भाई बनाम भाई: टी20 वर्ल्ड कप में रणनीतिक भिड़ंत के लिए तैयार एल्बी और मोर्ने मोर्केल!

क्रिकेट में अक्सर भाई एक ही टीम के लिए खेलते हुए नजर आते हैं, लेकिन इस रविवार टी20 वर्ल्ड कप में एक अनोखा नज़ारा देखने को मिलेगा। सालों तक साथ खेलने वाले दो भाई अब अलग-अलग टीमों के डगआउट में बैठकर एक-दूसरे के खिलाफ रणनीति बनाते दिखेंगे। इस मुकाबले में उनकी मां सबसे ज्यादा उलझन में होंगी कि आखिर वह भारत को सपोर्ट करें या दक्षिण अफ्रीका को।

यह दिलचस्प स्थिति दक्षिण अफ्रीका के मशहूर मोर्केल भाइयों — एल्बी और मोर्ने मोर्केल — की वजह से बनी है। मोर्ने भारत की टीम के गेंदबाजी कोच के तौर पर गौतम गंभीर की सपोर्ट स्टाफ का अहम हिस्सा हैं, जबकि एल्बी इस टूर्नामेंट में दक्षिण अफ्रीका के लिए “स्पेशलिस्ट कंसल्टेंट” की भूमिका निभा रहे हैं।

एल्बी ने हाल ही में मज़ाक में कहा था, “नहीं, हम आपस में बात नहीं कर रहे हैं। मेरी मां हमसे ज़्यादा परेशान हैं। उन्हें समझ नहीं आ रहा कि भारत को सपोर्ट करें या साउथ अफ्रीका को।”

ग्रुप स्टेज में शानदार प्रदर्शन के बाद दोनों टीमें सुपर एट के अपने पहले मुकाबले में आमने-सामने होंगी। मोर्ने ने भी माना कि उन्होंने अपने बड़े भाई से ज़्यादा बातचीत नहीं की है।

“मैंने उन्हें मैदान पर आते देखा, लेकिन हमारी ज़्यादा बात नहीं हुई। फिर भी उन्हें देखकर अच्छा लगा,” मोर्ने ने अहमदाबाद में कहा।

मोर्केल भाइयों ने इस कहावत को सच कर दिखाया है कि भाई आपका पहला दोस्त, पहला टीममेट और कभी-कभी पहला प्रतिद्वंद्वी भी होता है।

मोर्ने का अंतरराष्ट्रीय करियर ज्यादा लंबा और प्रभावशाली रहा। उन्होंने 86 टेस्ट मैचों में 309 विकेट लिए और तीनों फॉर्मेट में खुद को साबित किया। वहीं एल्बी ज्यादातर लिमिटेड ओवर क्रिकेट के खिलाड़ी रहे, जिन्होंने टी20 और वनडे मिलाकर 108 मैच खेले।

एल्बी के करियर का एक दिलचस्प पहलू यह भी है कि चेन्नई सुपर किंग्स के शुरुआती सीज़नों में वह महेंद्र सिंह धोनी के बेहद भरोसेमंद खिलाड़ी माने जाते थे। डेथ ओवर्स में उनकी गेंदबाजी और निचले क्रम में तेज़ रन बनाना टीम के लिए बहुत काम आया।

जब एल्बी से पूछा गया कि “स्पेशलिस्ट कंसल्टेंट” की भूमिका असल में क्या है, तो उन्होंने मुस्कराते हुए कहा, “ये खुद मुझे भी समझनी पड़ी। मेरा काम बस इतना है कि टीम वर्ल्ड कप में अच्छा करे — कभी बल्लेबाजी में मदद, कभी फील्डिंग में और फिलहाल ज़्यादातर गेंदबाजी पर फोकस है।”

उन्होंने यह भी बताया कि वह निचले क्रम के बल्लेबाज़ों के साथ स्विंग और शॉट सेलेक्शन पर भी काम करते हैं।

एल्बी ने माना कि उन्होंने कोचिंग के कई बेहतरीन तरीके स्टीफन फ्लेमिंग से सीखे हैं, जिन्हें उन्होंने चेन्नई सुपर किंग्स में करीब से देखा।

“फ्लेमिंग मेरे लिए बहुत बड़े इंस्पिरेशन हैं। दुनिया में शायद वही इकलौते कोच हैं जो 17 साल से एक ही फ्रेंचाइज़ी के साथ जुड़े हुए हैं। ये अपने आप में बड़ी बात है। इसका मतलब है कि वह कुछ बहुत सही कर रहे हैं।”

इस रविवार करीब साढ़े तीन घंटे के लिए दोनों भाई अपना रिश्ता भूलकर सिर्फ अपनी-अपनी टीम के लिए रणनीति और जीत पर फोकस करेंगे — जहां परिवार की जगह प्रोफेशनल राइवलरी देखने को मिलेगी।