
भारतीय बल्लेबाज़ और विकेटकीपर ऋषभ पंत ने कहा है कि उन्होंने हमेशा देश के लिए मैच जिताने के इरादे से क्रिकेट खेला है और युवाओं के लिए यह बेहद ज़रूरी है कि वे कम उम्र में अपनी सीमाओं को आगे बढ़ाएं, क्योंकि ज़िंदगी में बाद में आराम करने के लिए बहुत समय मिलेगा।
पंत ने कहा कि कोविड-19 महामारी के बाद उन्होंने अपनी ज़िंदगी और क्रिकेट करियर को और गंभीरता से लेना शुरू किया।
पीटीआई से बातचीत में पंत ने कहा, “मैंने बहुत कम उम्र में अपने पिता को खो दिया था, लेकिन उसी ने मुझे सकारात्मक तरीके से जिम्मेदारी लेना सिखाया। इसने मुझे मानसिक रूप से बहुत मजबूत बनाया। लेकिन गंभीर होने का एक बड़ा कारण कोविड के बाद आया… जब आप युवा होते हैं तो आप पैसों के बारे में नहीं सोचते, बस क्रिकेट खेलने पर ध्यान देते हैं।”
उन्होंने आगे कहा, “मेरे दिमाग में सिर्फ एक ही सपना था – भारत के लिए खेलना और भारत के लिए मैच जीतना। बाकी जो कुछ भी मिला, वह उसी का नतीजा है।”
पंत ने युवाओं से पूरी मेहनत करने की अपील की और माना कि हर क्षेत्र में काम और निजी जीवन का संतुलन ज़रूरी है।
उन्होंने कहा, “मेरी सोच हमेशा एक जैसी रही है – किसी चीज़ में पागलपन की हद तक लगना पड़ता है, तभी कुछ बड़ा बनता है। आजकल हम वर्क-लाइफ बैलेंस की बात करते हैं, लेकिन पहले आपको जमकर मेहनत करनी चाहिए, अपने काम के लिए दीवाना बनना चाहिए। ज़िंदगी में बाद में आराम करने का वक्त मिल ही जाएगा।”
“युवावस्था में अपनी सीमाएं तोड़ना सबसे अच्छा होता है, क्योंकि तब संभलने और सुधारने के लिए बहुत समय होता है। 35 या 45 की उम्र में आप ज़्यादा सुरक्षित और योजनाबद्ध सोचेंगे, लेकिन उससे पहले नीचे से ऊपर तक पूरी मेहनत करो। जहां भी जाओ, सीखते रहो – कुछ न कुछ अच्छा ज़रूर निकलेगा,” उन्होंने जोड़ा।
वहीं, भारतीय ऑलराउंडर रविंद्र जडेजा ने भी हर पेशे में सुरक्षा की अहमियत पर ज़ोर दिया।
जडेजा ने कहा, “सुरक्षा बहुत ज़रूरी होती है। क्रिकेट में भी आप तभी खुलकर शॉट खेल पाते हैं जब आपको टीम में अपनी जगह सुरक्षित लगती है। इसी तरह हर क्षेत्र में सुरक्षा का होना बहुत जरूरी है।”








