
ईशान किशन ने अनुशासन, ध्यान और घरेलू क्रिकेट में कड़ी मेहनत के ज़रिए अपने खेल और सोच दोनों को दोबारा गढ़ा। केंद्रीय अनुबंध गंवाने और रैंकिंग में नीचे जाने के बाद उन्होंने खुद को संभाला और इसका नतीजा पाकिस्तान जैसे बड़े मुकाबले में मैच बदलने वाली पारी के रूप में सामने आया।
27 वर्षीय पटना के इस बल्लेबाज़ का करियर एक समय ऐसे मोड़ पर था जब भारतीय क्रिकेट जगत उन्हें लगभग नज़रअंदाज़ करने को तैयार था। टीम में विकल्पों की भरमार थी — संजू सैमसन, जितेश शर्मा, ध्रुव जुरेल और टी20 वर्ल्ड कप जीतकर लौटे ऋषभ पंत तक मौजूद थे।
ऐसे में ईशान की स्थिति क्या रह गई थी? टीम के क्रम में वह पांचवें नंबर तक खिसक चुके थे। उन्हें एक ऐसे आक्रामक बल्लेबाज़ के रूप में देखा जाने लगा था जो दबाव झेल नहीं पाता और लगातार सफर व अनिश्चित मौकों की थकान से जूझता रहता है।
ईशान मानसिक रूप से थक चुके थे और उन्हें ब्रेक की ज़रूरत थी। लेकिन उन्हें आराम के बजाय चयनकर्ताओं की अनदेखी मिली — घरेलू क्रिकेट को गंभीरता से न लेने के आरोप लगे और उनका केंद्रीय कॉन्ट्रैक्ट भी खत्म कर दिया गया।
यहीं से उनकी असली वापसी की कहानी शुरू होती है।
परिवार और करीबी दोस्तों के सहारे ईशान ने अपनी दिनचर्या बदली। फोकस बढ़ाने के लिए उन्होंने ध्यान करना शुरू किया और पिता की सलाह पर भगवद गीता पढ़नी शुरू की। ट्रेनिंग में वह दिन में दो बार अपनी अकादमी जाकर स्किल पर काम करने लगे। पोषण के लिए निजी शेफ रखा और नींद व आराम पर खास ध्यान दिया।
अकादमी में घंटों तक सेंटर विकेट सिमुलेशन ट्रेनिंग ने उनके शॉट चयन को और बेहतर बना दिया।
इस मेहनत का असर जल्द दिखा। घरेलू क्रिकेट में दमदार प्रदर्शन के दम पर जब उन्होंने टीम इंडिया में वापसी की, तो फॉर्म जीवन की सबसे बेहतरीन रही। टी20 वर्ल्ड कप से पहले न्यूजीलैंड के खिलाफ तिरुवनंतपुरम में खेले गए पांचवें टी20 में उन्होंने तूफानी 103 रन जड़कर सबको चेतावनी दे दी।
वर्ल्ड कप में उन्होंने यूएसए के खिलाफ 20 रन बनाए, नामीबिया के खिलाफ शानदार 61 जड़े और फिर पाकिस्तान के खिलाफ हाई-वोल्टेज मुकाबले में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन बचाकर रखा।
ओपनिंग पार्टनर अभिषेक शर्मा के शून्य पर आउट होने से वह बिल्कुल नहीं घबराए। ईशान ने पाकिस्तानी स्पिनरों पर जोरदार हमला बोला और सिर्फ 27 गेंदों में अर्धशतक पूरा कर लिया।
जब वह 8.4 ओवर में आउट हुए, तब भारत का स्कोर 88/2 था, जिसमें अकेले ईशान के 77 रन थे। उन्होंने अपनी विस्फोटक पारी में 10 चौके और 3 छक्के लगाए।
मैच के बाद ईशान ने कहा, “मैं बस चीज़ों को सरल रख रहा था — गेंद पर नज़र, फील्ड के हिसाब से खेलना और उन्हें ज़्यादा दौड़ाना। लगता है यह काफी अच्छा काम कर गया।”
कप्तान सूर्यकुमार यादव ने भी उनकी तारीफ करते हुए कहा, “ईशान ने अलग सोच के साथ खेला। 0/1 के बाद किसी को ज़िम्मेदारी लेनी थी और जिस तरह उसने ली, वो कमाल था।”
अगर भारत इतिहास रचते हुए लगातार दूसरी बार टी20 वर्ल्ड कप जीतना चाहता है और घरेलू धरती पर ट्रॉफी उठाने वाली पहली टीम बनना चाहता है, तो ईशान किशन की ऐसी ही शानदार पारियां बेहद अहम होंगी।








