
ईशान किशन का मानना है कि उनकी पर्सनैलिटी में आए बदलाव ने उन्हें एक बेहतर और ज्यादा मैच्योर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर बनने में मदद की है।
पिछले महीने भारतीय टीम में वापसी के बाद से किशन लगातार शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं और उन्होंने संजू सैमसन को पीछे छोड़ते हुए टीम के फर्स्ट चॉइस विकेटकीपर-बल्लेबाज़ के रूप में अपनी जगह पक्की कर ली है।
गुरुवार रात नामीबिया के खिलाफ पावरप्ले में इस बाएं हाथ के बल्लेबाज़ ने सिर्फ 24 गेंदों में 61 रन ठोक दिए और भारत को 86/1 तक पहुंचा दिया। अभिषेक शर्मा की गैरमौजूदगी में इस तूफानी पारी की बदौलत भारत ने टी20 वर्ल्ड कप इतिहास का सबसे बड़ा पावरप्ले स्कोर भी बना डाला।
मैच के बाद किशन ने अपनी निजी और क्रिकेटिंग ग्रोथ को लेकर बात की। उन्होंने स्वीकार किया कि अब वह पहले की तरह हर वक्त मस्ती-मज़ाक नहीं करते, खासकर तब से जब उन्होंने अपना सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट और टीम में जगह गंवाई थी।
“ईमानदारी से कहूं तो अब मैं बदला हुआ इंसान हूं। मैं अब भी मज़ाक करता हूं और उसे एंजॉय करता हूं, लेकिन पहले दिनभर करता था — अब बस दो-तीन घंटे। पहले 24×7 चलता रहता था,” किशन ने कहा।
मैच से पहले उन्होंने टीम को मोटिवेशनल बातें भी कही थीं।
“अब मेरा पूरा फोकस बल्लेबाज़ी और विकेटकीपिंग पर है ताकि टीम को फायदा हो। बाकी सब सेकेंडरी है। अब हर वक्त जोकिंग नहीं करता, खासकर गौतम भाई के रहते,” उन्होंने मुस्कुराते हुए जोड़ा।
किशन की बड़े शॉट खेलने की निरंतरता भी काफी बेहतर दिख रही है। नामीबिया के खिलाफ उन्होंने एक ही ओवर में जेजे स्मिट को चार छक्के जड़ दिए।
जब उनसे पूछा गया कि क्या उनकी बैटिंग स्ट्रैटेजी बदली है, तो किशन ने हंसते हुए कहा कि वह सिंगल्स भी लेते हैं और अच्छी गेंदों को डिफेंड भी करते हैं।
“मैंने कोई बहुत बड़ा बदलाव नहीं किया, बस चीज़ों को सरल रखा है। पहले जल्दीबाज़ी में या ज्यादा उत्साहित होकर शॉट खेल देता था। अब शांत रहने की कोशिश करता हूं, गेंद को ध्यान से देखता हूं और वही शॉट खेलता हूं जिनमें मैं अच्छा हूं।
अब मैं ज्यादा सोचता नहीं, न ही एक्स्ट्रा ट्रेनिंग सेशन्स करता हूं — बस गेंद देखो और शांत रहो,” उन्होंने समझाया।
किशन ने ये भी कहा कि मैच की स्थिति के अनुसार कुछ डॉट बॉल खेलना भी जरूरी होता है।
“दो-तीन डॉट बॉल से फर्क नहीं पड़ता क्योंकि हमारी टीम में हर बल्लेबाज़ किसी भी वक्त छक्का मार सकता है। दो गेंद में दो छक्के लग गए तो सब बराबर।
इसलिए ज़रूरी है कि जल्दबाज़ी में विकेट न गंवाएं और सही मौके का इंतजार करें,” किशन ने कहा।
स्पष्ट है कि ईशान किशन अब सिर्फ आक्रामक बल्लेबाज़ नहीं, बल्कि मैच को समझकर खेलने वाले मैच-विनर बनते जा रहे हैं।








