
टी20 वर्ल्ड कप जीतने वाले पूर्व कप्तान रोहित शर्मा ने शुक्रवार को कहा कि 2011 से 2024 के बीच भारत के लंबे समय तक कोई बड़ा खिताब न जीत पाने की एक बड़ी वजह खिलाड़ियों में “असफल होने का डर” हो सकता है।
एमएस धोनी की कप्तानी में 2011 वनडे वर्ल्ड कप जीतने के बाद भारत को अगला बड़ा खिताब 2024 में मिला, जब रोहित की कप्तानी में टीम ने टी20 वर्ल्ड कप जीता।
रोहित ने जियो हॉटस्टार शो में कहा, “मैं हमेशा मानता रहा हूं कि जब हालात नीचे जाते हैं तो वे हमेशा ऐसे नहीं रहते, एक न एक दिन ऊपर जरूर आते हैं। लेकिन मुझे नहीं लगा था कि इसमें 13 साल लग जाएंगे। मुझे नहीं लगा था कि गिरावट इतनी लंबी होगी।”
उन्होंने आगे कहा, “हमने आखिरी वर्ल्ड कप 2011 में जीता और फिर 2024 में जीता। यानी पूरे 13 साल। हां, हमने 2013 में चैंपियंस ट्रॉफी जीती थी, तो तकनीकी रूप से यह 11 साल का सूखा था। लेकिन 11 साल भी बहुत लंबा समय होता है।”
रोहित ने कहा कि टीम हमेशा सही काम करती रही, लेकिन फिर भी कुछ कमी रह गई।
“हम सही चीजें करते रहे, लेकिन कहीं न कहीं कुछ कमी रह गई। मुझे लगा कि शायद हम सबके अंदर असफल होने का डर घुस आया था। यह मेरी अपनी भावना थी।”
रोहित ने बताया कि उन्होंने और तत्कालीन कोच राहुल द्रविड़ ने इस डर को खत्म करने की कोशिश की।
“हम इस डर को हटाना चाहते थे। इसके लिए हमने खिलाड़ियों को आज़ादी और उनके रोल की साफ जानकारी दी। उनसे कहा – ‘तुम ही ये काम करोगे, और जो भी हो, हम तुम्हारा पूरा साथ देंगे।’”
उन्होंने कहा कि वे खिलाड़ियों से अलग-अलग बात करते थे।
“मैं हर खिलाड़ी से अलग बात करता था और बताता था – ‘तुमसे यही उम्मीद है, यही तुम्हारी भूमिका है।’ इससे खिलाड़ी में भरोसा आता है और वह डर के बिना खेलता है।”
2019 वर्ल्ड कप को रोहित ने अपने लिए एक बड़ा सबक बताया।
“2019 वर्ल्ड कप में मैंने बहुत रन बनाए, लेकिन हम वर्ल्ड कप नहीं जीत पाए। तब मैंने खुद से पूछा – इन रनों का क्या फायदा? आंकड़ों में तो रह जाएंगे, लेकिन असली खुशी तो नहीं मिली।”
उन्होंने कहा कि तभी उन्होंने सोच बदली। “मैंने तय किया कि मैं वही खेलूंगा जिससे मुझे खुशी मिले। डर के बिना और पूरे इरादे के साथ। चाहे मैं 40 पर आउट होऊं या 90 पर, मुझे फर्क नहीं पड़ता था।”
रोहित ने कहा कि भारत में आंकड़ों पर बहुत ज़्यादा ज़ोर दिया जाता है। “हम एक ऐसा देश हैं जहां आंकड़ों की बहुत बात होती है। खिलाड़ी भी कहते हैं – मैंने इतने रन बनाए, ये किया, वो किया। लेकिन अगर आपके पास वर्ल्ड कप नहीं है, तो ये सारे आंकड़े बेकार हैं।”
अंत में रोहित ने कहा, “मेरे हिसाब से असली सफलता ट्रॉफी जीतने में है। वही आपके करियर को परिभाषित करती है। जब आप ट्रॉफी जीतते हैं, तभी आप कह सकते हैं कि आपका करियर सफल रहा।”








