
जब वैभव सूर्यवंशी ने राजस्थान रॉयल्स के ट्रायल्स में हिस्सा लिया था, तब उनके पास आज जैसी बड़ी बैकलिफ्ट या बिजली जैसी तेज बैट स्पीड नहीं थी, जिसने अब दुनिया के गेंदबाज़ों की नींद उड़ा दी है।
लेकिन उनकी शानदार क्रिकेट समझ और खेल को पढ़ने की क्षमता ने ज़ुबिन भरूचा को युवा सचिन तेंदुलकर की याद दिलाई, जिनमें 15 साल की उम्र में इसी तरह की परिपक्वता दिखाई देती थी।
राजस्थान रॉयल्स के साथ काम कर चुके और देश के बेहतरीन बल्लेबाज़ी मेंटर्स में गिने जाने वाले ज़ुबिन भरूचा ने वैभव की बल्लेबाज़ी के विज्ञान और उनकी खासियतों के बारे में खुलकर बात की।
भरूचा ने कहा, “वैभव की सबसे दुर्लभ खूबियों में से एक है कि वह खेल के साथ खुद को लगातार विकसित करता है। लोग आज जो देखते हैं, वह तब नहीं था जब वह आठ साल का था। उदाहरण के तौर पर उसकी यह बड़ी बैकलिफ्ट धीरे-धीरे विकसित हुई, जैसे-जैसे उसके सामने गेंदबाज़ी की गुणवत्ता और गति बढ़ती गई।”
भरूचा ने बताया कि IPL 2025 से पहले राजस्थान रॉयल्स के कोचिंग स्टाफ ने उसकी बैट स्पीड पर खास काम किया था।
उन्होंने कहा, “दिलचस्प बात यह है कि ट्रायल्स के दौरान उसकी बैट स्पीड सबसे तेज नहीं थी। हमने इसे पहचाना और तीन महीनों तक लगातार मेहनत की, जिससे उसकी बैट स्पीड लगभग 30 प्रतिशत बढ़ गई।”
तो आखिर वैभव को बाकी युवा बल्लेबाज़ों से अलग क्या बनाता है?
भरूचा के मुताबिक, “उसकी सबसे बड़ी ताकत है गेंद खेलने का फैसला आखिरी पल तक टालना। वह मानो समय को कुछ क्षणों के लिए रोक देता है। यही महान बल्लेबाज़ों की पहचान होती है।”
वैभव की फुटवर्क बहुत कम है। वह ज्यादातर अपनी जगह पर खड़े होकर ही जबरदस्त बैट स्पीड और बड़ी बैकलिफ्ट के दम पर शॉट खेलते हैं। हालांकि उनका हल्का बैकफुट मूवमेंट उन्हें क्रीज़ का बेहतर इस्तेमाल करने में मदद करता है।
भरूचा ने समझाया, “उसकी बैकलिफ्ट सिर्फ स्टाइल नहीं है। यह उसे गेंद को बेहतर समझने और स्पेस पहचानने में मदद करती है। महान बल्लेबाज़ सिर्फ गेंद पर प्रतिक्रिया नहीं देते, बल्कि उससे अतिरिक्त जानकारी हासिल कर लेते हैं। यह सिखाना बेहद मुश्किल होता है क्योंकि इसमें नज़र, टाइमिंग, बैलेंस और इंसिंक्ट सब शामिल होते हैं।”
उन्होंने कहा कि वैभव का ट्रेनिंग प्रोसेस टीम के बड़े खिलाड़ियों जैसे ध्रुव जुरेल और रियान पराग से बहुत अलग नहीं रहा।
“कोई जादुई फॉर्मूला नहीं है। बल्लेबाज़ी को छोटे हिस्सों में तोड़ना, कमियों को पहचानना और फिर उन्हें बेहतर तरीके से दोबारा बनाना — यही प्रक्रिया है। लक्ष्य हमेशा गलतियों को कम करना और स्कोरिंग ऑप्शंस बढ़ाना होता है।”
भरूचा ने बताया कि 2025 में वैभव की रन बनाने की ज़्यादातर क्षमता ऑन-साइड शॉट्स पर निर्भर थी, लेकिन अब उन्होंने ऑफ-साइड में भी शानदार शॉट्स विकसित कर लिए हैं।
उन्होंने कहा, “उच्च स्तर पर बल्लेबाज़ी का विकास सिर्फ कमजोरियां दूर करने का नहीं, बल्कि नए शॉट्स जोड़ने और दबाव में स्पष्ट सोच बनाए रखने का खेल है।”
भरूचा के अनुसार, वैभव के खेल में सबसे बड़ा बदलाव तकनीक नहीं बल्कि आत्मविश्वास है।
“पहले उसे लगता था कि वह अंडर-19 गेंदबाज़ों पर हावी हो सकता है। अब उसे भरोसा हो गया है कि वही तरीका और वही खेल अंतरराष्ट्रीय गेंदबाज़ों के खिलाफ भी काम करेगा। यह मानसिक बदलाव बहुत बड़ा होता है। टैलेंट खिलाड़ी को ऊंचाई देता है, लेकिन विश्वास उसे वहां तक पहुंचाता है।”
वैभव की तुलना युवा सचिन तेंदुलकर से करते हुए भरूचा ने कहा, “वह मुझे बहुत हद तक युवा सचिन की याद दिलाता है। स्टाइल में नहीं, बल्कि मैच्योरिटी और स्पष्ट सोच में। कुछ खिलाड़ी उम्र में छोटे होते हैं, लेकिन समझ में बहुत बड़े। वैभव उन्हीं में से एक है।”
उन्होंने माना कि हर खिलाड़ी की तरह वैभव को भी भविष्य में असफलता, आलोचना और दबाव का सामना करना पड़ेगा, लेकिन उनकी क्रिकेट समझ बेहद खास है।
“उसकी लीडरशिप इंस्टिंक्ट्स और क्रिकेट इंटेलिजेंस उसकी उम्र के हिसाब से काफी आगे हैं। वह हालात को बहुत जल्दी समझता है और खेल को बेहद स्वाभाविक तरीके से पढ़ता है।”
भरूचा का मानना है कि अगर चयनकर्ता चाहें तो वैभव को जल्दी बड़े स्तर पर मौका देना गलत नहीं होगा।
उन्होंने कहा, “अगर आपको लगता है कि उसमें क्षमता है, तो उसे सीधे बड़े स्तर पर उतारना उसकी सीखने की प्रक्रिया को और तेज कर सकता है। महान खिलाड़ी अक्सर सबसे कठिन स्तर पर सबसे जल्दी सीखते हैं।”








