2025 में भारतीय वेटलिफ्टिंग: मीराबाई चानू के दम पर आगे, डोपिंग से जूझता खेल!

डोपिंग के संदेह और सीनियर स्तर पर ठहराव से भरे साल 2025 में भारतीय वेटलिफ्टिंग एक बार फिर मीराबाई चानू की शानदार उपलब्धियों के इर्द-गिर्द घूमती रही। विश्व चैंपियनशिप में जीता गया उनका रजत पदक इस साल खेल की सबसे बड़ी उपलब्धि रहा।

टोक्यो ओलंपिक की रजत पदक विजेता मीराबाई चानू ने चोट के कारण एक साल से अधिक समय तक बाहर रहने के बाद घरेलू धरती पर हुए कॉमनवेल्थ चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर वापसी की।

हालाँकि वह अब भी 90 किलोग्राम स्नैच का आंकड़ा पार नहीं कर पाईं, लेकिन 48 किग्रा वर्ग में विश्व चैंपियनशिप का रजत पदक जीतकर उन्होंने खुद को खेल की सबसे बड़ी ध्वजवाहक साबित किया।

2024 पेरिस ओलंपिक के बाद लंबे समय तक बाहर रहने के बाद चानू ने अगस्त में अहमदाबाद में हुई कॉमनवेल्थ चैंपियनशिप में स्वर्ण जीतकर शानदार वापसी की, भले ही प्रतियोगिता अपेक्षाकृत कमजोर रही। इसके बाद उन्होंने विश्व चैंपियनशिप में अपना तीसरा पदक जोड़ते हुए लय बनाए रखी। नॉर्वे के फोर्डे में उन्होंने कुल 199 किग्रा वजन उठाया—जिसमें 84 किग्रा स्नैच और 115 किग्रा क्लीन एंड जर्क शामिल था—और रजत पदक हासिल किया।

हालाँकि मणिपुर की इस दिग्गज लिफ्टर ने न तो अपना व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन सुधारा और न ही 90 किग्रा स्नैच का लक्ष्य हासिल कर पाईं।

मुख्य कोच विजय शर्मा ने पीटीआई से कहा, “मीराबाई के संदर्भ में यह साल अच्छा रहा। वह लंबे समय बाद प्रतियोगिता में लौटीं और विश्व चैंपियनशिप में रजत पदक जीता, जो पेरिस ओलंपिक की नाकामी के बाद सकारात्मक रहा।”

इस बीच अंतरराष्ट्रीय वेटलिफ्टिंग महासंघ (IWF) ने एक साल में दूसरी बार ओलंपिक भार वर्गों में बदलाव किया, जिससे चानू के सामने नई चुनौती खड़ी हो गई। हालिया बदलाव में उनका मौजूदा 48 किग्रा वर्ग ओलंपिक कार्यक्रम से हटा दिया गया है।

अब चानू को लॉस एंजिलिस ओलंपिक के लिए महिलाओं के सबसे हल्के वर्ग 53 किग्रा में उतरना होगा। फिलहाल वह 48 किग्रा वर्ग में ही प्रतिस्पर्धा जारी रखेंगी, खासकर आगामी एशियाई खेलों को ध्यान में रखते हुए, जहाँ वह अब तक पदक नहीं जीत पाई हैं।

चानू के अलावा किसी भी सीनियर वेटलिफ्टर का प्रदर्शन खास प्रभावशाली नहीं रहा। कमजोर प्रतिस्पर्धा के बावजूद कॉमनवेल्थ चैंपियनशिप में जीते गए पदक भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत नहीं माने गए।

महिला 64 किग्रा वर्ग में निरुपमा देवी एशियाई चैंपियनशिप में चौथे स्थान पर रहीं, जबकि पुरुषों के 96 किग्रा वर्ग में दिलबाग सिंह नौवें स्थान पर रहे। ये नतीजे दिखाते हैं कि भारत की पकड़ फिलहाल कॉमनवेल्थ स्तर तक ही सीमित है।

भारतीय वेटलिफ्टिंग पर डोपिंग का साया भी बना रहा। 2024 के आंकड़ों के आधार पर वर्ल्ड एंटी-डोपिंग एजेंसी (WADA) ने भारत को लगातार तीसरे साल सबसे बड़ा डोपिंग अपराधी बताया, जिसमें वेटलिफ्टिंग दूसरे स्थान पर रही।

इसी महीने खेले गए खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स में कई वेटलिफ्टरों के नाम देने के बाद गायब हो जाने की खबरें सामने आईं। एंटी-डोपिंग अधिकारियों के पहुंचते ही टूर्नामेंट में ‘डीएनएस’ (Did Not Start) मामलों में इजाफा देखा गया।

हालाँकि निराशा के बीच जूनियर और युवा वेटलिफ्टरों का उभरना उम्मीद की किरण बना। अगले साल होने वाले एशियाई खेलों और कॉमनवेल्थ गेम्स से पहले यह सकारात्मक संकेत रहा।

प्रीतिस्मिता भोई ने यूथ एशियन गेम्स में लड़कियों के 44 किग्रा वर्ग में स्वर्ण जीतते हुए क्लीन एंड जर्क में युवा विश्व रिकॉर्ड तोड़ा। वहीं, अगस्त में घरेलू धरती पर हुई कॉमनवेल्थ चैंपियनशिप में कोयल बार ने दो युवा विश्व रिकॉर्ड अपने नाम किए।