साई सुदर्शन और ध्रुव जुरेल ने स्पिन का मुकाबला करने के लिए अपनाई अनोखी ‘वन-पैड ड्रिल’!

भारत के साई सुदर्शन और ध्रुव जुरेल ने सोमवार को नेट्स में सिर्फ़ एक पैड पहनकर स्पिन गेंदबाज़ों का सामना किया। यह एक ऐसा अभ्यास तरीका है जो थोड़ा जोखिम भरा होते हुए भी बल्लेबाज़ों की तकनीक सुधारने में बेहद असरदार माना जाता है। एडन गार्डन्स में लगभग तीन घंटे चले इस ऑप्शनल सेशन में दोनों बल्लेबाज़ों ने इस अनोखी ड्रिल पर काम किया।

साई सुदर्शन ने दायां पैड हटा दिया ताकि वह बिना सुरक्षा के अपने फ्रंट फुट को आगे बढ़ाने के लिए मजबूर हों। इस तरीके का उद्देश्य यह है कि बल्लेबाज़ फ्रंट पैड आगे करके एलबीडब्ल्यू की स्थिति में न आएं, बल्कि गेंद को बल्ले से खेलें। पैड हटने पर बल्लेबाज़ के पास सिर्फ़ बल्ले पर भरोसा करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता। यही वजह है कि इस तरह की पुरानी ड्रिल आज भी स्पिन खेलने की कला को निखारने के लिए इस्तेमाल की जाती है।

सुदर्शन एडन टेस्ट में नहीं खेले थे और गुवाहाटी टेस्ट में खेलेंगे या नहीं इसकी कोई गारंटी नहीं है। इसलिए नेट्स में बिना पैड स्पिन खेलते हुए उन्हें बेहद सतर्क रहना पड़ा, क्योंकि ज़रा सी गलती भी चोट का कारण बन सकती थी। कोच गौतम गंभीर उन पर लगातार नज़र रख रहे थे। अभ्यास के दौरान सुदर्शन को पेसर्स के सामने भी दिक्कतें आईं — आकाश दीप ने कई बार उनकी बाहरी धार बीट की।

ध्रुव जुरेल ने भी रिवर्स स्वीप की प्रैक्टिस बिना दायां पैड पहने की। रिवर्स स्वीप में दाहिना पैर काफी आगे जाता है, इसलिए यह ड्रिल उसकी मूवमेंट को बेहतर बनाने के लिए की जाती है।

ऑप्शनल सेशन में सिर्फ़ छह खिलाड़ी शामिल हुए, जिनमें सबसे लंबा सेशन रविंद्र जडेजा ने किया। वहीं शुभमन गिल की गर्दन की जकड़न के कारण उनके खेलने की संभावना बहुत कम मानी जा रही है। इस कारण नितीश रेड्डी को इंडिया A सीरीज़ से हटाकर कोलकाता बुलाया गया है ताकि ज़रूरत पड़ने पर उन्हें गुवाहाटी टेस्ट में शामिल किया जा सके।

यदि गिल गुवाहाटी नहीं जाते, तो उन्हें कोलकाता से बेंगलुरु के BCCI COE भेजा जाएगा। रेड्डी के लिए भी राजकोट से गुवाहाटी पहुँचने का समय बेहद कम था, इसलिए टीम मैनेजमेंट ने उन्हें सीरीज़ से निकालकर सीधे टीम के साथ जोड़ा है।

संभावना है कि गुवाहाटी टेस्ट की प्लेइंग इलेवन में रेड्डी मुख्य दावेदार बनें।

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Manish Kumar
मनीष कुमार एक अनुभवी खेल पत्रकार हैं, जिन्हें खेल पत्रकारिता में 25 से ज़्यादा सालों का अनुभव है। वह खास तौर पर क्रिकेट के विशेषज्ञ माने जाते हैं, खासकर टेस्ट क्रिकेट जैसे लंबे और चुनौतीपूर्ण फॉर्मेट में। उन्होंने टाइम्स ऑफ इंडिया ऑनलाइन के साथ करीब 16.5 साल तक काम किया, जहां उन्होंने बड़े क्रिकेट आयोजनों की कवरेज की और गहराई से विश्लेषण वाले लेख और उनकी भरोसेमंद राय पेश की। टेस्ट क्रिकेट के प्रति उनका जुनून उनकी लेखनी में साफ दिखाई देता है, जहां वह खेल की बारीकियों, रणनीतिक मुकाबलों और खिलाड़ियों के व्यक्तिगत प्रदर्शन को सरल और स्पष्ट तरीके से समझाते हैं। मनीष अपनी तेज़ नज़र और डिटेल्स पर ध्यान देने के लिए जाने जाते हैं। आज भी वह क्रिकेट के रोमांच, जटिलताओं और कहानी को दुनिया भर के प्रशंसकों तक जीवंत अंदाज़ में पहुंचाते हैं।