
पूर्व भारतीय कप्तान रोहित शर्मा ने बुधवार को कहा कि अपने करियर में पहली बार T20 वर्ल्ड कप को मैदान के बाहर से देखना “अजीब” अनुभव होगा। उन्होंने अपनी कप्तानी के दौर में लिए गए कठिन चयन फैसलों और नेतृत्व से जुड़े अनुभवों को याद किया।
भारतीय क्रिकेट के दो स्तंभ रोहित शर्मा और विराट कोहली अब टेस्ट और टी20 क्रिकेट से संन्यास ले चुके हैं और फिलहाल सिर्फ वनडे प्रारूप खेलते हैं। भारत अपने T20 वर्ल्ड कप खिताब की रक्षा की शुरुआत 7 फरवरी को मुंबई में अमेरिका के खिलाफ करेगा।
38 वर्षीय रोहित ने कहा कि किसी बड़े टूर्नामेंट से बाहर रहना द्विपक्षीय सीरीज़ मिस करने से कहीं ज़्यादा तकलीफदेह होता है।
“हम घर पर इस बारे में बात कर रहे थे कि इसे घर से देखना कितना अजीब होगा, खासकर T20 वर्ल्ड कप। जब से यह टूर्नामेंट शुरू हुआ है, तब से अब तक मैं हर वर्ल्ड कप का हिस्सा रहा हूं, इसलिए यह अलग महसूस होगा,” रोहित ने जियोहॉटस्टार के एक शो में कहा।
“जब आप वर्ल्ड कप मिस करते हैं, तभी असलियत पूरी तरह समझ में आती है कि आप इसका हिस्सा नहीं हैं। हालांकि मैं स्टेडियम में कहीं न कहीं मौजूद रहूंगा। यह पहले जैसा नहीं होगा, लेकिन एक अलग अनुभव जरूर होगा,” उन्होंने जोड़ा।
कप्तानी के अनुभव को याद करते हुए रोहित ने कहा कि कठिन चयन फैसले लेना और साथ ही ड्रेसिंग रूम में भरोसा और सम्मान बनाए रखना नेतृत्व की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक था।
“वर्ल्ड कप से पहले ऐसे कई मौके आए हैं जब मुश्किल फैसले लेने पड़े। आप सबको खुश नहीं कर सकते, लेकिन खिलाड़ी को यह समझाना ज़रूरी होता है कि कोई फैसला क्यों लिया गया,” रोहित ने कहा।
उन्होंने उदाहरण के तौर पर बताया कि कैसे श्रेयस अय्यर को एशिया कप और 2022 T20 वर्ल्ड कप से बाहर रखा गया था।
“हमें लगा कि हमें ऐसा खिलाड़ी चाहिए जो गेंद से भी कुछ अतिरिक्त दे सके, इसलिए हमने दीपक हुड्डा को चुना, जो उस समय अच्छी फॉर्म में थे। श्रेयस को बुरा लगा होगा, दीपक खुश हुए होंगे – यही इस खेल का सच है,” उन्होंने कहा और बताया कि यह फैसला उन्होंने और कोच राहुल द्रविड़ ने खुद श्रेयस को समझाया था।
रोहित ने बताया कि ऐसे ही संवाद युजवेंद्र चहल (2023 वनडे वर्ल्ड कप) और मोहम्मद सिराज (2025 चैंपियंस ट्रॉफी) के मामलों में भी किए गए थे।
“हमारे लिए यह समझना ज़रूरी होता है कि 15 खिलाड़ियों के स्क्वाड का सबसे बेहतर इस्तेमाल कैसे किया जाए। अगर आपके पास ठोस कारण हों और आप उसे सही तरीके से समझा दें, तो वही सबसे अहम है,” उन्होंने कहा।
टीम के साथ रिश्तों पर बात करते हुए रोहित ने कहा कि खुलापन और पारदर्शिता उनके नेतृत्व की पहचान रही।
“मैं चाहता था कि हर कोई खुलकर किसी भी बात पर चर्चा कर सके – सिर्फ क्रिकेट ही नहीं, ज़िंदगी पर भी। कोई दीवार नहीं, हमेशा दरवाज़ा खुला रहता था,” उन्होंने कहा, और बताया कि मज़ाक और आपसी सम्मान से ड्रेसिंग रूम का माहौल हल्का-फुल्का बना रहता था।
आने वाले T20 वर्ल्ड कप को लेकर रोहित ने मौजूदा भारतीय टीम पर भरोसा जताया।
“पिछले T20 वर्ल्ड कप के बाद से लगभग 80 से 90 प्रतिशत टीम वही है। ये खिलाड़ी करीब दो साल से साथ खेल रहे हैं, जिससे आपसी समझ काफी मजबूत हो गई है,” उन्होंने कहा और बताया कि टीम की औसत उम्र करीब 25 साल है।
“जब आप वर्ल्ड कप खेलने जाते हैं, तो एक ही लक्ष्य होता है – उसे जीतना। इसके लिए खुली बातचीत और कभी-कभी कठिन बातचीत भी ज़रूरी होती है,” रोहित ने अंत में कहा।








