
अर्शदीप सिंह बिना किसी प्रभावशाली व्यक्ति को नाराज़ किए या किसी की भावनाएँ आहत किए, बड़ी सहजता से अपनी बात कहने के लिए जाने जाते हैं। वह उन हालात में भी हल्का-फुल्का मज़ाक ढूंढ लेते हैं, जहाँ खुश होने की ज़्यादा वजह नहीं होती।
बाएँ हाथ के तेज़ गेंदबाज़, जो गौतम गंभीर के मुख्य कोच बनने के बाद से भारतीय टीम में आते-जाते रहे हैं, से पूछा गया कि बार-बार टीम में अंदर-बाहर होने का उन पर क्या असर पड़ता है।
इस पर मुस्कुराते हुए अर्शदीप ने कहा, “जैसे मैं टीम से इन-आउट होता हूँ उसका फायदा भी है। मेरा बॉल भी इन-आउट जाता है। तो मैं उसका मज़ा ले रहा हूँ।” उन्होंने यह भी याद दिलाया कि टीम से बाहर बैठने के बावजूद उनकी गेंद को दोनों तरफ स्विंग कराने की क्षमता पर ज़रा भी असर नहीं पड़ा है।
जुलाई 2024 में गंभीर के कोच बनने के बाद से, 73 टी20 अंतरराष्ट्रीय मैचों में 111 विकेट लेने वाले और इस फॉर्मेट में भारत के सबसे सफल विकेट लेने वाले गेंदबाज़ अर्शदीप को कई बार टीम संयोजन के कारण बाहर बैठना पड़ा।
शानदार रिकॉर्ड के बावजूद, अर्शदीप को एशिया कप के बड़े हिस्से में बेंच पर बैठना पड़ा और 2025 में भारत के 21 में से सिर्फ 13 टी20 मैच ही खेलने का मौका मिला। 26 वर्षीय अर्शदीप ने चयन को लेकर अपने पेशेवर रवैये पर ज़ोर दिया।
उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “मेरा काम है हमेशा तैयार रहना। जब भी टीम चाहे, नए या पुराने गेंद से किसी भी फॉर्मेट में बॉलिंग करनी हो, मैं अपना बेस्ट दूँ। मेरा लक्ष्य है सफर का आनंद लेना, वर्तमान में रहना और उन चीज़ों पर ध्यान देना जो मेरे नियंत्रण में हैं। जो मेरे नियंत्रण में नहीं है (जैसे चयन), उसके बारे में ज़्यादा सोचना बेकार है।”
अर्शदीप ने आसान बल्लेबाज़ी पिचों पर गेंदबाज़ी की मुश्किलों और हालात के मुताबिक खुद को ढालने की ज़रूरत पर भी बात की।
उन्होंने कहा, “जब आपको अच्छी बल्लेबाज़ी वाली पिच मिलती है, तो मन में यही दुआ होती है – ‘भगवान, आज बचा लो।’ टीम मीटिंग में प्लान बनते हैं और मैच के दिन हमारा काम उन्हें सही तरीके से लागू करना होता है। अगर आप अपने प्लान पर टिके रहते हैं, तो ज़्यादातर बार नतीजा मिलता है।”
उन्होंने आगे कहा, “हमें समझना होता है कि किस बल्लेबाज़ के खिलाफ और किस पिच पर क्या काम करेगा। अगर कोई रणनीति नहीं चलती, तो अगले मैच में प्लान बदला जाता है।”
अर्शदीप के मुताबिक मानसिक और रणनीतिक लचीलापन टीम के लिए बेहद ज़रूरी है।
“रणनीति हालात के हिसाब से बदलती है। विरोधी टीम, स्कोर और मैच की स्थिति देखकर प्लान बनते हैं। चाहे आपको शुरुआत में गेंदबाज़ी मिले, मिडिल ओवर्स में या डेथ ओवर्स में — आपको हमेशा तैयार रहना होता है।”
थोड़े मज़ाकिया अंदाज़ में अर्शदीप ने बताया कि आक्रामक बल्लेबाज़ अभिषेक शर्मा नेट्स में उनके खिलाफ बल्लेबाज़ी करने से बचते हैं।
“वो हमेशा कहते हैं – ‘मैं आप लोगों के खिलाफ बैटिंग नहीं करना चाहता।’ हमारे लिए तो अच्छा ही है कि हमें उसे बॉलिंग नहीं करनी पड़ती। मैंने उसके साथ काफी क्रिकेट खेला है और उसे इस स्तर पर दबदबा बनाते देखना अच्छा लगता है,” अर्शदीप ने मुस्कुराते हुए कहा।








