
ऑस्ट्रेलिया का ग्रुप स्टेज में बाहर होना सभी के लिए चौंकाने वाला रहा है और अब टीम 2028 में होने वाले घरेलू टी20 वर्ल्ड कप से पहले अपने 2026 अभियान की गहन समीक्षा (फॉरेंसिक रिव्यू) करने जा रही है।
ऑस्ट्रेलिया को 2026 टी20 वर्ल्ड कप में ज़िम्बाब्वे और श्रीलंका जैसी टीमों से हार का सामना करना पड़ा, जिसके चलते वे ग्रुप स्टेज से ही बाहर हो गए। 2009 के बाद यह पहली बार है जब ऑस्ट्रेलिया किसी टी20 वर्ल्ड कप में ग्रुप चरण से आगे नहीं बढ़ सका है। उनका आखिरी मैच शुक्रवार को पालेकेले में ओमान के खिलाफ होगा।
चयनकर्ता टोनी डोडेमाइड ने क्रिकेट डॉट कॉम डॉट एयू से कहा, “यह टूर्नामेंट जिस तरह से हमारे लिए आगे बढ़ा, वह बेहद निराशाजनक रहा है। लेकिन आखिरी मैच खत्म होने के बाद हमें थोड़ा समय लेकर पूरे अभियान का गहराई से विश्लेषण करना होगा। फिलहाल हमारा फोकस ओमान के खिलाफ मैच पर है और हम उसे मज़बूती से खत्म करना चाहते हैं।”
टीम को चोटों ने भी बुरी तरह प्रभावित किया। तेज़ गेंदबाज़ पैट कमिंस और जोश हेज़लवुड टूर्नामेंट से बाहर रहे, जबकि मिशेल स्टार्क पहले ही टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास ले चुके थे। कप्तान मिशेल मार्श भी चोट के कारण टूर्नामेंट के दौरान बाहर हो गए।
इसके अलावा स्टीव स्मिथ को शुरुआत में टी20 वर्ल्ड कप टीम में शामिल नहीं किया गया था और हेज़लवुड के बाहर होने के बाद ज़िम्बाब्वे मैच से कुछ घंटे पहले ही उन्हें टीम में जोड़ा गया।
ऑस्ट्रेलिया 2028 टी20 वर्ल्ड कप की मेज़बानी न्यूज़ीलैंड के साथ करेगा और डोडेमाइड चाहते हैं कि टीम घरेलू मैदान पर शानदार प्रदर्शन करे।
उन्होंने कहा, “हम हर वर्ल्ड कप जीतना चाहते हैं, चाहे वह कहीं भी हो। अगला वर्ल्ड कप हमारे घर में है और हम वहां अच्छा करना चाहते हैं। अभी हमारा ध्यान ओमान के खिलाफ मैच पर है, उसके बाद हम 2028 की तैयारी और 2027 के वनडे वर्ल्ड कप को ध्यान में रखकर आगे की योजना बनाएंगे।”
इससे पहले पूर्व कप्तान रिकी पोंटिंग ने भी ऑस्ट्रेलिया के जल्दी बाहर होने को “बेहद खराब अभियान” बताया था। उन्होंने कहा कि मौजूदा टीम में वह दबदबा और आभा नहीं है जो पहले की ऑस्ट्रेलियाई टीमों में बड़े टूर्नामेंटों के दौरान दिखती थी।
आईसीसी रिव्यू शो में पोंटिंग ने कहा, “कागज़ पर यह टीम वैसी आभा नहीं दिखाती जैसी पहले की ऑस्ट्रेलियाई टीमों में हुआ करती थी। बड़े टूर्नामेंट जीतने के लिए आपके अनुभवी और बेहतरीन खिलाड़ियों को अहम मौकों पर आगे आकर मैच जिताना होता है, और इस बार ऑस्ट्रेलिया में वह बात नजर नहीं आई।”
अब देखना होगा कि यह गहन समीक्षा ऑस्ट्रेलिया के सफेद गेंद वाले क्रिकेट को किस दिशा में ले जाती है, खासकर 2028 के घरेलू वर्ल्ड कप को ध्यान में रखते हुए।








