
भारतीय बैडमिंटन स्टार पीवी सिंधु का मानना है कि आज के समय में “हर खिलाड़ी को हराया जा सकता है” और इसी आत्मविश्वास के साथ वह अगले महीने नई दिल्ली में होने वाली बैडमिंटन विश्व चैंपियनशिप में पदक जीतने के इरादे से उतरेंगी।
सिंधु इससे पहले 2016 रियो ओलंपिक में रजत पदक, 2020 टोक्यो ओलंपिक (2021) में कांस्य पदक और 2019 विश्व चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीत चुकी हैं। 17 से 23 अगस्त तक नई दिल्ली में होने वाली विश्व चैंपियनशिप में 31 वर्षीय सिंधु पर एक बार फिर सभी की नजरें रहेंगी।
फिलहाल जापान ओपन में हिस्सा ले रहीं सिंधु ने एएफपी से बातचीत में कहा कि उन्हें इस बार भी पदक जीतने की पूरी उम्मीद है।
उन्होंने कहा, “फिलहाल जिस तरह का खेल मैं खेल रही हूं, उसमें मुझे सिर्फ कुछ छोटे-छोटे सुधार करने हैं और अपने गेम प्लान पर कायम रहना है, चाहे सामने कोई भी खिलाड़ी हो। हर अंक के लिए लड़ना जरूरी है। मुझे लगता है कि हर खिलाड़ी को हराया जा सकता है।”
सिंधु ने पिछले महीने ऑस्ट्रेलियन ओपन के सेमीफाइनल तक का सफर तय किया था। उनकी पिछली खिताबी जीत दिसंबर 2024 में सैयद मोदी इंडिया इंटरनेशनल, लखनऊ में आई थी। उनका मानना है कि घरेलू दर्शकों के बीच खेलना उन्हें विश्व चैंपियनशिप में अतिरिक्त आत्मविश्वास देगा।
उन्होंने कहा, “दबाव तो रहेगा, मैं इससे इनकार नहीं करूंगी। लेकिन अपने घरेलू कोर्ट पर खेलने से अलग तरह का आत्मविश्वास भी मिलता है। मुझे लगता है कि हमारे देश में इस टूर्नामेंट का होना बहुत अच्छी बात है और इससे मुझे काफी भरोसा मिलता है।”
हालांकि इस बार केवल सिंधु ही नहीं, बल्कि कई अन्य भारतीय खिलाड़ी भी विश्व चैंपियनशिप में पदक के दावेदार होंगे। पुरुष एकल में लक्ष्य सेन विश्व रैंकिंग में 14वें स्थान पर हैं, जबकि पुरुष युगल में सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी की जोड़ी चौथे स्थान पर काबिज है।
भारत में बैडमिंटन की बढ़ती लोकप्रियता पर सिंधु ने कहा, “मेरे हिसाब से भारत में क्रिकेट के बाद बैडमिंटन सबसे बड़ा खेल बन चुका है। पिछले कुछ वर्षों में इसकी लोकप्रियता काफी बढ़ी है और हमारे कई खिलाड़ी शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं। यह खेल अब काफी लोकप्रिय हो गया है और मुझे पूरा विश्वास है कि इस बार बड़ी संख्या में दर्शक भारतीय खिलाड़ियों का समर्थन करने आएंगे।”
विश्व चैंपियनशिप का आयोजन इससे पहले 2009 में सिंधु के गृह शहर हैदराबाद में हुआ था। सिंधु को उम्मीद है कि इस बार भारत इस सुनहरे अवसर का पूरा फायदा उठाएगा।
उन्होंने कहा, “युवा खिलाड़ियों के लिए यह शानदार मौका होगा कि वे दुनिया के शीर्ष खिलाड़ियों को दिल्ली में खेलते हुए देखें। उनके लिए यह एक बेहतरीन अनुभव होगा, जिससे वे बहुत कुछ सीख सकेंगे और अपने खेल को बेहतर बना सकेंगे।”








