
टी20 वर्ल्ड कप जीतने वाली टीम के कप्तान सूर्यकुमार यादव ने कहा कि वह टेस्ट क्रिकेट खेलना चाहते हैं, लेकिन वनडे फॉर्मेट उन्हें ज्यादा आकर्षक नहीं लगता। वहीं टी20 को लेकर उन्होंने कहा कि “उसमें उनका हाथ सेट हो गया है।”
PTI के साथ एक पॉडकास्ट इंटरव्यू में सूर्यकुमार ने अपनी बात मुंबईया अंदाज में भी रखी। “हाथ सेट हो गया है” का मतलब उन्होंने यह बताया कि वह अब टी20 फॉर्मेट में पूरी तरह सहज और माहिर हो चुके हैं।
इस बातचीत के दौरान उन्होंने टेस्ट क्रिकेट न खेल पाने की अपनी निराशा भी जाहिर की। वर्ल्ड कप जीत के बाद वह बेहद खुश जरूर थे, लेकिन टेस्ट क्रिकेट का सपना अब भी उनके दिल में है।
जब उनसे पूछा गया कि उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ एक टेस्ट खेला था, तो उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, “एक ही इनिंग!”
उन्होंने कहा, “ज़िंदगी में जो लिखा होता है, वही मिलता है। मैंने शुरुआत रेड-बॉल क्रिकेट से ही की थी। 2010-11 से लेकर 2020 तक करीब 10 साल रणजी ट्रॉफी खेली। मुंबई में अगर आप बड़े होते हैं तो रेड-बॉल क्रिकेट से ही शुरुआत होती है, सब कुछ उसी के आसपास होता है।”
“लेकिन धीरे-धीरे जब व्हाइट-बॉल क्रिकेट खेलने लगे तो झुकाव उसी तरफ बढ़ गया। उसके बाद मैं टी20 फॉर्मेट में आ गया। वनडे में भी मैंने बहुत कोशिश की, लेकिन वहां वैसा कुछ नहीं हो पाया।”
उन्होंने आगे कहा, “टी20 में जैसा चल रहा था, उसमें अपना हाथ सेट हो गया है, ऐसा बोल सकते हैं।”
जब उनसे पूछा गया कि अगर मौका मिले तो क्या वह टेस्ट खेलना चाहेंगे, तो उन्होंने बिना झिझक कहा, “बिल्कुल खेलना चाहूंगा। मैंने 10 साल रेड-बॉल क्रिकेट खेली है और मुझे यह फॉर्मेट बहुत पसंद है। मौका मिले तो कौन टेस्ट नहीं खेलना चाहेगा?”
हालांकि 35 साल की उम्र में उनका टेस्ट टीम में वापसी करना मुश्किल माना जा रहा है। उन्होंने 2023 में नागपुर में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ अपना इकलौता टेस्ट खेला था, जिसमें उन्होंने 8 रन बनाए थे।
सूर्यकुमार ने वनडे क्रिकेट को लेकर संतुलित राय दी। उन्होंने कहा कि यह एक चुनौतीपूर्ण फॉर्मेट है, क्योंकि इसमें बल्लेबाज़ को तीन अलग-अलग तरीकों से खेलना पड़ता है।
उन्होंने कहा, “अगर आप जल्दी बल्लेबाजी करने आते हैं और विकेट जल्दी गिर जाते हैं, तो टेस्ट की तरह खेलना पड़ता है। फिर आपको अच्छे स्ट्राइक रेट से वनडे की तरह खेलना होता है और अंत में टी20 की तरह तेज खेलना पड़ता है। यह एक ऐसा फॉर्मेट है जिसे मैं पूरी तरह समझ नहीं पाया।”
उन्होंने यह भी माना कि टी20 और टेस्ट की तुलना में वनडे की लोकप्रियता धीरे-धीरे कम हो रही है, लेकिन इसका अपना अलग आकर्षण अभी भी है।
उन्होंने 2023 वर्ल्ड कप को याद करते हुए कहा, “उस समय का माहौल और फाइनल तक का सफर बिल्कुल अलग था। टी20 वर्ल्ड कप से अलग एक खास फील थी। वनडे का अपना अलग चार्म है और टी20 का अलग।”
सूर्यकुमार की यह साफगोई दिखाती है कि भले ही वह टी20 में महारत हासिल कर चुके हों, लेकिन टेस्ट क्रिकेट खेलने का सपना अब भी उनके दिल में जिंदा है।








