सानिया मिर्ज़ा ने ट्रोल्स को संभालने पर कहा: ‘सोशल मीडिया आपका दिन तय नहीं कर सकता’!

बेंगलुरु टेक समिट 2025 के फ्यूचर मेकर्स कॉन्क्लेव में, छह बार की ग्रैंड स्लैम विजेता सानिया मिर्ज़ा ने भारतीय क्रिकेटर ऋचा घोष से बातचीत के दौरान कहा, “सोशल मीडिया आपका दिन बना भी नहीं सकता और बिगाड़ भी नहीं सकता।”

इस बातचीत का संचालन स्पोर्ट्स जर्नलिस्ट मयंती लैंगर ने किया।

सानिया ने ऋचा को सलाह देते हुए कहा, “इसे संभालने के दो–तीन तरीके हैं। ऋचा अभी बहुत युवा है, और मेरी सलाह यह है कि… मैं उस दौर से गुज़री हूँ जब इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और सोशल मीडिया उभर रहे थे।

जब मैं आगे बढ़ रही थी, तब हमारे लिए सिर्फ़ अख़बार थे, स्पोर्टस्टार ही खेलों की एक खिड़की था। फिर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया आया, टैब्लॉयड आए। सिर्फ़ फ़ोरहैंड और बैकहैंड की बात करना लोगों को उबाऊ लगने लगा, फिर उन्होंने खिलाड़ी की निजी ज़िंदगी की बातें लिखनी शुरू कर दीं… और फिर शुरू हुआ यह कहना कि ‘आप मैच हार गए क्योंकि आप रात को बाहर डिनर पर थे।’”

सानिया ने अपने पुराने अनुभव याद करते हुए कहा, “इन सब ने मुझे बहुत मज़बूत बना दिया। अब मुझे यह सब हास्यास्पद लगता है। सच में मज़ेदार लगता है कि जिन लोगों ने कभी हाथ में क्रिकेट बैट, टेनिस रैकेट या बॉक्सिंग ग्लव तक नहीं उठाया, वे आपके पेशे पर इतने बड़े–बड़े बयान दे देते हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “कभी–कभी मुझे उन लोगों के लिए दुख होता है। लगता है कि वे अपनी ज़िंदगी से इतने नाखुश होंगे कि उन्होंने किसी ऐसे इंसान से नफ़रत पाल रखी है, जिससे कभी मिले भी नहीं, जो देश का नाम रोशन करने की कोशिश कर रहा है।”

सानिया ने जोर देकर कहा, “आप तारीफ़ को दिल पर नहीं लेते और न आलोचना को। सोशल मीडिया या मीडिया आपका दिन निर्धारित नहीं कर सकते। इतनी अहमियत नहीं है उनकी। आपका दिन वही लोग तय करते हैं, जिन्हें आप चाहते हैं और जो आपको चाहते हैं — आपस की बातचीत, आपस का रिश्ता।”

जब सोशल मीडिया आलोचनाओं पर प्रतिक्रिया देने के बारे में ऋचा घोष से पूछा गया, तो उन्होंने एक अलग नज़रिया रखा।

घोष ने कहा कि आलोचना महिला क्रिकेट की तरक्की का संकेत है।

उन्होंने कहा, “मैं इसे बहुत सकारात्मक रूप से लेती हूँ, क्योंकि पहले महिला क्रिकेट में न फ़ॉलोअर्स थे, न इतने फैंस। अब जब संख्या बढ़ रही है, तो आलोचना भी बढ़ेगी। मैं इसे सकारात्मक रूप से ही लेती हूँ।”

ऋचा ने कहा कि जितनी आलोचना बढ़ती है, उतने ज़्यादा लोग खेल में रुचि लेते हैं।

“मैं इसे अच्छा संकेत मानती हूँ, क्योंकि इसका मतलब है कि लोग देख रहे हैं, पसंद कर रहे हैं, महिला क्रिकेट की अहमियत समझ रहे हैं। जितना बड़ा क्रिकेट होगा, उतने ज़्यादा लोग देखने आएंगे।”