एशेज: ‘शानदार’ ऑस्ट्रेलिया ने बरकरार रखा एशेज, ‘आहत’ इंग्लैंड चूक गया!

इंग्लैंड की निचली क्रम की बल्लेबाज़ी ने थोड़ी देर के लिए रोमांचक वापसी की उम्मीद जरूर जगाई, लेकिन आखिरकार ऑस्ट्रेलिया के कप्तान पैट कमिंस ने रविवार को कहा कि एडिलेड में तीसरा टेस्ट जीतकर एशेज बरकरार रखना “काफी शानदार” एहसास है। ऑस्ट्रेलिया ने महज़ 11 दिनों के खेल में ही एशेज अपने नाम कर लिया।

रिकॉर्ड 435 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए इंग्लैंड ने सीरीज़ में पहली बार ज़ोरदार मुकाबला किया, लेकिन आख़िरी दिन उनकी अंतिम चार विकेटों की साझेदारी कुल 145 रन ही जोड़ सकी। इंग्लैंड की टीम 352 रन पर ऑलआउट हो गई और उसे 82 रन से हार का सामना करना पड़ा।

आख़िरी विकेट तब गिरा जब ऑस्ट्रेलिया के स्कॉट बोलैंड ने जोश टंग को आउट किया, जिन्हें मार्नस लाबुशेन ने कैच पकड़ा। इसके साथ ही स्टेडियम में जश्न का माहौल छा गया और मशहूर एशेज अर्न एक बार फिर ऑस्ट्रेलिया के पास ही रहा।

ऑस्ट्रेलियाई कप्तान पैट कमिंस ने कहा, “यह एहसास वाकई शानदार है। आज यह आसान नहीं था, लेकिन हमने कर दिखाया। पिछले दो महीने काफ़ी थकाने वाले रहे हैं।
लेकिन ऐसे दिनों के लिए सारी मेहनत वसूल हो जाती है। ऐसे मौकों पर हम सबसे बेहतरीन खेल दिखाते हैं—यह पुरानी शैली की कड़ी मेहनत है और मुझे पूरी टीम का यह जुझारूपन पसंद आया।”

हालांकि, ऑस्ट्रेलिया को एक झटका तब लगा जब स्पिनर नाथन लियोन फील्डिंग के दौरान हैमस्ट्रिंग में खिंचाव के कारण मैदान से बाहर चले गए। हालांकि दूसरी नई गेंद से मिचेल स्टार्क, कमिंस और बोलैंड ने पारी समेट दी, इसलिए लियोन की ज़रूरत नहीं पड़ी।

लियोन के मेलबर्न टेस्ट (जो शुक्रवार से शुरू होगा) और 4 जनवरी से होने वाले सिडनी टेस्ट से बाहर होने की संभावना जताई जा रही है। स्कैन के बाद उन्हें बैसाखियों के सहारे चलते देखा गया।

कमिंस ने कहा, “स्थिति अच्छी नहीं लग रही है। अभी कुछ साफ़ नहीं है, लेकिन टेस्ट मैच से एक हफ्ते पहले किसी खिलाड़ी को बैसाखियों पर देखना शुभ संकेत नहीं है। उनकी जगह भरना मुश्किल होगा, हालांकि हमारे पास कुछ ऐसे खिलाड़ी हैं जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का अनुभव लिया है।”

पीठ की समस्या से लंबे समय बाद लौटे कमिंस ने भी बताया कि एहतियात के तौर पर वह मेलबर्न टेस्ट नहीं खेलेंगे।
उन्होंने कहा, “हम हालात देखकर फैसला करेंगे। अगले कुछ दिनों में इस पर काम करेंगे। मुझे नहीं लगता कि मैं मेलबर्न खेलूंगा, फिर सिडनी को लेकर बात होगी।”

इंग्लैंड के लिए यह हार और भी निराशाजनक रही। उनकी ‘बैज़बॉल’ शैली की आक्रामक क्रिकेट उजागर हो गई और 11 दिनों में सीरीज़ हारना पिछले सौ सालों में दूसरी सबसे तेज़ हार है। इससे पहले 1921 की एशेज महज़ आठ दिनों में खत्म हो गई थी।

इंग्लैंड के कप्तान बेन स्टोक्स ने कहा, “वह सपना अब खत्म हो गया है, जो बेहद निराशाजनक है। हर कोई आहत है और भावुक भी। यह दर्द देता है, लेकिन हम रुकने वाले नहीं हैं।”

हालांकि स्टोक्स ने टीम के संघर्ष से कुछ सकारात्मक संकेत भी देखे।

उन्होंने कहा, “जो जज़्बा मैं देखना चाहता था, वह इस हफ्ते नज़र आया। हम इस मैच से बहुत कुछ सीख सकते हैं। अभी हमारे पास खेलने के लिए बहुत कुछ है और हम अगले दो मैचों में पूरी ताकत से उतरेंगे।”

एशेज से पहले जिस इंग्लैंड को ऑस्ट्रेलिया में एक पीढ़ी में सबसे बड़ा दावेदार माना जा रहा था, वह उम्मीद अब तीन टेस्ट में ही दम तोड़ चुकी है। यह उस दावे पर भी सवाल खड़े करता है जिसमें कहा गया था कि ऑस्ट्रेलिया की यह टीम पिछले 15 सालों में सबसे कमजोर है।

हकीकत यह है कि 2010–11 के बाद से इंग्लैंड ऑस्ट्रेलिया में 18 टेस्ट खेल चुका है और एक भी जीत दर्ज नहीं कर पाया है। अगर हालात नहीं बदले, तो यह दौरा भी पहले के 5-0, 4-0 और 4-0 जैसी एकतरफा हारों की कतार में जुड़ जाएगा।

अंतिम दिन इंग्लैंड ने 207/6 से खेल शुरू किया। विल जैक्स 11 और जेमी स्मिथ 2 रन पर थे। ‘बार्मी आर्मी’ के समर्थक जब बॉन जोवी का “लिविन ऑन ए प्रेयर” गा रहे थे, तब स्मिथ ने आक्रामक अंदाज़ में लियोन और कैमरन ग्रीन पर छक्के लगाए।

हालांकि मिचेल स्टार्क की गेंद पर बड़ा शॉट खेलने की कोशिश में स्मिथ 60 रन बनाकर पैट कमिंस को कैच दे बैठे।
जैक्स ने 47 रन बनाकर संघर्ष जारी रखा, लेकिन स्टार्क की गेंद पर किनारा लगने के बाद लाबुशेन ने एक और शानदार डाइविंग कैच पकड़ा।

आख़िरकार स्टार्क ने जोफ्रा आर्चर को आउट किया और फिर बोलैंड ने टंग का विकेट लेकर मुकाबले पर अंतिम मुहर लगा दी—जिसके साथ ही ऑस्ट्रेलिया का जश्न शुरू हो गया।