37 साल की उम्र में विराट कोहली का नया रूप, जिसने उनकी वनडे बादशाहत को और मज़बूत किया!

न्यूज़ीलैंड के खिलाफ रविवार को खेले गए वनडे मैच में भारत को जीत दिलाने वाली पारी के बाद बल्लेबाज़ी के दिग्गज विराट कोहली ने कहा कि उन्होंने अपनी रणनीति बदली है। अब वह पारी की शुरुआत में ही पलटवार करना चाहते हैं, ताकि गेंदबाज़ों पर दबाव बनाया जा सके और मैच का रुख भारत के पक्ष में मोड़ा जा सके।

वडोदरा में खेले गए पहले वनडे में भारत ने 301 रन का लक्ष्य एक ओवर शेष रहते चार विकेट से हासिल किया। इस जीत में नंबर तीन पर बल्लेबाज़ी करते हुए कोहली की 91 गेंदों में 93 रन की अहम पारी निर्णायक साबित हुई।

रोहित शर्मा के नौवें ओवर में 26 रन पर आउट होने के बाद कोहली ने रक्षात्मक रवैया नहीं अपनाया।

इसके बजाय उन्होंने कप्तान शुभमन गिल (56) के साथ 118 रन की महत्वपूर्ण साझेदारी करते हुए संतुलित आक्रामकता दिखाई और न्यूज़ीलैंड के गेंदबाज़ी आक्रमण को बैकफुट पर धकेल दिया।

प्लेयर ऑफ द मैच बनने के बाद कोहली ने कहा, “असल में मेरी सोच यही है कि मैं नंबर तीन पर बल्लेबाज़ी करता हूं। अगर हालात थोड़े मुश्किल हों, तो मैं अब सिर्फ स्थिति के हिसाब से खेलने के बजाय पलटवार करने पर भरोसा करता हूं, क्योंकि कभी भी कोई गेंद आपके नाम की हो सकती है।”

अब सिर्फ 50 ओवर फॉर्मेट में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेल रहे कोहली ने 37 साल की उम्र में भी अपनी क्लास साबित की। यह उनका लगातार पांचवां 50 से ज्यादा का वनडे स्कोर रहा।

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के 17वें साल में भी कोहली खुद को नए सिरे से ढाल रहे हैं। उनका कहना है कि अब वह क्रीज़ पर आने के बाद शुरुआती 20 गेंदों का पूरा फायदा उठाना चाहते हैं।

उन्होंने कहा, “ज्यादा देर तक इंतज़ार करने का कोई मतलब नहीं है। लेकिन इसका मतलब यह भी नहीं कि आप बेवजह के शॉट खेलें। आप अपनी ताकत पर टिके रहते हैं, लेकिन खुद पर इतना भरोसा रखते हैं कि विपक्ष को दबाव में ला सकें। मुझे लगा कि अगर रोहित जैसे विकेट के बाद मैं शुरुआती 20 गेंदों में तेजी दिखाऊं, तो हम तुरंत एक मजबूत साझेदारी बना सकते हैं और विपक्ष बैकफुट पर चला जाएगा। यही इस मैच में फर्क बना।”

भारत और न्यूज़ीलैंड के बीच तीन मैचों की वनडे सीरीज़ का दूसरा मुकाबला बुधवार को इंदौर में खेला जाएगा।