हरमनप्रीत कौर ने लॉर्ड्स में ऐतिहासिक जीत के बाद की ज्यादा महिला टेस्ट मैचों की मांग!

लॉर्ड्स के ऐतिहासिक मैदान पर खेले गए एकमात्र महिला टेस्ट मैच में इंग्लैंड को 270 रनों के बड़े अंतर से हराने के बाद भारतीय कप्तान हरमनप्रीत कौर ने सोमवार को भविष्य में अधिक महिला टेस्ट क्रिकेट खेलने की इच्छा जताई। भारत ने ‘होम ऑफ क्रिकेट’ में खेले गए पहले महिला टेस्ट को शानदार जीत के साथ यादगार बना दिया।

मैच के बाद प्रस्तुति समारोह में हरमनप्रीत ने कहा, “भगवान सबसे अच्छे लेखक हैं और उन्होंने यह कहानी बहुत खूबसूरती से लिखी है। लॉर्ड्स में खेलना हमेशा खास होता है। मैं उन सभी लोगों का धन्यवाद करना चाहती हूं जिन्होंने इस मैदान पर महिला टेस्ट कराने के बारे में सोचा। उम्मीद है कि हमें यहां और भी टेस्ट खेलने का मौका मिलेगा। उम्मीद है कि हमें 10 और टेस्ट मैच खेलने को मिलेंगे और हम इसी तरह अच्छा प्रदर्शन करते रहेंगे।”

हरमनप्रीत ने विकेटकीपर बल्लेबाज यास्तिका भाटिया की जमकर तारीफ की, जिन्होंने शानदार शतक लगाकर भारत की जीत की नींव रखी। हालांकि उन्होंने कहा कि उनकी टीम की सबसे बड़ी ताकत सामूहिक प्रदर्शन रही।

उन्होंने कहा, “इसी वजह से हमने उन्हें प्लेइंग इलेवन में शामिल किया था। उन्होंने जिस तरह बल्लेबाजी की, उससे मैं बेहद खुश हूं। हमारी ओपनिंग जोड़ी हमेशा हमारी ताकत रही है। पहले सत्र में दोनों ने जिस तरह बल्लेबाजी की, वह देखना बेहद खास था। हमारी पूरी टीम ने शानदार फील्डिंग की। सभी खिलाड़ियों ने मिलकर टीम के लिए अपना काम बखूबी किया।”

भारतीय कप्तान ने मुख्य कोच अमोल मजूमदार समेत पूरे सपोर्ट स्टाफ की भी सराहना की, जिन्होंने कठिन दौर में भी खिलाड़ियों का आत्मविश्वास बनाए रखा।

उन्होंने कहा, “हमारे सपोर्ट स्टाफ ने काफी रेड-बॉल क्रिकेट खेला है। उन्हें अच्छी तरह पता है कि इस फॉर्मेट में गेंद कैसे मूव करती है और वे हर पल हमें जरूरी फीडबैक देते रहे।”

उन्होंने आगे कहा, “मैं अमोल सर और पूरे सपोर्ट स्टाफ का धन्यवाद करना चाहती हूं। पिछले कुछ सीरीज हमारे पक्ष में नहीं रहीं, लेकिन जिस तरह हमने इस मैच में खेला, वह शानदार रहा।”

मैच की सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी क्रांति गौड़, जिन्होंने दोनों पारियों में कुल सात विकेट लिए और पहली पारी में पांच विकेट झटके, ने कहा कि लॉर्ड्स के ऑनर्स बोर्ड पर अपना नाम दर्ज कराना उनके लिए किसी सपने के सच होने जैसा है।

क्रांति ने कहा, “बचपन में मैंने कभी नहीं सोचा था कि ऐसा दिन भी आएगा। लेकिन इस टेस्ट मैच के पहले दिन से ही मैंने खुद से कहा था कि मुझे अपना नाम ऑनर्स बोर्ड पर दर्ज कराना है। मुझे इस उपलब्धि पर बेहद गर्व है और मेरे परिवार को भी मुझ पर गर्व है। मैं अपने सभी कोचों, सीनियर्स और उन सभी लोगों का धन्यवाद करना चाहती हूं जिन्होंने इस सफर में मेरा साथ दिया। मैंने अपने घर पर एक छोटा-सा म्यूजियम बनाया है और इस मैच का स्टंप मैं हमेशा वहीं संभालकर रखूंगी।”

वहीं इंग्लैंड की कप्तान नेट साइवर-ब्रंट ने स्वीकार किया कि उनकी टीम परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालने और बड़ी साझेदारियां बनाने में नाकाम रही।

उन्होंने कहा, “पहले दिन हम परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढाल नहीं पाए। बल्लेबाजी में भी पर्याप्त साझेदारियां नहीं बन सकीं। हालांकि खिलाड़ियों ने जुझारूपन दिखाया। लॉर्ड्स में पहला महिला टेस्ट खेलना हमारे लिए शानदार अनुभव रहा।”

उन्होंने यह भी कहा कि टेस्ट मैच से पहले टीम को कुछ और अभ्यास सत्र मिल जाते तो बेहतर होता।

साइवर-ब्रंट ने कहा, “मुझे नहीं लगता कि टॉस का फैसला गलत था। लेकिन अगर हमें अभ्यास के लिए दो-तीन दिन और मिल जाते तो अच्छा रहता। हालांकि एक क्रिकेटर के तौर पर आपको हर परिस्थिति और हर फॉर्मेट के लिए तैयार रहना पड़ता है। यही इस खेल का हिस्सा है।”