टी20 विश्व कप से बाहर होने के बाद शनाका ने ‘नकारात्मकता’ को ठहराया जिम्मेदार, भविष्य के खिलाड़ियों की सुरक्षा के लिए सरकार से की अपील!

कोलंबो में बुधवार को न्यूज़ीलैंड से 61 रन की हार के बाद श्रीलंका टी20 विश्व कप 2026 के सेमीफाइनल की दौड़ से बाहर होने वाली पहली टीम बन गई। कप्तान दसुन शानाका ने कहा कि टीम के आसपास फैली नकारात्मकता, गेंदबाज़ों के अनुकूल पिचें और प्रमुख खिलाड़ियों की फिटनेस समस्याएं उनके बाहर होने की बड़ी वजह रहीं।

टी20 विश्व कप से पहले ही श्रीलंका को पिछले साल के मध्य से सीमित ओवरों में खराब प्रदर्शन के कारण आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा था।

शानाका ने कहा, “हम अक्सर जो देखते और सुनते हैं, वह नकारात्मक बातें ही होती हैं। हम खिलाड़ी जितना भी सकारात्मक रहने की कोशिश करें, बाहर का माहौल नकारात्मक है। यह श्रीलंकाई क्रिकेट के लिए बड़ी क्षति है। यह हमारा एकमात्र प्रमुख खेल है, और पता नहीं हम इसे बचा पाएंगे या नहीं। स्टेडियम के बाहर देखिए, कितने लोग माइक लेकर खड़े रहते हैं और बिना मैच देखे बातें करते हैं।”

जिम्बाब्वे, इंग्लैंड और न्यूज़ीलैंड से लगातार हार के बाद आलोचनाएं और बढ़ गई हैं। शनाका ने टीम के इर्द-गिर्द बढ़ती नकारात्मकता पर चिंता जताई और सरकार से भविष्य की पीढ़ी के खिलाड़ियों की मानसिक सेहत की रक्षा के लिए हस्तक्षेप की अपील की।

उन्होंने कहा, “यह नकारात्मकता क्यों फैलाई जा रही है? हां, हम विश्व कप हारे हैं और हमें कारण पता हैं। सबको चिंता है। लेकिन सुधार की बात करने के बजाय नकारात्मकता ज्यादा सामने आ रही है। हम तो खेलकर चले जाएंगे, लेकिन भविष्य में आने वाले खिलाड़ियों के लिए अगर सरकार इसे (नकारात्मक माहौल) रोक सके तो उनकी मानसिक सेहत के लिए बेहतर होगा।”

टूर्नामेंट शुरू होने से पहले ही शनाका ने श्रीलंका की स्पिन-फ्रेंडली पिचों पर चिंता जताई थी। हालांकि उन्होंने स्वीकार किया कि कोलंबो की पिच को पढ़ने में टीम प्रबंधन से गलती हुई।

उन्होंने कहा, “मैंने टूर्नामेंट से पहले कहा था कि पिच बल्लेबाज़ों के लिए अच्छी होगी। हमारे पास श्रीलंका के सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज़ हैं। हमने वही खिलाड़ी चुने जिनका घरेलू क्रिकेट में स्ट्राइक रेट अच्छा है। कोई भी यहां जबरन नहीं आया है।

कभी-कभी हमें अपनी पसंद की परिस्थितियां नहीं मिलतीं और हम अप्रत्याशित तरीके से हार जाते हैं। जो हुआ उससे हम बेहद दुखी हैं।”

टूर्नामेंट के दौरान श्रीलंका को प्रमुख गेंदबाज़ों की चोटों का भी सामना करना पड़ा। लेग स्पिनर वानिंदु हसरंगा पहले मैच में हैमस्ट्रिंग चोट के कारण बाहर हो गए। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मैच में मथीशा पथिराना घायल हो गए, जबकि ईशान मलिंगा टूर्नामेंट शुरू होने से पहले ही बाहर हो चुके थे।

शनाका ने कहा, “फिटनेस को अनिवार्य बनाना होगा। जब इतने खिलाड़ी चोटिल हों तो अच्छा परिणाम पाना मुश्किल हो जाता है। वानिंदु हसरंगा हमारे लिए बेहद अहम खिलाड़ी हैं। हम जानते हैं कि मथीशा पथिराना कितने महत्वपूर्ण हैं। ईशान मलिंगा भी चोटिल थे। फिटनेस का स्तर चोटों को प्रभावित करता है। कुछ खिलाड़ी फिटनेस समस्याओं के कारण टीम में जगह ही नहीं बना पाते। कई विश्व कप से हम इस मुद्दे पर बात कर रहे हैं।”

शनाका ने कोलंबो और कैंडी में बड़ी संख्या में स्टेडियम पहुंचने वाले श्रीलंकाई प्रशंसकों से माफी भी मांगी।

उन्होंने कहा, “टीम हमेशा अच्छा प्रदर्शन करने की कोशिश करती है, खासकर विश्व कप में। शायद यहां मौजूद कई खिलाड़ी दोबारा श्रीलंका में विश्व कप खेलने का मौका नहीं पाएंगे। हम सबकी इच्छा थी कि सेमीफाइनल तक पहुंचें, लेकिन हम उम्मीदों पर खरे नहीं उतर सके। हम अपने प्रशंसकों को वह नहीं दे पाए जो वे चाहते थे। इसके लिए हम क्षमा चाहते हैं।”