
भारत के सुपर आठ मुकाबले में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ करारी हार के बाद सबसे बड़ा सवाल यही था — आखिर अक्षर पटेल को प्लेइंग इलेवन से बाहर क्यों किया गया? अब टीम मैनेजमेंट ने इस पर चुप्पी तोड़ी है। सहायक कोच रयान टेन डोएशेटे और बल्लेबाज़ी कोच सितांशु कोटक ने साफ कहा कि यह फैसला पूरी तरह रणनीतिक था।
दक्षिण अफ्रीका ने भारत को 76 रन से हरा दिया और वॉशिंगटन सुंदर को अक्षर पटेल पर तरजीह देने का फैसला जमकर आलोचना में घिर गया।
मैच के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में टेन डोएशेटे ने कहा, “पिछले कुछ दिनों से हम लगातार प्लेइंग इलेवन पर चर्चा कर रहे थे। हमने खासतौर पर मिडिल ओवर्स में मैच-अप को ध्यान में रखा। अब पीछे मुड़कर देखें तो अक्षर को खिलाना सही फैसला लगता है, लेकिन उस वक्त हमें लगा कि हमें आठवें बल्लेबाज़ के तौर पर रिंकू सिंह की ज़रूरत है। फैसला वहीं से जुड़ा हुआ था।”
उन्होंने यह भी साफ किया कि अक्षर को बाहर रखने का उनकी लीडरशिप या ऑलराउंड क्षमता से कोई लेना-देना नहीं था।
“यह अक्षर की अहमियत या उनकी नेतृत्व क्षमता को कम आंकने के लिए बिल्कुल नहीं था,” उन्होंने जोड़ा।
वहीं बल्लेबाज़ी कोच सितांशु कोटक ने बताया कि फैसला दक्षिण अफ्रीका की बैटिंग लाइन-अप को देखकर लिया गया था और मैच से पहले गौतम गंभीर व सूर्यकुमार यादव ने अक्षर से इस पर बात भी की थी।
कोटक ने आईसीसी मिक्स्ड ज़ोन में कहा, “देखिए, सूर्य और गौतम दोनों ने अक्षर से इस फैसले को लेकर बात की थी। हमने वॉशी को इसलिए खिलाया क्योंकि उनकी टॉप-5 में तीन बाएं हाथ के बल्लेबाज़ थे — क्विंटन डिकॉक, रयान रिकेल्टन और डेविड मिलर। ऐसे में लगा कि ऑफ-स्पिनर होना फायदेमंद रहेगा, जो बाएं हाथ के बल्लेबाज़ से गेंद दूर ले जाता है।”
उन्होंने आगे बताया, “डिकॉक और रिकेल्टन को तो बुमराह ने जल्दी आउट कर दिया, इसलिए वॉशी को दो ओवर से ज्यादा गेंदबाज़ी करनी नहीं पड़ी। असली योजना यही थी कि वह पावरप्ले में गेंदबाज़ी करें, लेकिन मैच की स्थिति के हिसाब से चीज़ें बदल जाती हैं।”
उपकप्तान होने के बावजूद अक्षर को बड़े मैच में बाहर बैठाने को लेकर उठे सवाल पर कोटक ने कहा कि इससे उनका आत्मविश्वास नहीं डगमगाएगा।
“अक्षर ने इतना क्रिकेट खेला है कि एक फैसले से उनका कॉन्फिडेंस कम नहीं होगा। जैसा मैंने कहा, कप्तान और कोच ने उन्हें वजह भी साफ-साफ बता दी होगी।”
जब उनसे पूछा गया कि पहले शुभमन गिल और अब अक्षर — दोनों उपकप्तानों को बाहर करना क्या कोई संदेश है, तो टेन डोएशेटे ने इसे खारिज कर दिया।
“मामला इतना सीधा नहीं है। जब आपको दो में से एक को चुनना होता है, तो हमने ऐसे खिलाड़ी को प्राथमिकता दी जो पावरप्ले में गेंदबाज़ी कर सके। अक्षर कभी-कभार वहां गेंदबाज़ी करते हैं, लेकिन हमें लगा कि वॉशी अब वहां ज्यादा असरदार साबित हो सकते हैं।”
उन्होंने समझाया कि रणनीति यही थी कि वॉशिंगटन पावरप्ले में दो ओवर डालें, हालांकि दक्षिण अफ्रीका के 30 पर तीन विकेट गिरने से प्लान बदल गया।
“आज ऐसा नहीं हो पाया, इसलिए अब लग रहा है कि हमने सिर्फ मिडिल ओवर्स के लिहाज़ से फैसला किया, जहां शायद अक्षर बेहतर होते। लेकिन रणनीति उससे बड़ी थी। टी20 क्रिकेट में कई बार योजनाएं काम नहीं करतीं।”
अंत में उन्होंने कहा, “ऐसे टूर्नामेंट में हर खिलाड़ी को समझना चाहिए कि हम हर मैच के लिए सर्वश्रेष्ठ ग्यारह खिलाड़ी चुनने की कोशिश करते हैं। मुझे उम्मीद है अक्षर भी इसे उसी भावना से लेंगे।”








