
भारत की हालिया टी20 वर्ल्ड कप जीत के बाद ऑस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान रिकी पोंटिंग ने भारतीय टीम को अब तक की सबसे बेहतरीन टी20 अंतरराष्ट्रीय टीम बताया। उन्होंने कहा कि टीम की गहराई, अनुभव और निरंतरता उसके शानदार व्हाइट-बॉल रिकॉर्ड को दर्शाती है।
अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में खेले गए फाइनल में भारत ने न्यूजीलैंड को 96 रन से हराकर अपना तीसरा आईसीसी पुरुष टी20 वर्ल्ड कप खिताब जीता। इसके साथ ही भारत खिताब बचाने वाली पहली टीम और अपने घर में ट्रॉफी जीतने वाली पहली टीम बन गया।
2023 के बाद से भारत ने चार बड़े आईसीसी टूर्नामेंट्स में जबरदस्त प्रदर्शन किया है, जिसमें उसे सिर्फ दो हार मिली—एक 2026 टी20 वर्ल्ड कप के सुपर-8 में दक्षिण अफ्रीका से और दूसरी 2023 वनडे वर्ल्ड कप फाइनल में ऑस्ट्रेलिया से।
आईसीसी रिव्यू में पोंटिंग ने कहा, “इस बात से असहमत होना मुश्किल है। अगर आप पिछले पांच-छह सालों में टीम इंडिया के व्हाइट-बॉल रिकॉर्ड को देखें, तो यह वाकई शानदार है।”
उन्होंने आगे कहा, “टूर्नामेंट शुरू होने से पहले ही लोगों को इस टीम की गहराई, ताकत और अनुभव का अंदाजा था। यह सिर्फ टी20 नहीं, बल्कि एक बहुत मजबूत भारतीय व्हाइट-बॉल टीम है। लगातार दो वर्ल्ड कप जीतना काबिल-ए-तारीफ है।”
तीन बार वर्ल्ड कप जीत चुके पोंटिंग ने यह भी कहा कि टीम के खिलाड़ियों के पास अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट और आईपीएल में बड़े मैच खेलने का अनुभव है, जो उनकी सफलता का बड़ा कारण है।
उन्होंने कहा, “इस टीम के बारे में एक चीज जो अक्सर नजरअंदाज हो जाती है, वह है खिलाड़ियों का अनुभव। चाहे अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट हो या आईपीएल—इन खिलाड़ियों ने बहुत क्रिकेट खेला है। आईपीएल के मैच भी किसी अंतरराष्ट्रीय मैच से कम नहीं होते, इसलिए यह टीम पूरी तरह तैयार थी और संतुलित भी।”
सुपर-8 चरण में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ 76 रन की हार के बावजूद पोंटिंग का मानना है कि इस हार ने टीम को संभलने का मौका दिया।
उन्होंने कहा, “जब आप लगातार 12 मैच जीतते हैं, तो एक खराब दिन आना तय है। अच्छा हुआ कि वह जल्दी आ गया। इससे टीम को सीखने का मौका मिला और उन्होंने चीजों को हल्के में लेना बंद किया।”
इसके बाद भारत ने जबरदस्त वापसी की और आखिरी चार मैचों में से तीन में 250 से ज्यादा रन बनाए, जिसमें सेमीफाइनल और फाइनल भी शामिल थे।
पोंटिंग ने कहा, “शायद इस हार ने टीम को फिर से एकजुट होने और जरूरी बातों पर ध्यान देने का मौका दिया। उन्होंने अपनी सबसे मजबूत प्लेइंग इलेवन तय की और टूर्नामेंट के अंत तक ज्यादा बदलाव नहीं किए।”








