
दक्षिण अफ्रीका के कप्तान टेम्बा बवुमा ने रविवार को कहा कि उनकी बल्लेबाज़ी की पूरी रणनीति उनके मज़बूत और अटल डिफेन्स पर आधारित है — वही डिफेन्स जिसने उन्हें ईडन गार्डेंस की टूटती हुई पिच पर टिकाए रखा, जहाँ आठ सत्रों में कुल 38 विकेट गिरे।
पाँच महीने की पिंडली की चोट से उभरकर लौटे बवुमा ने भारत को पहले टेस्ट में 30 रन से हराते हुए अपनी टीम को ऐतिहासिक जीत दिलाई। कप्तान बनने के बाद यह उनकी 11 में से 10वीं टेस्ट जीत है।
बवुमा बोले— “देखिए, मैं हमेशा अपने डिफेन्स पर भरोसा करता हूँ। मेरा खेल बहुत सीधा है। मैं अपने डिफेन्स के इर्द–गिर्द ही खेलता हूँ।” उन्होंने दूसरी पारी में नाबाद 55 रन बनाए।
कॉर्बिन बॉश के साथ उनकी 44 रन की साझेदारी ने मैच की दिशा बदल दी, जिससे दक्षिण अफ्रीका की कुल बढ़त 100 के पार गई और भारत के सामने 124 रन का मुश्किल लक्ष्य खड़ा हो गया।
उन्होंने कहा— “आज सुबह विकेट बेहतर था। काश हमारे पास कुछ और विकेट होते, तो शायद हम 125 से ज्यादा की बढ़त बना लेते।”
भले ही मैच तीन दिनों से पहले ही खत्म हो गया, बवुमा का कहना है कि भारत आने वाली हर टीम को ऐसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है।
उन्होंने बताया कि असली चुनौती तेज़ या खतरनाक टर्न नहीं थी — बल्कि अनिश्चित उछाल थी।
बवुमा ने कहा— “स्पिन के लिहाज़ से देखा जाए तो शायद आप ऐसी पिच तीसरे–चौथे दिन की उम्मीद करते हैं। लेकिन आप भारत में आते हैं तो यह सब सामान्य है।”
“मैंने कभी यहाँ दिन पाँच पर बल्लेबाज़ी नहीं की। दिन चार भी नहीं—सिवाय इसके कि विरोधी 600 बना दें।”
उन्होंने आगे कहा कि असली मुश्किल उछाल पर भरोसा करने में थी—कुछ गेंदें ठीक से उठ रही थीं, कुछ नीची रह जा रही थीं।
“कोई डरावनी बात नहीं थी…कुछ भी अप्रत्याशित नहीं। बस उछाल पर भरोसा करना कठिन था। यही वजह है कि क्रॉस–बैटेड शॉट खेलना मुश्किल हो जाता था।”
इस दावे पर कि दक्षिण अफ्रीका ने भारत को उसी की पिच पर उसी के खेल में हराया, बवुमा ने कहा— “हाँ, इसमें सच्चाई है। हमें पता था कि पिच स्पिनर्स के लिए बनाई जाएगी। हमें बिल्कुल आश्चर्य नहीं हुआ। हमारे कई युवा खिलाड़ियों के लिए भी यह अनुभव ज़रूरी था।”
उन्होंने कहा कि ऐसी पिचों पर स्ट्राइक रोटेशन सबसे अहम होता है।
“आपको रनगति चलती रखनी होती है। विपक्ष ने फील्ड फैला दी थी, तो सिंगल्स मिल रहे थे और मैंने उसका फायदा उठाया।”
उन्होंने माना कि उनका स्वीप शॉट पूरी तरह पूर्व–निर्धारित रणनीति का हिस्सा था। “स्वीप मेरे लिए पहले से तय शॉट होता है।”
दक्षिण अफ्रीका को भरोसा था कि 125 भी बचाया जा सकता है। “ऐसा रोज़ नहीं होता कि आप 125 बनाएं और सोचे कि मैच जीत सकते हैं, लेकिन हमें विश्वास था।”
भारत के 77/7 पर पहुँचने के बाद अक्षर पटेल ने दो छक्के मारकर थोड़ी उम्मीद जगाई, लेकिन बावुमा के मुताबिक उनकी असली योजना क़ायम थी— “केशव (महाराज) हमारा अटैकिंग विकल्प था। दाएँ हाथ के सामने वह और खतरनाक हो जाता है। जब दो बाएँ हाथ वाले थे, तो हमने मार्कराम और हार्मर का इस्तेमाल किया।”
उन्होंने प्लेयर ऑफ द मैच साइमन हार्मर (8 विकेट) की तारीफ करते हुए कहा— “गेंद उसकी उँगलियों से ऊँची ट्राजेक्टरी में निकलती है, उसका पेस कंट्रोल बेहतरीन है और वह गेंद पर जबरदस्त रेव्स डाल सकता है। वह बहुत समझदार गेंदबाज़ है। टीम में उसकी वापसी ने हमारी स्पिन ताकत दोगुनी कर दी है।”
“पहले हम स्पिन में ज़्यादातर केशव पर निर्भर थे, लेकिन अब साइमन ने पूरी गेंदबाज़ी यूनिट को और मज़बूत बना दिया है।”








