माइकल एथरटन ICC द्वारा लगभग हर साल वर्ल्ड कप कराने को लेकर ‘दुविधा’ में!

इंग्लैंड के पूर्व कप्तान माइकल एथरटन ने ICC टूर्नामेंटों को लेकर अपनी मिश्रित राय व्यक्त की है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या हर साल वर्ल्ड कप जैसे बड़े टूर्नामेंट आयोजित करना सही है।

हाल के वर्षों में ICC टूर्नामेंट लगातार आयोजित हुए हैं। 2024 में टी20 वर्ल्ड कप हुआ, 2025 में आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी खेली गई, और 2026 में फिर से टी20 वर्ल्ड कप आयोजित हुआ, जबकि 2027 में वनडे वर्ल्ड कप होने वाला है।

हालांकि एथरटन का मानना है कि ये टूर्नामेंट एसोसिएट देशों के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं क्योंकि इससे उन्हें मजबूत टीमों के खिलाफ खेलने का मौका मिलता है और अपने प्रतिभा दिखाने का मंच भी मिलता है।

स्काई स्पोर्ट्स पर भारत की न्यूज़ीलैंड के खिलाफ टी20 वर्ल्ड कप 2026 फाइनल जीत के बाद एथरटन ने कहा, “यही कारण है कि मैं वर्ल्ड कप की संख्या को लेकर थोड़ा दुविधा में हूँ। एक तरफ लगता है कि अगर हर साल वर्ल्ड कप होगा तो उसकी अहमियत धीरे-धीरे कम हो सकती है। अगर लगभग हर साल वर्ल्ड कप हो रहा है, तो चार साल में तीन बड़े टूर्नामेंट हो जाते हैं—दो साल में एक टी20 वर्ल्ड कप और चार साल में एक 50 ओवर वर्ल्ड कप। यानी चार साल में तीन साल वर्ल्ड कप होते हैं।”

उन्होंने आगे कहा कि दूसरी तरफ एसोसिएट देशों के समर्थकों का मानना है कि हर दो साल में टी20 वर्ल्ड कप होना चाहिए, क्योंकि यही वह मौका होता है जब छोटी टीमें बड़े मंच पर अपनी क्षमता दिखा सकती हैं।

2024 और 2026 के टी20 वर्ल्ड कप में 20 टीमें शामिल थीं, जिसमें इटली, नामीबिया और नेपाल जैसे एसोसिएट देशों को भी मजबूत टीमों के खिलाफ खेलने का मौका मिला।

एथरटन ने कहा, “इसलिए मैं इस मुद्दे पर थोड़ा दुविधा में हूँ, लेकिन वैश्विक स्तर पर क्रिकेट का फैलना अच्छी बात है। टी20 फॉर्मेट इसमें बड़ी भूमिका निभा रहा है। ICC का लंबे समय से लक्ष्य रहा है कि टी20 के जरिए क्रिकेट को वैश्विक बनाया जाए।”

उन्होंने यह भी कहा कि टी20 ऐसा फॉर्मेट है जो बड़ी और छोटी टीमों के बीच के अंतर को कम करता है और मुकाबलों को ज्यादा प्रतिस्पर्धी बनाता है।

एथरटन ने उदाहरण देते हुए कहा, “कभी-कभी शेड्यूल के कारण मुश्किल होती है, लेकिन सोचिए कि इंग्लैंड ने अपने पड़ोसी देश स्कॉटलैंड के खिलाफ इतिहास में सिर्फ छह बार ही मैच खेले हैं। ऐसे में जब टीमें इंग्लैंड का दौरा करें तो स्कॉटलैंड जैसी टीमों को खेलने के और मौके मिलने चाहिए।”