‘मेरी लड़ाई जारी है’: एशियन गेम्स ट्रायल्स में हार के बाद विनेश फोगाट ने 2028 ओलंपिक पर टिकाई नजर!

विनेश फोगाट ने मैट पर हारने के बाद खुद को हारा हुआ महसूस नहीं किया। पूर्व विश्व चैंपियनशिप पदक विजेता ने कहा कि मां बनने के बाद दोबारा प्रतियोगिता में लौटकर और उस सिस्टम को चुनौती देकर, जिसने उन्हें कुश्ती से दूर रखने की पूरी कोशिश की, वह पहले ही जीत चुकी हैं। शनिवार को एशियन गेम्स चयन ट्रायल्स में उनकी वापसी की कोशिश भले सफल नहीं रही, लेकिन उनका हौसला कायम है।

सेमीफाइनल में मीनाक्षी गोयत से 4-6 से हारने के बाद PTI के अनुसार विनेश ने कहा, “मैं बिल्कुल असफल नहीं हुई हूं। मैं पूरे सिस्टम से लड़ रही हूं और फिर भी गर्व के साथ दोबारा मैट पर खड़ी हूं।”

उन्होंने 2028 लॉस एंजेलिस ओलंपिक में खेलने के अपने लक्ष्य को भी दोहराया।

हार के कुछ ही मिनटों बाद विनेश ने कुश्ती प्रशासन पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके साथ भेदभाव किया गया, मानसिक रूप से परेशान किया गया और कोर्ट के फैसले उनके पक्ष में आने के बावजूद उन्हें प्रतिस्पर्धी कुश्ती में लौटने से रोकने की कोशिश की गई।

उन्होंने कहा, “वे मुझे मैट पर वापसी से रोकना चाहते थे, लेकिन मैं फिर यहां खड़ी हूं। पिछले 10 महीनों में जो हासिल किया है, उस पर मुझे गर्व है। मुझे पता है कि सिस्टम मेरे लिए आगे भी मुश्किलें खड़ी करेगा, लेकिन मुझे उम्मीद है कि मेहनत के दम पर मैं सिस्टम को पीछे छोड़कर आगे बढ़ सकती हूं।”

विनेश, जो 2024 पेरिस ओलंपिक फाइनल से दर्दनाक अयोग्यता के बाद पहली बार प्रतिस्पर्धा में उतरी थीं, ने कहा कि मां बनने के बाद एलीट स्तर पर वापसी करना ही उनकी सबसे बड़ी जीत है।

उन्होंने कहा, “मेरे बेटे के जन्म को सिर्फ 10 महीने हुए हैं। मैं फिर मैट पर खड़ी हूं और युवा पीढ़ी के खिलाफ मुकाबला कर रही हूं। मुझे खुद पर गर्व है। उम्मीद है कि मैं अपने बेटे और कई महिला पहलवानों को प्रेरित कर पाऊंगी।”

विनेश ने दिल्ली हाई कोर्ट के उस फैसले को भी अहम बताया, जिसमें उन्हें ट्रायल्स में भाग लेने की अनुमति दी गई थी। उन्होंने कहा कि यह मां बनने के बाद वापसी करने वाली महिला पहलवानों के लिए रास्ता खोलने जैसा है।

उन्होंने कहा, “एक लड़की मां बनने के बाद फिर मैट पर लौटी है। रास्ता खुल गया है। जल्दी या देर से इस पर नीति बननी ही चाहिए। जो महिला पहलवान मां बनने के बाद वापसी करना चाहती हैं, उन्हें उचित मौका और थोड़ी राहत मिलनी चाहिए।”

31 वर्षीय विनेश ने आरोप लगाया कि कोर्ट के हस्तक्षेप के बावजूद अधिकारियों ने उनके लिए मुश्किलें खड़ी करना जारी रखा। उन्होंने बताया कि शनिवार सुबह उन्हें कहा गया कि वह सिर्फ 50 किलो वर्ग में खेल सकती हैं, जबकि वह 53 किलो वर्ग में उतरना चाहती थीं।

उन्होंने कहा, “जब मुझे रिकवरी और तैयारी पर ध्यान देना चाहिए था, तब मैं अधिकारियों से बहस कर रही थी। उन्होंने मुझे एक पत्र दिया जिसमें लिखा था कि मैं सिर्फ 50 किलो में खेल सकती हूं। यह मानसिक उत्पीड़न था।”

विनेश ने दावा किया कि पूरा सिस्टम उन्हें नुकसान पहुंचाने के लिए तैयार किया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि मुकाबलों का शेड्यूल इस तरह बनाया गया जिससे उनकी ऊर्जा प्रभावित हो और मजबूत पहलवानों को जानबूझकर उनके ड्रॉ में रखा गया।

