कैसे ईशान किशन ने गहरे व्यक्तिगत दुख के बावजूद टी20 वर्ल्ड कप फाइनल में शानदार प्रदर्शन किया!

जब भारतीय कप्तान सूर्यकुमार यादव ने ईशान किशन को फोन कर टी20 वर्ल्ड कप टीम में उनकी जगह की पुष्टि की, तो उन्होंने सिर्फ एक सवाल पूछा— “वर्ल्ड कप जिताएगा?”

चुनौतियों से पीछे न हटने वाले ईशान किशन ने भी तुरंत जवाब में सवाल किया— “भरोसा करोगे?”

सूर्यकुमार ने इस छोटे से संवाद में ही हां कह दी, और किशन ने टूर्नामेंट में 241 रन बनाकर उस भरोसे को सही साबित किया। अहमदाबाद में खेले गए फाइनल में उन्होंने शानदार अर्धशतक लगाया।

किशन ने कहा, “सूर्या भाई ने मुझे फोन किया जब टीम की मीटिंग होने वाली थी। मैंने उस कॉल का स्क्रीनशॉट भी ले लिया था क्योंकि मुझे लगा कि वह वर्ल्ड कप टीम के बारे में बात करने वाले हैं। उन्होंने सीधे पूछा, ‘वर्ल्ड कप जिताएगा?’”

उन्होंने आगे बताया, “मैंने उनसे पूछा, ‘भरोसा करोगे?’ उन्होंने कहा ‘हां’, और बस वहीं से सब तय हो गया।”

हालांकि फाइनल से ठीक पहले किशन के लिए एक बेहद कठिन समय था। उन्होंने बताया कि कुछ दिन पहले ही उन्हें पता चला था कि उनकी कज़िन बहन की कार दुर्घटना में मौत हो गई है। इस खबर ने उन्हें अंदर से झकझोर दिया था और वह टूर्नामेंट के सबसे बड़े मैच से पहले काफी भावुक थे।

ईशान ने कहा, “सच कहूं तो मैच से पहले मैं यह बात बताना नहीं चाहता था, लेकिन अब बता रहा हूं। मेरी कज़िन बहन का कार एक्सीडेंट में निधन हो गया। उसे हमेशा यह इच्छा थी कि मैं बड़े रन बनाऊं।”

उन्होंने भावुक होकर कहा, “कल मैं ठीक महसूस नहीं कर रहा था, लेकिन आज बड़ा दिन था। इसलिए मैंने सोचा कि अपनी भावनाओं में बहने के बजाय सबसे अच्छा यही होगा कि मैं उसके लिए रन बनाऊं।”

किशन ने बताया कि जब उन्होंने अपना अर्धशतक पूरा किया, तो उन्होंने आसमान की ओर देखा और वह पल अपनी बहन को समर्पित किया।

उन्होंने कहा, “जब मैंने पचास रन पूरे किए और ऊपर देखा, तो वह उसी के लिए था। जैसे मैं कह रहा था कि यह मेरी बहन के लिए है। मुझे बहुत गर्व है कि हम आज जीत गए। उसके परिवार के लिए मुझे दुख है, लेकिन मेरे करीबी दोस्त उनका ख्याल रख रहे हैं। आज मेरे अंदर बहुत कुछ चल रहा था, लेकिन मैं बस अच्छा प्रदर्शन करना चाहता था।”

उन्होंने स्वीकार किया कि भावनात्मक दबाव के कारण मैच की तैयारी आसान नहीं थी, लेकिन उन्होंने खुद को याद दिलाया कि टीम सबसे पहले आती है।

किशन ने कहा, “कल रात से ही मैं ठीक महसूस नहीं कर रहा था और बार-बार उसी बात के बारे में सोच रहा था। लेकिन अंत में आपको टीम को सबसे ऊपर रखना होता है, क्योंकि क्रिकेट व्यक्तिगत खेल नहीं है। मैं बस ज्यादा से ज्यादा रन बनाने की कोशिश कर रहा था, भले ही मेरे मन में यह सवाल था कि अच्छे लोगों के साथ बुरा क्यों होता है।”

उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय टीम का ड्रेसिंग रूम भरोसे और सादगी के माहौल पर चलता है।

किशन ने कहा, “वर्ल्ड कप हमेशा बहुत बड़ा मंच होता है और दबाव भी होता है। लेकिन यहां काम बहुत सरल है—सही शॉट खेलना और चीजों को आसान रखना। जब आप चीजों को सरल रखते हैं, तो खिलाड़ी के लिए खेलना आसान हो जाता है।”

उन्होंने टीम के सपोर्ट सिस्टम का भी धन्यवाद किया।

“टीम के माहौल को देखकर ही पता चल जाता है कि डर है या आत्मविश्वास। इस बार पूरे वर्ल्ड कप में विश्वास बहुत मजबूत था। कोच और कप्तान ने सभी खिलाड़ियों को आज़ादी दी और कभी शक नहीं किया। जब ऐसा समर्थन मिलता है, तो आप खुद मैच बदलना चाहते हैं।”

पिछले कुछ वर्षों में किशन ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से जुड़े दबाव और उम्मीदों से खुद को अलग रखना सीख लिया है।

उन्होंने कहा, “सच कहूं तो पिछले दो सालों में मैंने ज्यादा सोचना बंद कर दिया है। मैं यह नहीं सोचता कि मैं कहां बल्लेबाजी करूंगा या कल टीम में रहूंगा या नहीं, क्योंकि वह मेरे हाथ में नहीं है। मैंने सीखा है कि बस अपना काम करते रहो और मेहनत करो, नतीजे की चिंता मत करो।”

किशन ने यह भी बताया कि उन्होंने अपनी ऊर्जा को संभालना विराट कोहली से सीखा है।

उन्होंने कहा, “मैं विराट की बहुत इज्जत करता हूं, क्योंकि उन्होंने इतने सालों तक अपनी ऊर्जा को जिस तरह इस्तेमाल किया है, वह प्रेरणादायक है। यह समझना मेरे लिए जरूरी था कि मुझे अपने अंदर क्या बदलना है।”

अंत में किशन ने कहा, “स्किल्स ज्यादा नहीं बदलतीं… इसलिए अब मैं बस अपना काम करता हूं और ज्यादा सोचता नहीं।”