
पूर्व ऑस्ट्रेलियाई कप्तान रिकी पोंटिंग ने पुरुष टी20 वर्ल्ड कप से टीम के जल्दी बाहर होने को “बेहद खराब अभियान” बताया और कहा कि मौजूदा ऑस्ट्रेलियाई टीम में वह रौब और दबदबा नहीं दिखा, जो पहले आईसीसी टूर्नामेंटों में उनकी टीमों की पहचान हुआ करता था।
आईसीसी रिव्यू के ताज़ा एपिसोड में बात करते हुए पोंटिंग ने कहा कि यह टीम मैदान पर वही डर पैदा नहीं कर पाई, जो पहले की ऑस्ट्रेलियाई टीमें बड़े मुकाबलों में करती थीं।
“कागज़ पर इस ऑस्ट्रेलियाई टीम को देखकर ऐसा नहीं लगता कि इसमें वह आभा या दबदबा है, जो पहले आईसीसी इवेंट्स और वर्ल्ड कप में ऑस्ट्रेलियाई टीमों के पास होता था। ऐसे टूर्नामेंट जीतने के लिए आपके सबसे अनुभवी और बेहतरीन खिलाड़ियों को बड़े मौकों पर आगे आना पड़ता है, लेकिन ऑस्ट्रेलिया के साथ ऐसा नहीं हुआ,” पोंटिंग के हवाले से पीटीआई ने कहा।
पोंटिंग ने श्रीलंका के खिलाफ उस मैच का जिक्र किया जिसमें ऑस्ट्रेलिया ने आखिरी ओवरों में 20 रन के भीतर छह विकेट गंवा दिए थे। उन्होंने टॉप ऑर्डर के फीके प्रदर्शन पर भी सवाल उठाए, खासतौर पर टिम डेविड (नंबर 4) और कैमरन ग्रीन (नंबर 3) की भूमिका पर। जिम्बाब्वे से 23 रन की चौंकाने वाली हार के बाद ऑस्ट्रेलिया सुपर एट में भी नहीं पहुंच सका, जिसे पोंटिंग ने उनके अभियान का निर्णायक झटका बताया।
“यह सच में बहुत खराब अभियान रहा है। जिम्बाब्वे से जिस तरह वे हारे, वही मैच उन्हें बार-बार याद आएगा और वे कहेंगे कि वहीं हमारा वर्ल्ड कप खत्म हो गया,” पोंटिंग ने कहा।
टूर्नामेंट से पहले ही ऑस्ट्रेलिया को चोटों की परेशानी झेलनी पड़ी थी। टिम डेविड जल्दी आउट हुए, जबकि जोश हेज़लवुड और पैट कमिंस चोट के कारण बाहर थे। हालांकि पोंटिंग का मानना है कि सबसे ज्यादा कसक उन्हें जिम्बाब्वे से मिली हार की रहेगी। उन्होंने श्रीलंका की घरेलू परिस्थितियों में मजबूत खेल की तारीफ भी की।
“मुझे लगा था कि श्रीलंका को उनके घर में हराना मुश्किल होगा और वैसा ही हुआ। उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ शानदार रन चेज़ किया। उस तरह का स्कोर कभी भी आसान नहीं होता,” उन्होंने कहा।
पोंटिंग ने यह भी साफ किया कि पूर्व खिलाड़ी मौजूदा टीम की आलोचना करने के बजाय बस उन्हें अच्छा करते देखना चाहते हैं।
“हम पुराने खिलाड़ी बैठकर मौजूदा खिलाड़ियों की बुराई नहीं करते। हम सिर्फ चाहते हैं कि टीम अच्छा खेले। दुर्भाग्य से पिछले कुछ हफ्तों में ऐसा नहीं हुआ और अब खिलाड़ियों को इसके साथ जीना होगा,” उन्होंने कहा।
साथ ही पोंटिंग ने उन बातों को भी खारिज किया जिनमें कहा जा रहा था कि ऑस्ट्रेलिया टी20 वर्ल्ड कप को गंभीरता से नहीं लेता। उनके मुताबिक, आईसीसी खिताब जीतना हमेशा प्राथमिकता रहा है।
“कोई भी ऑस्ट्रेलियाई टीम जिसमें मैं रहा हूं या जिसके आसपास रहा हूं, उसका मकसद वर्ल्ड कप और ट्रॉफी जीतना ही होता है। घरेलू सीरीज अहम होती हैं, बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी अहम होती है, लेकिन असली लक्ष्य बड़े टूर्नामेंट जीतना होता है,” पोंटिंग ने कहा।
उन्होंने आगे जोड़ा कि कई खिलाड़ी एशेज जैसी लंबी टेस्ट सीरीज के बाद थके हुए थे, कुछ ने बिग बैश लीग खेली और कुछ ने आराम को तरजीह दी, लेकिन आखिरकार चोटें और बड़े खिलाड़ियों का फॉर्म में न होना ही हार की बड़ी वजह बना।
“अब जो टीमें बची हैं, उन्हें अगर टूर्नामेंट जीतना है तो उनके सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों को आखिरी चरण में शानदार प्रदर्शन करना होगा,” पोंटिंग ने निष्कर्ष निकाला।








