
भारत के हालिया टेस्ट क्रिकेट झटकों के बाद कप्तान शुभमन गिल ने अपने इरादे साफ़ तौर पर ज़ाहिर कर दिए हैं। गिल ने टेस्ट क्रिकेट में फिर से संरचना और सम्मान लाने के उद्देश्य से बीसीसीआई से हर टेस्ट मैच से पहले 15 दिनों की तैयारी का समय मांगा है। उनके इस सुझाव को पूर्व क्रिकेटरों से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है।
पिछले एक साल में भारत का रेड-बॉल प्रदर्शन काफ़ी गिरा है और न्यूज़ीलैंड, ऑस्ट्रेलिया व इंग्लैंड के खिलाफ़ सीरीज़ हार के चलते टीम के वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप (WTC) से बाहर होने का ख़तरा बढ़ गया है।
नवंबर 2025 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ़ घरेलू मैदान पर दो मैचों की टेस्ट सीरीज़ में 0–2 की करारी हार के बाद, WTC 2025–27 चक्र में शीर्ष दो में जगह बनाकर WTC 2027 फ़ाइनल में पहुंचने की भारत की उम्मीदें धूमिल हो गई हैं।
भारत को तीसरे WTC फ़ाइनल में पहुंचने के लिए बचे हुए नौ में से कम से कम सात मैच जीतने होंगे, लेकिन राह आसान नहीं है। इन नौ में से पांच मुकाबले घर पर दुनिया की सर्वश्रेष्ठ टेस्ट टीम ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ़ होंगे, जबकि चार मैच विदेशी दौरे पर (दो श्रीलंका और दो न्यूज़ीलैंड के खिलाफ़) खेले जाएंगे।
ऐसे में, तैयारी के लिए ज़्यादा समय मांगने को लेकर गिल की पहल को गिरावट रोकने की दिशा में एक सक्रिय कदम के रूप में देखा जा रहा है।
पूर्व भारतीय बल्लेबाज़ रॉबिन उथप्पा ने गिल के प्रस्ताव की जमकर सराहना की और इसे साहसिक व ज़रूरी हस्तक्षेप बताया।
उथप्पा ने अपने यूट्यूब चैनल पर कहा, “मुझे लगता है कि यह किसी लीडर का बेहद ‘पागलपन’ जैसा लेकिन शानदार फ़ैसला है। इससे बेहतर कॉल हो ही नहीं सकता। वह इस तरह से टेस्ट क्रिकेट की कमान संभाल रहे हैं। यह बहुत अच्छा है। किसी भी टेस्ट सीरीज़ से पहले टीम को कम से कम दो हफ्ते की तैयारी चाहिए। हम टेस्ट सीरीज़ WTC जीतने के लिए खेलते हैं। और उसे जीतने के लिए सिर्फ़ टेस्ट खेलना काफ़ी नहीं है। आपको प्लान करना होगा, तैयारी करनी होगी और नींव बनानी होगी। बोर्ड और टीम, दोनों को टेस्ट क्रिकेट को वह सम्मान देना होगा। मुझे बहुत खुशी है कि गिल ने यह मुद्दा उठाया।”
गिल के विचारों का समर्थन करने वालों में उथप्पा अकेले नहीं हैं। भारत के पूर्व ओपनर आकाश चोपड़ा ने भी इस सोच का समर्थन किया और कहा कि बीसीसीआई के पास व्यावसायिक दबावों से ऊपर उठकर तैयारी को प्राथमिकता देने की क्षमता है।
‘Backstage with Boria’ में बात करते हुए चोपड़ा ने कहा, “अगर आप बीसीसीआई को देखें, तो हम एक मज़बूत बोर्ड हैं और आर्थिक रूप से किसी पर निर्भर नहीं हैं। हमें तीन अतिरिक्त मैचों की ज़रूरत नहीं है। अगर हम अच्छी तैयारी करना चाहते हैं, तो हम एक विंडो बना सकते हैं। तैयारी हमेशा से अहम रही है। अगर गिल यह कह रहे हैं, तो एक विंडो ढूंढिए, तैयारी के लिए समय निकालिए। दुर्भाग्यपूर्ण है कि आप एक महाद्वीप से दूसरे महाद्वीप में कूदते हुए अलग-अलग फ़ॉर्मैट खेलते हैं। मांगें भी अलग होती हैं। अगर तैयारी अच्छी नहीं होगी और टीम असफल होती है, तो वह आपकी तैयारी की कमी का भी नतीजा होगा।”








