“क्या जीत इतनी ज़रूरी है?” सुनील गावस्कर ने अबरार अहमद डील पर सनराइजर्स लीड्स पर उठाए सवाल!

द हंड्रेड के हालिया ऑक्शन में सनराइजर्स लीड्स द्वारा पाकिस्तान के स्पिनर अबरार अहमद को £190,000 (लगभग 2.3 करोड़ रुपये) में खरीदने के बाद बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। सोशल मीडिया पर भारी विरोध देखने को मिला, जिसके चलते फ्रेंचाइज़ी का X (ट्विटर) अकाउंट तक सस्पेंड हो गया।

सनराइजर्स लीड्स के मालिक वही हैं, जो IPL की सनराइजर्स हैदराबाद और SA20 की सनराइजर्स ईस्टर्न केप टीमों के भी मालिक हैं।

गौरतलब है कि पाकिस्तान के खिलाड़ी IPL में प्रतिबंधित हैं और केवल 2008 के पहले सीजन में खेले थे। 2008 के मुंबई आतंकवादी हमलों के बाद से किसी भी पाकिस्तानी खिलाड़ी को IPL में नहीं चुना गया।

ऑक्शन से पहले खबरें आई थीं कि IPL फ्रेंचाइज़ी पाकिस्तान खिलाड़ियों को चुनने से बचेंगी, जिसे लेकर इंग्लैंड के पूर्व खिलाड़ियों ने ECB से हस्तक्षेप की मांग की थी। बाद में ECB और सभी फ्रेंचाइज़ियों ने साफ किया कि ऑक्शन में राष्ट्रीयता के आधार पर कोई भेदभाव नहीं होगा।

हालांकि, इस पूरे विवाद पर भारतीय दिग्गज बल्लेबाज़ सुनील गावस्कर ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि इस तरह का कदम “अप्रत्यक्ष रूप से भारतीय सैनिकों और नागरिकों की मौत में योगदान देता है।”

उन्होंने अपने कॉलम में लिखा: “नवंबर 2008 के मुंबई हमलों के बाद से भारतीय फ्रेंचाइज़ी मालिकों ने IPL में पाकिस्तानी खिलाड़ियों को नजरअंदाज किया है। अब यह समझ आ रही है कि जो फीस पाकिस्तानी खिलाड़ियों को दी जाती है, उस पर दिया गया टैक्स उनके देश की सरकार को जाता है, जो हथियार खरीदने में इस्तेमाल हो सकता है, और इससे अप्रत्यक्ष रूप से भारतीय सैनिकों और नागरिकों की मौत होती है।”

सनराइजर्स लीड्स के हेड कोच डैनियल विट्टोरी ने पहले कहा था कि इंग्लैंड के स्पिनर आदिल राशिद को नहीं खरीद पाने के बाद टीम को स्पिन विभाग मजबूत करने के लिए अबरार अहमद सबसे अच्छा विकल्प लगे।

गावस्कर ने इस पर भी सवाल उठाते हुए कहा: “चाहे भुगतान भारत से हो या विदेश से, अगर मालिक भारतीय है तो वह भारतीय नुकसान में योगदान दे रहा है। यह बात विट्टोरी जैसे विदेशी कोच शायद न समझें, लेकिन मालिक को यह समझना चाहिए था और इस खरीद को रोकना चाहिए था। क्या एक ऐसे टूर्नामेंट को जीतना, जिसे कोई और देश नहीं खेलता, भारतीय जिंदगियों से ज्यादा महत्वपूर्ण है?”

उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि इस फैसले के खिलाफ मैचों के दौरान विरोध प्रदर्शन हो सकते हैं।
“यह हैरानी की बात नहीं होगी अगर हर मैच में भारतीय फैंस विरोध करें या स्टेडियम में न आएं।”

अंत में उन्होंने कहा कि अभी भी समय है इस फैसले को बदलने का और उम्मीद जताई कि “समझदारी भरा फैसला लिया जाएगा।”

इस मामले पर BCCI के उपाध्यक्ष राजीव शुक्ला ने कहा कि बोर्ड इसमें दखल नहीं दे सकता क्योंकि यह एक विदेशी लीग का मामला है और अंतिम फैसला फ्रेंचाइज़ी को ही लेना होगा।