टी20 वर्ल्ड कप: क्यों भारत-पाकिस्तान के बड़े मुकाबले जल्द अपना व्यावसायिक आकर्षण खो सकते हैं!

भारत के लगातार पाकिस्तान पर एकतरफा दबदबे के चलते, पूर्व क्रिकेटरों और खेल प्रेमियों का मानना है कि कभी बेहद रोमांचक माने जाने वाले इस मुकाबले की व्यावसायिक अहमियत अब कम होती जा रही है — कम से कम पाकिस्तान में तो ज़रूर।

हालिया आईसीसी विवाद के दौरान सरकार के कड़े रुख के बाद उम्मीद थी कि खिलाड़ी मैदान पर पूरी ताकत झोंक देंगे, लेकिन रविवार को भारत की जीत ने पाकिस्तान को पहले से भी ज़्यादा झटका दिया।

61 रनों की हार ने दोनों टीमों के बीच मौजूदा अंतर को फिर उजागर कर दिया। टी20 वर्ल्ड कप में भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ 9 में से 8 मुकाबले जीत लिए हैं। इससे पहले पिछले साल एशिया कप में भी सलमान अली आगा की टीम को भारत के खिलाफ लगातार तीन हार झेलनी पड़ी थी।

वनडे क्रिकेट में भी भारत का दबदबा कायम है — पाकिस्तान 2017 चैंपियंस ट्रॉफी फाइनल के बाद से भारत को एक भी वनडे में नहीं हरा पाया है।

पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के पूर्व चेयरमैन लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) तौकीर ज़िया का कहना है कि हर हार के साथ ये हाई-वोल्टेज मुकाबले आईसीसी के लिए भी कमाई के लिहाज़ से कम अहम होते जा रहे हैं।

उन्होंने कहा, “हकीकत ये है कि भारत-पाकिस्तान मैच अब बहुत एकतरफा हो चुके हैं। इस बार मुकाबले को लेकर जो हाइप बना, वो पीसीबी के पहले बहिष्कार और फिर उसे वापस लेने की वजह से था। लेकिन देर-सवेर ये मुकाबले आईसीसी और दूसरे बोर्ड्स के लिए अपनी कीमत खो देंगे।”

1980 और 1990 के दशक में भारत के खिलाफ कई यादगार जीत दिलाने वाले पाकिस्तान के दिग्गज खिलाड़ी — वसीम अकरम, वकार यूनिस, शोएब अख्तर, सकलैन मुश्ताक, रमीज़ रजा और आमिर सोहेल — अब कमेंट्री कर रहे हैं।

शोएब और सकलैन का कहना है कि हाल के भारत-पाक मैच देखना उनके लिए बेहद मुश्किल हो गया है।

शोएब अख्तर बोले, “वो जुनून और आग कहां है जो हमारे समय भारत के खिलाफ खेलते वक्त होती थी? हां, हम कुछ मैच हारे भी, लेकिन हर कोई जानता था कि मुकाबला हमेशा कांटे का होगा।”

सकलैन मुश्ताक ने पुराने दिनों को याद करते हुए कहा कि वसीम अकरम जैसे सीनियर खिलाड़ी भारत के खिलाफ खेलने से पहले टीम में जोश भर देते थे।

उन्होंने कहा, “मुझे याद है 1999 में चेन्नई टेस्ट कैसे जीता था। सचिन बल्लेबाज़ी कर रहे थे और जैसे-जैसे भारत जीत के करीब जा रहा था, वसीम भाई कहते जा रहे थे — बस सचिन का विकेट चाहिए और मैच हमारा है। आज इस टीम में वो जज़्बा कहां है?”

अब सवाल यही है — अगर ये मुकाबले यूं ही एकतरफा होते रहे, तो क्या क्रिकेट की सबसे बड़ी प्रतिद्वंद्विता अपनी चमक खो देगी?