ओवल क्यूरेटर विवाद में गौतम गंभीर के शब्दों के चयन पर मैथ्यू हेडन ने की आलोचना!

पूर्व ऑस्ट्रेलियाई ओपनर मैथ्यू हेडन का मानना है कि भारत के मुख्य कोच गौतम गंभीर ओवल के क्यूरेटर के साथ हुए विवाद में अपने शब्दों का चयन थोड़ा नरम रख सकते थे, लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि यह एक सामान्य घटना है जिसमें इंग्लैंड का ग्राउंड्समैन पिच पर अपने अधिकार जताता है।

पांचवें और निर्णायक टेस्ट से पहले गंभीर की ओवल के मुख्य क्यूरेटर ली फोर्टिस से जोरदार बहस हो गई, जिसमें उन्होंने कहा – “आप हमें यह मत बताइए कि हमें क्या करना है” – और ग्राउंड स्टाफ की आलोचना भी की।

हेडन ने ‘ऑल ओवर बार द क्रिकेट’ में कहा –
“क्यूरेटर पिच को लेकर काफी रक्षात्मक हो सकते हैं। इंग्लैंड में यह एक आम बात है। यह थोड़ी पावर दिखाने वाली स्थिति है — यहां हम हैं, फाइनल टेस्ट है, यह मेरा मैदान है — और वे गौतम गंभीर के लिए मुश्किल खड़ी करने की कोशिश करेंगे।”

“लेकिन मुझे लगता है कि उन्हें लहजा थोड़ा हल्का रखना चाहिए था। वे बेहतर भाषा का इस्तेमाल कर सकते थे। लेकिन हकीकत यह है कि उनकी टीम सबसे अहम टेस्ट मैच से पहले अभ्यास करना चाहती थी,” हेडन ने आगे कहा।

चौथे टेस्ट के बाद 2-1 से पीछे चल रही भारतीय टीम को पांच मैचों की एंडरसन–तेंदुलकर ट्रॉफी सीरीज बराबर करने के लिए अंतिम मैच में जीत की जरूरत थी।

भारत ने अंततः सीरीज का आखिरी मैच रोमांचक अंदाज में छह रन से जीत लिया।

भारतीय बल्लेबाजी कोच सितांशु कोटक के मुताबिक, विवाद तब शुरू हुआ जब फोर्टिस ने भारतीय कोचिंग स्टाफ को मुख्य पिच से 2.5 मीटर दूर रहने का आदेश दिया, भले ही वे स्पाइक्स पहने हुए नहीं थे, जिससे मेहमान टीम नाराज हो गई।

इस पर गंभीर ने जवाब दिया – “आप हमें यह मत बताइए कि हमें क्या करना है… आपको हमें कुछ भी बताने का कोई अधिकार नहीं है। आप बस एक ग्राउंड्समैन हैं, इससे ज्यादा कुछ नहीं।”

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Manish Kumar
मनीष कुमार एक अनुभवी खेल पत्रकार हैं, जिन्हें खेल पत्रकारिता में 25 से ज़्यादा सालों का अनुभव है। वह खास तौर पर क्रिकेट के विशेषज्ञ माने जाते हैं, खासकर टेस्ट क्रिकेट जैसे लंबे और चुनौतीपूर्ण फॉर्मेट में। उन्होंने टाइम्स ऑफ इंडिया ऑनलाइन के साथ करीब 16.5 साल तक काम किया, जहां उन्होंने बड़े क्रिकेट आयोजनों की कवरेज की और गहराई से विश्लेषण वाले लेख और उनकी भरोसेमंद राय पेश की। टेस्ट क्रिकेट के प्रति उनका जुनून उनकी लेखनी में साफ दिखाई देता है, जहां वह खेल की बारीकियों, रणनीतिक मुकाबलों और खिलाड़ियों के व्यक्तिगत प्रदर्शन को सरल और स्पष्ट तरीके से समझाते हैं। मनीष अपनी तेज़ नज़र और डिटेल्स पर ध्यान देने के लिए जाने जाते हैं। आज भी वह क्रिकेट के रोमांच, जटिलताओं और कहानी को दुनिया भर के प्रशंसकों तक जीवंत अंदाज़ में पहुंचाते हैं।