‘यह किसी परीकथा जैसा था’ — सौरव गांगुली ने 2001 कोलकाता टेस्ट की ऐतिहासिक जीत को याद किया!

टेस्ट क्रिकेट के इतिहास की सबसे महान जीतों में से एक 25 साल पहले ईडन गार्डन्स में सौरव गांगुली की कप्तानी में भारत ने हासिल की थी।

पूर्व क्रिकेटर हरभजन सिंह, वेंकटेश प्रसाद, जहीर खान और पूर्व कप्तान सौरव गांगुली ने कोलकाता में इकट्ठा होकर 2001 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खेले गए उस ऐतिहासिक टेस्ट मैच को याद किया। उन्होंने राहुल द्रविड़ और वीवीएस लक्ष्मण की 376 रन की साझेदारी को याद किया, जिसने न सिर्फ मैच बल्कि पूरी सीरीज को बचा लिया था और भारतीय क्रिकेट की जुझारू और हार न मानने वाली भावना को दर्शाया था।

यह सभी दिग्गज RevSportz Trailblazers 4.0 में शामिल हुए, जहां गांगुली वर्चुअली जुड़े और बाकी खिलाड़ियों ने उस ऐतिहासिक वापसी के अपने अनुभव साझा किए।

मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में पहला टेस्ट 10 विकेट से हारने के बाद भारत को सीरीज बचाने के लिए कोलकाता टेस्ट जीतना जरूरी था। भारत को फॉलो-ऑन खेलने के लिए मजबूर किया गया क्योंकि वह 274 रन से पीछे था।

लेकिन लक्ष्मण की शानदार 281 रन की पारी और द्रविड़ के शांत 180 रन की मदद से भारत ने 232/4 से 608 रन तक पहुंचकर मैच पलट दिया। भारत ने 657/7 पर पारी घोषित की और 383 रन की बढ़त हासिल की। इसके बाद हरभजन सिंह (6/73) की शानदार गेंदबाजी से ऑस्ट्रेलिया 212 रन पर ऑलआउट हो गया।

इस जीत के बाद सीरीज चेन्नई पहुंची, जहां भारत ने तीसरा टेस्ट भी जीत लिया। हरभजन सिंह ने तीन मैचों में 32 विकेट लेकर “प्लेयर ऑफ द सीरीज” का खिताब जीता।

इस ऐतिहासिक जीत को याद करते हुए गांगुली ने कहा, “यह किस्मत थी, यह एक परीकथा जैसा था। इसका कोई फॉर्मूला नहीं था। मैंने कुछ खास नहीं किया, यह बस हो गया।”

हरभजन सिंह, जिन्होंने पूरी सीरीज में शानदार गेंदबाजी की, ने ईडन गार्डन्स के साथ अपने खास रिश्ते के बारे में कहा, “मैं इस दुनिया में अपने माता-पिता की वजह से आया, लेकिन अगर ईडन गार्डन्स नहीं होता तो मैं क्या होता, यह नहीं जानता।”

उन्होंने यह भी बताया कि उन्हें इस टेस्ट में खेलने का मौका कैसे मिला।

“अनिल कुंबले भाई चोटिल हो गए थे। जॉन राइट ऐसे खिलाड़ी चाहते थे जो विकेट ले सके। नेट्स में सभी को गेंदबाजी कराई गई और उन्हें लगा कि मैं सबसे बेहतर हूं। गांगुली ने भी मेरा समर्थन किया।”

मैच के आखिरी दिन को याद करते हुए हरभजन ने कहा, “पांचवें दिन हमारे पास अच्छा स्कोर था। ऑस्ट्रेलिया जैसी टीम के खिलाफ यह तय करना मुश्किल था कि कब पारी घोषित करें। आखिर में 74-76 ओवर काफी थे। द्रविड़, शिव सुंदर दास और एस रमेश के शानदार कैचों ने हमें जीत दिलाई। इस टेस्ट ने हमें विश्वास दिया।”

वेंकटेश प्रसाद ने भी एक पल को याद किया, “मैंने एक कैच छोड़ दिया था। भीड़ के दबाव में गलती हो गई। टी ब्रेक में मेरे लिए बहुत मुश्किल समय था। टीवी पर बार-बार वही दिखाया जा रहा था और कमेंटेटर भी उसी पर बात कर रहे थे। कोच जॉन राइट ने कहा, ‘तुम्हें ऐसे कैच पकड़ने होंगे।’”

जहीर खान ने कहा, “चौथे दिन की शुरुआत में हमने बात की कि पूरे दिन एक भी विकेट नहीं गिरना चाहिए। लक्ष्मण और द्रविड़ ने जिस तरह बल्लेबाजी की, उसने मैच का रुख बदल दिया। हम ऐसी स्थिति में पहुंच गए जहां से हम हार नहीं सकते थे।”

हरभजन ने गांगुली को “सबसे बेहतरीन कप्तान” बताया, जिनके साथ उन्होंने खेला।

उन्होंने एक किस्सा सुनाते हुए कहा, “एक बार मुझे बाहर कर दिया गया था। अगले दिन गांगुली ने मुझे बुलाया, लेकिन मैं गुस्से में नहीं गया। उन्होंने फिर बुलाया और यहां तक कहा कि ‘मैं तुम्हारे लिए कॉफी बना रहा हूं।’ वह बहुत अच्छे इंसान हैं।”

जहीर खान ने भी कहा, “गांगुली बहुत ही सहज और अप्रोचेबल कप्तान थे।”

सौरव गांगुली ने 2000 से 2005 तक भारत की कप्तानी की और 49 टेस्ट मैचों में से 21 में जीत हासिल की, 13 में हार मिली और 15 मैच ड्रॉ रहे।