
भारत के खिलाफ करारी हार के बाद बाबर आज़म को बल्लेबाजी क्रम में नीचे भेजने और नामीबिया के खिलाफ मैच से शाहीन शाह अफरीदी को बाहर करने को लेकर उठे सवालों पर पाकिस्तान के मुख्य कोच माइक हेसन ने शुक्रवार को सफाई दी। उन्होंने साफ कहा कि ये फैसले किसी जल्दबाज़ी या गुस्से में नहीं, बल्कि पूरी तरह रणनीतिक थे।
भारत ने ग्रुप स्टेज के मुकाबले में पाकिस्तान को 61 रन से हराया था, जिसमें ईशान किशन की शानदार पारी ने जीत की नींव रखी थी। उस मैच में बाबर सिर्फ 5 रन बनाकर आउट हो गए थे, जबकि शाहीन ने अपने आखिरी ओवर में 15 रन लुटाए थे।
हेसन ने कहा,“नहीं, मैं ऐसा नहीं कहूंगा कि शाहीन को खराब प्रदर्शन की वजह से बाहर किया गया या बाबर को भारत से हार के कारण नीचे भेजा गया। जैसा मैंने पहले कहा था, तेज़ गेंदबाज़ सलमान मिर्ज़ा अपने मौके के हकदार थे। और जब लेफ्ट आर्म स्पिन असर दिखा रही थी, तब दो राइट हैंड बल्लेबाज़ भेजना समझदारी नहीं थी — यह बात सबसे पहले खुद बाबर ने मानी।”
नामिबिया के खिलाफ साहिबज़ादा फरहान ने नाबाद शतक लगाकर पूरी पारी संभाली, जिससे बाबर को बल्लेबाज़ी का मौका ही नहीं मिला।
जब उनसे पूछा गया कि क्या भारत से हार के बाद टीम की सोच बदली है, तो हेसन ने जवाब दिया,
“नहीं, कोई बड़ा बदलाव नहीं था। यह सिर्फ रोल्स को लेकर था।”
पाकिस्तान अब सुपर 8 में न्यूज़ीलैंड के खिलाफ मुकाबले से पहले पावरप्ले में बेहतर प्रदर्शन पर खास ध्यान दे रहा है।
हेसन ने खुलकर कहा कि बाबर को ओपनिंग से हटाने की असली वजह उनका धीमा स्ट्राइक रेट था।
“बाबर खुद जानते हैं कि टी20 वर्ल्ड कप में पावरप्ले में उनका स्ट्राइक रेट 100 से कम रहा है। इस रोल में हमें तेज़ शुरुआत चाहिए। मिडिल ओवर्स में जब टीम मुश्किल में हो, वहां वह शानदार बल्लेबाज़ी कर सकते हैं — जैसे हमने यूएसए के खिलाफ देखा।”
नामिबिया के खिलाफ बाबर से पहले शादाब खान को भेजा गया, लेकिन फरहान और शादाब ने पूरे 20 ओवर खेल लिए।
हेसन के मुताबिक, “12वें ओवर के बाद हमें तेजी चाहिए थी और उस वक्त बाबर सबसे सही विकल्प नहीं थे। हमारे पास ऐसे खिलाड़ी हैं जो उस फेज़ में बेहतर तरीके से रन बना सकते हैं।”
मिस्ट्री स्पिनर उस्मान तारिक को लेकर हेसन ने कहा कि वह आक्रमण और बचाव — दोनों भूमिकाओं में बेहद कारगर हैं। “वह एक साथ विकेट भी ले सकता है और रन भी रोक सकता है। यह बहुत खास क्षमता है।”
न्यूज़ीलैंड के खिलाफ मनोवैज्ञानिक बढ़त के सवाल पर हेसन ने इसे नकारते हुए कहा, “मैच दिमाग से नहीं, स्किल से जीते जाते हैं। न्यूज़ीलैंड ने हाल के समय में उपमहाद्वीप में काफी क्रिकेट खेला है। श्रीलंका की पिचें आमतौर पर ज्यादा टर्न लेती हैं। मुझे नहीं लगता किसी को मानसिक बढ़त है।”
कुल मिलाकर हेसन का साफ संदेश था — फैसले भावनाओं में नहीं, रणनीति के तहत लिए गए हैं, और आगे भी टीम जरूरत के हिसाब से बदलाव करती रहेगी।








