
टीम से जुड़े सूत्र बताते हैं कि गिल अभी पूरी तरह फिट नहीं हैं। गर्दन के पीछे का दर्द कम तो हुआ है, मगर पूरी तरह खत्म नहीं हुआ। BCCI ने भी यही कहा है कि उनकी निगरानी जारी रहेगी और खेलने पर फैसला बाद में लिया जाएगा।
दिक्कत यह है कि भले ही डॉक्टर उन्हें फिट मान लें, पाँच दिन का टेस्ट क्रिकेट उनकी चोट को और बढ़ा सकता है। लेकिन टीम को उनकी बेहद जरूरत है, खासकर तब जब साइमन हार्मर जैसी स्पिन चुनौती सामने है। मैनेजमेंट को भरोसा है कि गिल दबाव में ज्यादा टिकाऊ विकल्प हैं।
साई सुदर्शन, देवदत्त पडिक्कल या ध्रुव जुरेल के नाम सामने आए हैं, मगर भरोसा अभी भी गिल पर ज्यादा है। यह भी माना जा रहा है कि गिल सिर्फ इतना फिट होना चाहते हैं कि टीम में रहकर बल्लेबाजी कर सकें।
एक और वजह यह है कि बतौर कप्तान यह उनका शुरुआती दौर है। वे टेस्ट मिस नहीं करना चाहते, ताकि उनकी कप्तानी क्षमता पर सवाल न उठें। अगर वे बाहर होते हैं, तो केएल राहुल या अक्षर पटेल जैसे विकल्प अस्थायी कप्तान बन सकते हैं और गिल नहीं चाहेंगे कि अभी किसी और को मौका मिले।
ODI सीरीज़ 30 नवंबर से शुरू हो रही है। अगर गिल टेस्ट खेलते हैं, तो चयनकर्ता उन्हें ODIs से आराम देने पर विचार कर सकते हैं, क्योंकि फिलहाल उस फ़ॉर्मैट में कोई बड़ा मौका नहीं है।
असलियत यह है कि गिल अगले चार हफ्तों में लगातार—दूसरा टेस्ट, तीन ODI और पाँच T20—ये सब नहीं खेल सकते। उनकी वापसी जल्दबाज़ी में कराना उल्टा पड़ सकता है।
गिल खेलना चाहते हैं, टीम भी चाहती है कि वे खेलें। लेकिन उनका शरीर क्या अनुमति देगा—यही असली चुनौती है।








