राफेल नडाल ने अपने सबसे बड़े कमबैक के पीछे का दर्द बताया!

22 ग्रैंड स्लैम जीतने वाले और रोजर फेडरर तथा नोवाक जोकोविच के साथ 20 साल तक टेनिस पर राज करने वाली “बिग थ्री” का हिस्सा रहे राफेल नडाल ने अपने करियर के अधिकांश समय दर्द में खेलते हुए बिताया। लगातार पैर की समस्या के बावजूद उन्होंने खुद को खेलने के लिए मजबूर किया।

2024 में संन्यास लेने वाले स्पेनिश खिलाड़ी नडाल ने कहा कि टेनिस खेलते रहने के लिए उन्होंने अपने स्वास्थ्य के साथ बड़े जोखिम उठाए। नेटफ्लिक्स सीरीज़ “राफा” में भी दर्शकों को महानता हासिल करने के लिए उनकी मानसिक और शारीरिक लड़ाई की करीब से झलक देखने को मिली।

बीबीसी को दिए एक इंटरव्यू में नडाल ने कहा,
“मुझे अपने स्वास्थ्य को लेकर ऐसे फैसले लेने पड़े, जहां आप सही और गलत की सीमा पर खड़े होते हैं। लेकिन अगर मैंने वह सब नहीं किया होता, तो शायद मेरे 10 ग्रैंड स्लैम कम होते… यही सच्चाई है।”

2005 मैड्रिड ओपन फाइनल में पैर टूटने के बाद, फ्रेंच ओपन अपने पहले ही प्रयास में जीतकर 19 साल की उम्र में पहला ग्रैंड स्लैम खिताब हासिल करने वाले नडाल को एक दुर्लभ बीमारी म्यूलर-वाइस सिंड्रोम का पता चला था।

यह बीमारी उनके बचपन में चाचा टोनी नडाल के कठिन प्रशिक्षण की वजह से हुई थी और इससे उनका करियर खतरे में पड़ गया था।

हालांकि, नडाल ने हार नहीं मानी। अगले नौ वर्षों में उन्होंने 13 और ग्रैंड स्लैम जीते और हर साल कम से कम एक बड़ा खिताब अपने नाम किया, लेकिन चोटें लगातार उनका पीछा करती रहीं।

नडाल ने कहा, “टेनिस समय के खिलाफ एक दौड़ बन गया था। मेरे दिमाग में हमेशा यह सवाल रहता था कि मैं इस पैर के साथ कब तक खेल पाऊंगा? मुझे कभी नहीं पता था कि मेरा करियर कितने समय तक चलेगा। मुझे हमेशा लगता था कि शायद यह आखिरी साल हो, इसलिए रुकने का समय नहीं था।”

इस चोट की वजह से उन्हें कई और स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ा, जिनमें बाएं घुटने में टेंडोनाइटिस और दवाइयों के इस्तेमाल से आंतों में छेद जैसी समस्याएं शामिल थीं।

दर्द को सहने के लिए उन्हें कई बार विशेष एनेस्थेटिक इंजेक्शन लेने पड़ते थे। यहां तक कि 2022 फ्रेंच ओपन जीतते समय उनके पैर में बिल्कुल संवेदना नहीं थी।

39 वर्षीय नडाल ने कहा, “सबसे अहम बात यह थी कि मेरा दर्द मेरे जुनून और उस काम से मिलने वाली खुशी से कम था, जो मैं कर रहा था।”

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Manish Kumar
मनीष कुमार एक अनुभवी खेल पत्रकार हैं, जिन्हें खेल पत्रकारिता में 25 से ज़्यादा सालों का अनुभव है। वह खास तौर पर क्रिकेट के विशेषज्ञ माने जाते हैं, खासकर टेस्ट क्रिकेट जैसे लंबे और चुनौतीपूर्ण फॉर्मेट में। उन्होंने टाइम्स ऑफ इंडिया ऑनलाइन के साथ करीब 16.5 साल तक काम किया, जहां उन्होंने बड़े क्रिकेट आयोजनों की कवरेज की और गहराई से विश्लेषण वाले लेख और उनकी भरोसेमंद राय पेश की। टेस्ट क्रिकेट के प्रति उनका जुनून उनकी लेखनी में साफ दिखाई देता है, जहां वह खेल की बारीकियों, रणनीतिक मुकाबलों और खिलाड़ियों के व्यक्तिगत प्रदर्शन को सरल और स्पष्ट तरीके से समझाते हैं। मनीष अपनी तेज़ नज़र और डिटेल्स पर ध्यान देने के लिए जाने जाते हैं। आज भी वह क्रिकेट के रोमांच, जटिलताओं और कहानी को दुनिया भर के प्रशंसकों तक जीवंत अंदाज़ में पहुंचाते हैं।