150 किमी/घंटा की रफ्तार से गेंदबाजी करना हिम्मत मांगता है — मैं पांच साल से कर रहा हूं: उमरान मलिक

चोट से उभरने के बाद तेज़तरार गेंदबाज़ उमरान मलिक एक बार फिर टीम इंडिया की जर्सी पहनने का सपना देखने लगे हैं। इसके लिए वह अपनी नैचुरल 150+ स्पीड के साथ-साथ नई स्किल्स—स्लोअर वन और शार्प यॉर्कर—को भी निखार रहे हैं।

10 वनडे और 8 टी20 में 24 विकेट लेने वाले उमरान जुलाई 2023 के बाद कई वजहों से टीम इंडिया से बाहर रहे, लेकिन इन झटकों ने उनका मनोबल नहीं तोड़ा।

उन्होंने कहा, “एक बात बता दूं—जो 150 की स्पीड से गेंदबाज़ी करता है, वह स्ट्राइक बॉलर नहीं, अटैकिंग बॉलर होता है। चार ओवर में 30 रन भी खाएगा लेकिन विकेट भी देगा। यही तेज़ गेंदबाज़ की पहचान है। उसे पता होना चाहिए कि उसे क्या करना है।”

कोलकाता में यूपी के खिलाफ सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी मैच के बाद मीडिया से बात करते हुए उमरान ने कहा— “जो बॉलर 150 फेंकता है, वह जानता है कि वह किंग है। सब 150 नहीं डाल सकते। इसके लिए असली हिम्मत चाहिए—और मैं पिछले पांच साल से यही कर रहा हूं।”

उन्होंने समझाया कि इस स्पीड तक पहुंचना मेहनत की चीज़ नहीं, बल्कि कला है।

“150 किमी/घंटा एक आर्ट है। आप 137 से सीधे 145 नहीं पहुंच सकते। ट्रेनिंग करें, जो करना है करें— लेकिन यह नैचुरल होता है। आपको सिर्फ अपने शरीर को फिट और फ्रेश रखना है ताकि कल फिर तैयार रहें। मेरी स्पीड मेरी ताक़त है— मैं उस पर समझौता नहीं कर सकता।”

2024 IPL में 156.7 किमी/घंटा दर्ज करने वाले उमरान ने कहा कि बीमारी और चोटों के बावजूद उन्होंने कभी अपने करियर पर शक नहीं किया।

“मैं मानसिक रूप से निराश नहीं होता। मुझे पता है कि मैं अच्छा करूंगा। मैं इंडिया टीम में वापस आऊँगा। मुझे खुद पर भरोसा है क्योंकि मैं अकेला हूँ जो 150 डालता हूँ। अब मैं स्लोअर और यॉर्कर पर भी मेहनत कर रहा हूँ, रेड-बॉल क्रिकेट में भी।”

टीम में तेज़ गेंदबाज़ों की बड़ी प्रतिस्पर्धा के बावजूद वह बेफिक्र हैं।

“पहले भी जितनी कम्पटीशन थी, आज भी वही है।
जब मैं फिट होकर विकेट लूंगा, तो क्यों नहीं खिलाएंगे? विकेट लोगे तो टीम में जगह मिलती है—बस बात खत्म।”

26 साल के उमरान का अभी का लक्ष्य बहुत साफ़ है – जम्मू-कश्मीर के लिए SMAT में सबसे ज़्यादा विकेट लेना।

उन्होंने दो मैचों में 5 विकेट ले लिए हैं, जिसमें यूपी के खिलाफ 3/37 शामिल है। उन्होंने अपनी रफ्तार से आर्यन जुयाल, करण शर्मा और रिंकू सिंह को आउट किया।

इंजरी के बारे में बोले— “चोट किसी को भी लग सकती है—बल्लेबाज़, गेंदबाज़, फील्डर—किसी को भी। फर्क सिर्फ इतना है कि उससे बाहर कैसे निकला जाए।”

क्या कभी करियर खत्म होने का डर लगा?

“मैं कभी करियर के बारे में नहीं सोचता। मैं सिर्फ अगले दिन क्या ट्रेनिंग करनी है, क्या करना है—उसके बारे में सोचता हूं। करियर किसका है और किसका नहीं—ये ऊपरवाला तय करता है।”

उमरान पिछले डेढ़ साल से बीमारी और चोटों से जूझ रहे थे। IPL 2025 भी मिस किया। उन्होंने छह महीने BCCI के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में गुजारे और अभिषेक नायर से ट्रेनिंग ली।

लौटने के बाद उनकी पहली प्रतिस्पर्धी क्रिकेट—रणजी में राजस्थान के खिलाफ मैच—

“अगर आपका माइंडसेट स्टेबल है, तो इंजरी के बाद और बेहतर खेलते हैं। अब गेंद हाथ से स्मूद निकल रही है। इंजरी बहुत कुछ सिखाती है—बॉडी, माइंड, सबके बारे में।”

उन्होंने कहा कि उम्र बढ़ने के साथ उनकी स्पीड कम होने की बातें गलत हैं।

“आप कभी भी सीधे 150 नहीं डाल सकते। 138-140-142 से शुरू होता है। मैं जितना खेलूंगा, पॉज़िटिव रहूंगा। अगर 10 साल बाद 150 की जगह 140 हुआ, तो क्या हुआ? 135 या 130 तक नहीं जाऊंगा।”

रेड-बॉल क्रिकेट पर उन्होंने कहा— “मैं पूरी तरह तैयार हूँ। मैं सभी फॉर्मैट खेलने के लिए तैयार हूँ।”

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Manish Kumar
मनीष कुमार एक अनुभवी खेल पत्रकार हैं, जिन्हें खेल पत्रकारिता में 25 से ज़्यादा सालों का अनुभव है। वह खास तौर पर क्रिकेट के विशेषज्ञ माने जाते हैं, खासकर टेस्ट क्रिकेट जैसे लंबे और चुनौतीपूर्ण फॉर्मेट में। उन्होंने टाइम्स ऑफ इंडिया ऑनलाइन के साथ करीब 16.5 साल तक काम किया, जहां उन्होंने बड़े क्रिकेट आयोजनों की कवरेज की और गहराई से विश्लेषण वाले लेख और उनकी भरोसेमंद राय पेश की। टेस्ट क्रिकेट के प्रति उनका जुनून उनकी लेखनी में साफ दिखाई देता है, जहां वह खेल की बारीकियों, रणनीतिक मुकाबलों और खिलाड़ियों के व्यक्तिगत प्रदर्शन को सरल और स्पष्ट तरीके से समझाते हैं। मनीष अपनी तेज़ नज़र और डिटेल्स पर ध्यान देने के लिए जाने जाते हैं। आज भी वह क्रिकेट के रोमांच, जटिलताओं और कहानी को दुनिया भर के प्रशंसकों तक जीवंत अंदाज़ में पहुंचाते हैं।