
ऑस्ट्रेलिया ने गुरुवार को सिडनी में खेले गए आख़िरी टेस्ट में इंग्लैंड को पाँच विकेट से हराकर एशेज़ सीरीज़ 4-1 से अपने नाम कर ली।
अपनी आक्रामक “बेसबॉल” रणनीति के साथ इंग्लैंड ऑस्ट्रेलिया पहुँचा था, उम्मीद थी कि वह 2010–11 के बाद पहली बार ऑस्ट्रेलिया में एशेज़ सीरीज़ जीत पाएगा। लेकिन मज़बूत ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाज़ी और मुश्किल बल्लेबाज़ी पिचों के सामने यह रणनीति जल्दी ही बिखर गई।
पर्थ और ब्रिस्बेन में आठ-आठ विकेट से करारी हार के साथ इंग्लैंड सिर्फ़ छह दिनों में ही 0-2 से पीछे हो गया। इसके बाद कोच ब्रेंडन मैक्कुलम और कप्तान बेन स्टोक्स पर सवाल उठने लगे।
पूर्व इंग्लैंड कप्तान माइकल वॉन ने इस बेहद आक्रामक रवैये को “कुछ ज़्यादा ही अनुमानित” बताया, जबकि बीबीसी के वरिष्ठ कमेंटेटर जोनाथन एग्न्यू ने तो यहाँ तक कह दिया कि “बेसबॉल मर चुका है।”
तीसरे टेस्ट की पहली पारी में स्टोक्स ने चार घंटे से ज़्यादा समय तक ऑस्ट्रेलिया का सामना किया और अपने करियर का सबसे धीमा अर्धशतक लगाया, जिससे यह साफ़ हो गया कि आक्रामक बेसबॉल अंदाज़ फीका पड़ चुका है।
स्टोक्स की कप्तानी फिलहाल सुरक्षित मानी जा रही है, लेकिन मैक्कुलम के भविष्य को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं कि क्या उन्हें इस पद पर बने रहना चाहिए।
क्रिकेट प्रमुख रॉब की को भी इस दौरे के बाद उठे विवादों से निपटना होगा। इंग्लैंड पर अनुशासनहीनता और तैयारी की कमी के आरोप लगे, वहीं सीरीज़ के बीच बीच ब्रेक और पार्टी को लेकर भी कड़ी आलोचना हुई।
हालांकि, स्टोक्स ने जल्दबाज़ी में फ़ैसले न लेने की बात कही और मैक्कुलम पर भरोसा जताया।
मैक्कुलम ने एएफपी से कहा, “मुझे नहीं लगता कि इस टीम को यहाँ से और ऊँचाइयों तक ले जाने के लिए कोई और बेहतर विकल्प है। हम दोनों वही काम आगे भी करना चाहते हैं जो अभी कर रहे हैं।”
ऑस्ट्रेलिया ने अपने एक अनुभवी ओपनर को खोने के बाद भी नया भरोसेमंद सलामी बल्लेबाज़ ढूँढ लिया। पर्थ टेस्ट में उस्मान ख़्वाजा की पीठ में दर्द के बाद ट्रैविस हेड को नंबर पाँच से ऊपर भेजा गया, जहाँ उन्होंने तेज़ 123 रन बनाकर मैच जिताया।
इसके बाद हेड पूरी सीरीज़ में ओपनर बने रहे और एडिलेड व सिडनी में शतक जड़कर अपनी जगह लगभग पक्की कर ली।
39 वर्षीय ख़्वाजा ने तीसरे टेस्ट में चोटिल स्टीव स्मिथ की जगह नंबर चार पर सफलतापूर्वक बल्लेबाज़ी की, लेकिन सिडनी में अपना 88वां टेस्ट खेलने के बाद उन्होंने संन्यास की घोषणा कर दी।
डेविड वॉर्नर के संन्यास के दो साल बाद भी ऑस्ट्रेलिया को स्थायी सलामी जोड़ी की तलाश है, क्योंकि हेड के जोड़ीदार जेक वेदराल्ड खास प्रदर्शन नहीं कर पाए।
पूरी सीरीज़ में ऑस्ट्रेलिया की गेंदबाज़ी की गहराई साफ़ नज़र आई। कमजोर माने जा रहे आक्रमण के बावजूद उन्होंने इंग्लैंड को दबाए रखा।
जोश हेज़लवुड चोट के कारण पूरी सीरीज़ से बाहर रहे, कप्तान पैट कमिंस सिर्फ़ एडिलेड टेस्ट खेल पाए और नियमित बैकअप सीन एबॉट भी उपलब्ध नहीं थे।
इसके बावजूद ब्रेंडन डॉगेट, माइकल नेसर और झाय रिचर्डसन ने योगदान दिया, जबकि भरोसेमंद मिचेल स्टार्क ने स्कॉट बोलैंड के साथ मिलकर शानदार प्रदर्शन किया।
स्टोक्स ने भी माना कि ऑस्ट्रेलिया की गेंदबाज़ी उनसे कहीं बेहतर थी और सीरीज़ के नतीजे का कारण उनकी “शानदार गेंदबाज़ी” को बताया।
उन्होंने कहा, “ऑस्ट्रेलिया और हमारी गेंदबाज़ी में बहुत बड़ा अंतर था। इसकी ज़िम्मेदारी हम लेते हैं।”
अनुभवी बल्लेबाज़ जो रूट और स्टीव स्मिथ ने एक बार फिर साबित कर दिया कि वे क्यों सबसे अलग श्रेणी में गिने जाते हैं। रूट ने दबाव में ऑस्ट्रेलिया में अपना पहला शतक लगाया और फिर एक और शतक जोड़ा।
स्मिथ ने भी अपने शतक के साथ पाँच में से चार टेस्ट में ऑस्ट्रेलिया का कुशल नेतृत्व किया।
दोनों के बीच कुल 286 टेस्ट और 24,000 से ज़्यादा रन हो चुके हैं।
रूट ने 41 टेस्ट शतकों के साथ रिकी पोंटिंग की बराबरी की, उनसे आगे सिर्फ़ जैक कैलिस (45) और सचिन तेंदुलकर (51) हैं। वहीं स्मिथ का 13वां एशेज़ शतक, डॉन ब्रैडमैन के अलावा किसी भी खिलाड़ी से ज़्यादा है।
36 वर्षीय स्मिथ ने संन्यास के संकेत नहीं दिए हैं, जबकि 35 वर्षीय रूट ने सिडनी में इशारा किया कि वह 2029 के दौरे पर फिर ऑस्ट्रेलिया लौट सकते हैं।








