
जम्मू-कश्मीर ने बुधवार को इतिहास रचते हुए 67 साल में पहली बार रणजी ट्रॉफी के फाइनल में जगह बना ली। टीम ने पश्चिम बंगाल के कल्याणी स्थित बंगाल क्रिकेट अकादमी मैदान पर खेले गए सेमीफाइनल मुकाबले के चौथे दिन दो बार की चैंपियन बंगाल को हराया।
ऑलराउंडर औक़िब नबी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए चार विकेट झटके, जबकि सुनील कुमार ने भी चार सफलताएं हासिल कीं। बंगाल की टीम तीसरी पारी में सिर्फ 99 रन पर ढेर हो गई। जीत के लिए मिले 126 रन के लक्ष्य को जम्मू-कश्मीर ने छह विकेट से हासिल कर लिया। वंशज शर्मा (43) और आईपीएल स्टार अब्दुल समद (30) अंत तक नाबाद रहे। दोनों ने चौथे विकेट के लिए नाबाद 55 रन की साझेदारी की।
दिन की शुरुआत बंगाल के लिए अच्छी रही, जब मोहम्मद शमी और आकाश दीप ने जल्दी-जल्दी शुभम पुंडीर (27) और कप्तान पारस डोगरा (9) को आउट कर दिया। लेकिन इसके बाद अब्दुल समद ने पारी संभाली और शाहबाज़ अहमद पर दो छक्के लगाकर मैच का रुख बदल दिया।
वंशज शर्मा ने सूरज सिंधु जैस्वाल पर तीन चौके जमाए और फिर मुकेश कुमार के सिर के ऊपर से शानदार छक्का लगाकर जीत सुनिश्चित कर दी, जिससे जम्मू-कश्मीर कैंप में जश्न का माहौल बन गया। औक़िब नबी को नौ विकेट लेने के लिए ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ चुना गया।
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने टीम को बधाई देते हुए कहा कि उन्हें उम्मीद है कि जल्द ही इस क्षेत्र के खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी पहचान बनाएंगे।
इस सीज़न से पहले जम्मू-कश्मीर ने रणजी ट्रॉफी में 334 मैच खेले थे, जिनमें सिर्फ 45 में जीत मिली थी। टीम को अपनी पहली जीत दर्ज करने में 44 साल लग गए थे, जो 1982-83 सीज़न में सर्विसेज के खिलाफ आई थी।
नॉकआउट तक पहुंचना भी उनके लिए दुर्लभ रहा है। वे 2013-14 में क्वार्टरफाइनल में पहुंचे थे और 2015-16 में वानखेड़े स्टेडियम में मुंबई को हराकर सुर्खियों में आए थे। लेकिन लगातार अच्छा प्रदर्शन करना हमेशा चुनौती रहा।
इस सीज़न में कोच अजय शर्मा और कप्तान पारस डोगरा के नेतृत्व में हालात बदले। मुंबई से पहला मैच हारने के बाद टीम ने जोरदार वापसी की और राजस्थान, दिल्ली व हैदराबाद को हराकर नॉकआउट में प्रवेश किया।
क्वार्टरफाइनल में औक़िब नबी के 12 विकेट की बदौलत मध्य प्रदेश पर 56 रन की यादगार जीत ने उन्हें पहली बार रणजी ट्रॉफी सेमीफाइनल में पहुंचाया — और अब सीधे फाइनल तक।