उन्होंने कहा, “मुझे निष्पक्ष मौका नहीं मिला। मेरी कैटेगरी की सभी मजबूत लड़कियों को मेरे रास्ते में रखा गया। मुकाबलों का समय भी इस तरह तय किया गया जिससे मेरी ऊर्जा पर असर पड़े।”

हालांकि, उन्होंने अपनी हार की जिम्मेदारी खुद ली और माना कि लंबे समय तक प्रतिस्पर्धा से दूर रहने और स्टैमिना की कमी का असर पड़ा।

उन्होंने कहा, “मैं अपनी हार स्वीकार करती हूं। मैं और मेहनत करूंगी और मजबूत वापसी करूंगी। फिटनेस और स्टैमिना मुद्दे थे, लेकिन उससे ज्यादा मुझे प्रतियोगिताओं की जरूरत थी। मैं लगभग दो साल से नहीं खेली थी। मां बनने के बाद यह मेरा पहला टूर्नामेंट था।”

उन्होंने कहा कि शनिवार के प्रदर्शन ने उन्हें विश्वास दिलाया कि वह अभी भी देश की शीर्ष पहलवानों से मुकाबला कर सकती हैं।

“आज मैं प्रेरित थी। मुझे पता है कि मैं युवा लड़कियों को हरा सकती हूं। मेरे अंदर अभी भी वह हिम्मत और विश्वास है। अगर मैं मेहनत करूं, तो और मजबूत वापसी कर सकती हूं।”

जब उनसे पूछा गया कि क्या 2028 लॉस एंजेलिस ओलंपिक अभी भी उनका लक्ष्य है, तो उन्होंने साफ कहा, “बिल्कुल। मैं लॉस एंजेलिस के लिए ही मैट पर लौटी हूं।”

विनेश ने खेल प्रशासन पर भी सवाल उठाए और पूछा कि इतने विवादों के बावजूद कोई संस्था खिलाड़ियों के समर्थन में आगे क्यों नहीं आती।

उन्होंने कहा, “सरकार, खेल मंत्रालय, IOA — कोई भी स्टैंड नहीं ले रहा। यह बहुत दुखद है। अगर खिलाड़ियों को सिस्टम के बावजूद जिंदा रहना पड़े, तो कुछ बहुत गलत है।”

उन्होंने यह भी कहा कि कई युवा पहलवान निजी तौर पर उनका समर्थन करते हैं, लेकिन शक्तिशाली लोगों के खिलाफ बोलने से डरते हैं।

“बहुत सी लड़कियां मुझे मैट पर वापस देखकर खुश थीं। वे आकर मुझसे बात करती हैं, लेकिन डरी हुई हैं। उन्हें पता है कि अगर वे ताकतवर लोगों के खिलाफ बोलेंगी तो क्या हो सकता है।”

हालांकि, विनेश ने साफ किया कि उन्हें किसी खिलाड़ी से शिकायत नहीं है।

उन्होंने कहा, “बच्चों की कोई गलती नहीं है। मुझे किसी खिलाड़ी से गुस्सा नहीं है। समस्या उन लोगों से है जो सिस्टम को नियंत्रित और मैनिपुलेट करते हैं।”

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Manish Kumar
मनीष कुमार एक अनुभवी खेल पत्रकार हैं, जिन्हें खेल पत्रकारिता में 25 से ज़्यादा सालों का अनुभव है। वह खास तौर पर क्रिकेट के विशेषज्ञ माने जाते हैं, खासकर टेस्ट क्रिकेट जैसे लंबे और चुनौतीपूर्ण फॉर्मेट में। उन्होंने टाइम्स ऑफ इंडिया ऑनलाइन के साथ करीब 16.5 साल तक काम किया, जहां उन्होंने बड़े क्रिकेट आयोजनों की कवरेज की और गहराई से विश्लेषण वाले लेख और उनकी भरोसेमंद राय पेश की। टेस्ट क्रिकेट के प्रति उनका जुनून उनकी लेखनी में साफ दिखाई देता है, जहां वह खेल की बारीकियों, रणनीतिक मुकाबलों और खिलाड़ियों के व्यक्तिगत प्रदर्शन को सरल और स्पष्ट तरीके से समझाते हैं। मनीष अपनी तेज़ नज़र और डिटेल्स पर ध्यान देने के लिए जाने जाते हैं। आज भी वह क्रिकेट के रोमांच, जटिलताओं और कहानी को दुनिया भर के प्रशंसकों तक जीवंत अंदाज़ में पहुंचाते हैं।