महिला टी20 विश्व कप: पहले दौर में बाहर होने के बाद पाकिस्तान टीम पर उठे सवाल!

महिला टी20 विश्व कप में निराशाजनक प्रदर्शन के बाद पाकिस्तान महिला टीम और मुख्य कोच वहाब रियाज को कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। टीम टूर्नामेंट के शुरुआती दौर में ही बाहर हो गई थी, जिसके बाद खिलाड़ियों की मैदान के बाहर की गतिविधियां भी विवाद का विषय बन गई हैं।

12 टीमों वाले इस टूर्नामेंट में पाकिस्तान को ग्रुप ए में भारत, बांग्लादेश और दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद सेमीफाइनल की दौड़ से बाहर होने वाली टीमों में पाकिस्तान सबसे पहले शामिल रहा।

टूर्नामेंट के दौरान खिलाड़ियों की मनोरंजन और घूमने-फिरने से जुड़ी कुछ वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गईं, जिसके बाद आलोचनाओं का दौर शुरू हो गया।

पूर्व पाकिस्तानी टेस्ट कप्तान राशिद लतीफ ने एक पॉडकास्ट में कहा, “हर कोई महिला क्रिकेट को बढ़ावा देना चाहता है और ऐसा होना भी चाहिए, लेकिन यह भी सच है कि महिला क्रिकेट में अपेक्षित प्रगति नहीं हो रही है। पाकिस्तान महिला टीम कई वर्षों से खेल रही है, फिर भी हर आईसीसी टूर्नामेंट में हमें वही नतीजे देखने को मिलते हैं।”

वायरल वीडियो में वरिष्ठ खिलाड़ी आलिया रियाज अपने पति अली यूनुस के साथ एक रेस्तरां में दिखाई दी थीं। अली यूनुस पूर्व पाकिस्तानी कप्तान वकार यूनुस के छोटे भाई हैं। इन वीडियो के बाद ऐसी अटकलें भी लगाई गईं कि कुछ खिलाड़ी अभ्यास सत्रों से दूर रह रही थीं।

पूर्व टेस्ट क्रिकेटर और पाकिस्तान महिला टीम के पूर्व मुख्य कोच कबीर खान ने सवाल उठाया कि अनुभवी खिलाड़ी लगातार अच्छा प्रदर्शन क्यों नहीं कर पा रही हैं।

उन्होंने कहा, “इन खिलाड़ियों को सुविधाओं या अंतरराष्ट्रीय अनुभव की कोई कमी नहीं है। मुझे लगता है कि हमारे खिलाड़ी मानसिक रूप से इतने मजबूत नहीं हैं कि दबाव को संभाल सकें। विश्व कप में दक्षिण अफ्रीका और बांग्लादेश के खिलाफ कम स्कोर वाले मैचों में जिस तरह टीम हारी, वह इसका उदाहरण है।”

महिला टी20 विश्व कप से पहले भी पाकिस्तान की टीम वेस्टइंडीज और आयरलैंड के खिलाफ त्रिकोणीय सीरीज में संघर्ष करती नजर आई थी।

कबीर खान ने कहा कि मौजूदा खिलाड़ियों को समझना होगा कि वे आने वाली पीढ़ियों के लिए रोल मॉडल हैं।

“अगर आप लगातार निराश करती रहेंगी, तो पाकिस्तान में महिला क्रिकेट आगे नहीं बढ़ पाएगा।”

पूर्व टेस्ट तेज गेंदबाज सलीम जाफर ने हालांकि आलोचकों से महिला और पुरुष क्रिकेट के बीच के सामाजिक और सांस्कृतिक अंतर को भी समझने की अपील की।

उन्होंने कहा, “महिला क्रिकेट में प्रतिभा का दायरा पुरुष क्रिकेट जितना बड़ा नहीं है। इसके अलावा महिला खिलाड़ियों को कोचिंग देने में कई सामाजिक और सांस्कृतिक बाधाएं भी होती हैं।”

जाफर ने उदाहरण देते हुए कहा, “मुख्य कोच के रूप में मैं किसी खिलाड़ी से अकेले में बात भी नहीं कर सकता था, जब तक कि मैनेजर कॉन्फ्रेंस रूम में मौजूद न हो।”

उन्होंने आगे कहा, “नेट्स में कोचिंग देते समय पुरुष कोच खिलाड़ियों को छू भी नहीं सकते। गोपनीयता के कारण मैच के दौरान हम ड्रेसिंग रूम में भी नहीं रह सकते। इन सभी वजहों से महिला खिलाड़ियों को कोचिंग देना और चुनौतीपूर्ण हो जाता है।”

सलीम जाफर ने यह भी कहा कि पाकिस्तान महिला क्रिकेट में प्रतिभा का पूल अभी भी सीमित है।

हालांकि, पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) के एक अधिकारी ने बताया कि बोर्ड महिला क्रिकेट के विकास के लिए लगातार प्रयास कर रहा है।

अधिकारी ने कहा, “महिला टीम को पुरुष टीम के समान सुविधाएं, भत्ते, फीस और अन्य लाभ दिए जाते हैं। अगर पुरुष खिलाड़ी बिजनेस क्लास में यात्रा करते हैं, तो महिला खिलाड़ी भी उसी श्रेणी में यात्रा करती हैं। किसी तरह का भेदभाव नहीं है।”

अधिकारी ने यह भी बताया कि पीसीबी ने कराची स्थित अपने अत्याधुनिक हाई-परफॉर्मेंस सेंटर को महिला क्रिकेट के लिए समर्पित कर रखा है, जहां योग्य कोच, ट्रेनर और रसोइये चौबीसों घंटे उपलब्ध रहते हैं।

इसके बावजूद टीम के लगातार खराब प्रदर्शन ने पाकिस्तान महिला क्रिकेट की प्रगति को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।