
जिम्बाब्वे के खिलाफ अहम सुपर एट्स मुकाबले से पहले भारत के बल्लेबाजी कोच सितांशु कोटक ने टीम पर मौजूद दबाव को स्वीकार किया, लेकिन साथ ही खिलाड़ियों की क्षमता पर पूरा भरोसा जताया।
अहमदाबाद में दक्षिण अफ्रीका से 76 रन की करारी हार के बाद भारत के लिए अब हालात साफ हैं—उन्हें चेन्नई में जिम्बाब्वे के खिलाफ गुरुवार को और 1 मार्च को कोलकाता में वेस्टइंडीज़ के खिलाफ अपने बाकी दोनों मैच जीतने ही होंगे।
चेन्नई में प्री-मैच प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कोटक ने कहा, “देखिए, भारत में विश्व कप है, तो दबाव और उम्मीदें तो रहेंगी ही। मैं मानता हूं कि कोई भी अंतरराष्ट्रीय मैच खेलते समय दबाव महसूस होता है। और जब आप देश का प्रतिनिधित्व कर रहे होते हैं, तो यह बड़ा दबाव वाला मैच होता ही है।”
हालांकि, कोटक को भारतीय खिलाड़ियों की मानसिक मजबूती पर कोई संदेह नहीं है।
उन्होंने कहा, “सिर्फ इसलिए कि हम एक मैच हार गए और अच्छी साझेदारी नहीं बन पाई, लोग दबाव की बात ज्यादा करने लगे हैं। लेकिन मुझे पूरा विश्वास है कि हमारे खिलाड़ी इस दबाव को संभालने में सक्षम हैं। अगर हमें विश्व कप जीतना है, तो यह दबाव झेलना ही होगा। मैं बस उस लय का इंतजार कर रहा हूं। जैसे ही हम फिर से वह मोमेंटम पकड़ेंगे—अगर वह कल से शुरू हो जाए—तो हम सही समय पर अपनी रफ्तार पकड़ लेंगे।”
कोटक के अनुसार, टीम को पटरी पर लौटाने के लिए ओपनर्स का एक साथ अच्छा प्रदर्शन करना अहम होगा। अभिषेक शर्मा अब तक टूर्नामेंट में प्रभाव नहीं छोड़ पाए हैं, जबकि ईशान किशन लगातार रन बना रहे हैं।
उन्होंने कहा, “द्विपक्षीय सीरीज (न्यूजीलैंड और दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ) में हमारी बल्लेबाजी शानदार चल रही थी। इस विश्व कप में आखिरी मैच थोड़ा चिंताजनक था, क्योंकि करीब डेढ़ साल में बहुत कम बार ऐसा हुआ है जब हम 150 से कम पर आउट हुए हों।
मुझे लगता है हमें इसे ऐसे लेना चाहिए कि यह दो साल में हमारा सबसे खराब मैच था। हमें ज्यादा सोचने के बजाय आगे बढ़ना चाहिए।
हमारे ओपनर्स वैसा प्रदर्शन नहीं कर पाए जैसा हम चाहते थे। ईशान ने पाकिस्तान के खिलाफ शानदार खेल दिखाया, लेकिन अभिषेक का दो-तीन मैचों में थोड़ा खराब दौर रहा। यह ठीक है। जैसे ही दोनों चल पड़ेंगे, माहौल बदल जाएगा।”
कोटक ने यह भी साफ किया कि आगे भी भारत आक्रामक क्रिकेट ही खेलेगा।
उन्होंने कहा, “हम निश्चित रूप से उसी अंदाज में खेलेंगे जिसने हमें सफलता दिलाई है। हमें सकारात्मक रहना है और उसी ब्रांड का क्रिकेट खेलना है। इसमें कोई बदलाव नहीं होगा।
हां, अगर विकेट अलग तरह का है और उसके मुताबिक ढलना पड़े, जैसे कोलंबो में किया, तो वह खेल का हिस्सा है।”
अब नजरें इस बात पर होंगी कि भारत दबाव को ताकत में बदल पाता है या नहीं, और क्या जिम्बाब्वे के खिलाफ जीत से उनकी सेमीफाइनल की उम्मीदें फिर से मजबूत होंगी।








