पैर में फ्रैक्चर के बाद प्लास्टर में नजर आए ऋषभ पंत, जताई नाराज़गी!

भारतीय विकेटकीपर-बल्लेबाज़ ऋषभ पंत ने बुधवार को इंस्टाग्राम स्टोरी पर अपने प्लास्टर लगे पैर की तस्वीर साझा कर चोट को लेकर अपनी झुंझलाहट जाहिर की। यह चोट ओल्ड ट्रैफर्ड में भारत और इंग्लैंड के बीच खेले गए यादगार टेस्ट के पहले दिन लगी थी, जब उनके बाएँ पैर पर गेंद लगी।

पांच मैचों की यह सीरीज़ सदी की सबसे बेहतरीन सीरीज़ में से एक मानी जा रही है, जिसमें उप-कप्तान पंत ने अहम भूमिका निभाई और वे टेस्ट फॉर्मेट में टीम के सबसे भरोसेमंद रन-स्कोरर साबित हुए। सीरीज़ की शुरुआत भी उन्होंने शानदार अंदाज में की, पहले टेस्ट की दोनों पारियों में शतक जड़कर।

अपनी स्टोरी में पंत ने प्लास्टर लगे पैर की तस्वीर पर लिखा – “I hate this sooo much” (मुझे ये बिल्कुल पसंद नहीं है)। चोट पहले दिन लगी थी और उन्हें गोल्फ कार्ट पर बैठाकर मैदान से बाहर ले जाया गया। बीसीसीआई की मेडिकल टीम ने उसी रात की मीटिंग में बताया कि पंत को ठीक होने में करीब छह हफ्ते लगेंगे। हालांकि उनसे पूछा गया कि क्या वे दर्द निवारक दवाओं के सहारे इस टेस्ट में बल्लेबाज़ी कर सकते हैं, तो जवाब मिला – “जरूरत पड़ी, तो हाँ।”

आखिरकार पंत स्टेडियम लौटे और जब शार्दुल ठाकुर आउट हुए, तो पूरा बैटिंग गियर पहनकर लंगड़ाते हुए सीढ़ियों से नीचे आए और अपनी पारी पूरी की। उन्होंने 37 रन पर रिटायर होने के बाद वापस आकर 75 गेंदों में 54 रन बनाए। इस जज़्बे के लिए उनकी जमकर सराहना हुई।

मैच के बाद, जिसमें भारत ने अद्भुत अंदाज़ में ड्रॉ हासिल किया, मुख्य कोच गौतम गंभीर ने कहा कि पंत की यह पारी टीम के “चरित्र और नींव” का उदाहरण है।

गंभीर ने कहा – “टूटे हुए पैर के साथ बल्लेबाज़ी करना आसान नहीं है, और उन्होंने खुद आगे आकर यह किया। ऐसी मिसालें बहुत कम देखने को मिलती हैं। मैं इसके बारे में घंटों बात कर सकता हूँ। आने वाली पीढ़ियाँ इस बारे में जरूर बात करेंगी कि कोई टूटी हुई हड्डी के साथ भी बल्लेबाज़ी कर सकता है।”

गंभीर ने आगे कहा – “दुर्भाग्यपूर्ण है कि वे जिस फॉर्म में थे, उसमें चोटिल हो गए, लेकिन वे टेस्ट टीम के बेहद अहम खिलाड़ी हैं। उम्मीद है कि वे जल्द ठीक होकर वापस आएँ और हमारे लिए फिर से दमदार प्रदर्शन करें।”

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Manish Kumar
मनीष कुमार एक अनुभवी खेल पत्रकार हैं, जिन्हें खेल पत्रकारिता में 25 से ज़्यादा सालों का अनुभव है। वह खास तौर पर क्रिकेट के विशेषज्ञ माने जाते हैं, खासकर टेस्ट क्रिकेट जैसे लंबे और चुनौतीपूर्ण फॉर्मेट में। उन्होंने टाइम्स ऑफ इंडिया ऑनलाइन के साथ करीब 16.5 साल तक काम किया, जहां उन्होंने बड़े क्रिकेट आयोजनों की कवरेज की और गहराई से विश्लेषण वाले लेख और उनकी भरोसेमंद राय पेश की। टेस्ट क्रिकेट के प्रति उनका जुनून उनकी लेखनी में साफ दिखाई देता है, जहां वह खेल की बारीकियों, रणनीतिक मुकाबलों और खिलाड़ियों के व्यक्तिगत प्रदर्शन को सरल और स्पष्ट तरीके से समझाते हैं। मनीष अपनी तेज़ नज़र और डिटेल्स पर ध्यान देने के लिए जाने जाते हैं। आज भी वह क्रिकेट के रोमांच, जटिलताओं और कहानी को दुनिया भर के प्रशंसकों तक जीवंत अंदाज़ में पहुंचाते हैं।