डालनी पड़ीं, सिर्फ स्टॉक बॉल पर भरोसा नहीं कर सकते।”

एडेन मार्करम ने कहा— “चेज़ पर गर्व है। लड़कों का भरोसा अच्छा लगा। सब चुपचाप उम्मीद लगाए हुए थे। ऊपर का क्रम जल्दी गिरना निर्णायक रहा। फिर भी लगा था कि चेज़ कर सकते हैं। आगे छोटी-छोटी चीजें दुरुस्त करनी होंगी।”