
साल 2025 वाकई भारत की जुझारू खेल महिलाओं का रहा। चाहे मुक्केबाज़ी का कठिन रिंग हो, क्रिकेट मैदान की टक्कर, शतरंज की बिसात पर दिमागी खेल, या फिर शूटिंग और तीरंदाज़ी में निशाने की सटीकता—हर जगह भारतीय महिलाओं ने अपना दबदबा दिखाया।
भारत को पहली महिला शतरंज विश्व कप विजेता दिव्या देशमुख के रूप में मिलीं। 19 साल की इस युवा शतरंज खिलाड़ी ने तमाम उम्मीदों को तोड़ते हुए इतिहास रच दिया। वहीं, हरमनप्रीत कौर की कप्तानी में भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने मुश्किल दौर और सोशल मीडिया की आलोचनाओं के बावजूद वनडे विश्व कप जीतकर कमाल कर दिखाया।
एक और 19 साल की खिलाड़ी सुरुचि सिंह ने शूटिंग रेंज पर धमाकेदार प्रदर्शन किया। उन्होंने 10 मीटर एयर पिस्टल स्पर्धा में चार वर्ल्ड कप स्वर्ण पदक जीते, जिनमें तीन व्यक्तिगत स्वर्ण शामिल थे। इस स्पर्धा में अब तक मनु भाकर का दबदबा रहा था।
2 नवंबर, रविवार को नवी मुंबई के डीवाई पाटिल स्टेडियम में भारत ने दक्षिण अफ्रीका को 52 रन से हराकर अपना पहला महिला वनडे विश्व कप जीता। सेमीफाइनल में भारत ने मौजूदा चैंपियन ऑस्ट्रेलिया को रिकॉर्ड लक्ष्य का पीछा करते हुए हराया, जिससे यह तय हो गया कि महिला 50 ओवर क्रिकेट को नया चैंपियन मिलेगा। इस जीत के साथ भारत उन चुनिंदा देशों—ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड और न्यूजीलैंड—में शामिल हो गया, जिन्होंने यह खिताब जीता है।
फुटबॉल में, जहां पुरुष टीम लगातार नाकामियों से जूझती रही, वहीं महिला टीम ने अगले साल होने वाले एएफसी एशियन कप के लिए क्वालिफाई कर उम्मीद की किरण जगाई। सिर्फ एक जीत के बावजूद, उन्होंने उस खेल की साख बचाई जो पुरुषों के खराब प्रदर्शन और प्रशासनिक अव्यवस्थाओं के कारण आलोचना में रहा।
18 साल की शीतल देवी ने तीरंदाज़ी में एक अनोखा इतिहास रचा। वह न सिर्फ पहली बिना हाथों वाली पैरा वर्ल्ड चैंपियन बनीं, बल्कि उन्होंने सक्षम खिलाड़ियों के साथ अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों के लिए राष्ट्रीय टीम में भी जगह बनाई। जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ की यह खिलाड़ी ओलंपिक भावना की जीवंत मिसाल बनीं।
भारतीय नेत्रहीन महिला क्रिकेट टीम ने भी श्रीलंका से विश्व खिताब जीतकर देश का नाम रोशन किया। कप्तान दीपिका टीसी के नेतृत्व में इन खिलाड़ियों ने बताया कि विश्व कप के सपने के दौरान तीन वक्त का खाना भी उनके लिए लग्ज़री था। खिताब जीतने के बाद भी वे बड़े इनाम की नहीं, बल्कि सम्मानजनक सहयोग की उम्मीद कर रही थीं।
मुक्केबाज़ी में जहां पुरुष खिलाड़ियों का साल कठिन रहा, वहीं जैसमीन लांबोरिया और मीनाक्षी हुड्डा ने विश्व चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर देश को खुशी दी। जैसमीन 57 किलोग्राम ओलंपिक श्रेणी में खेलती हैं और 2028 लॉस एंजिलिस ओलंपिक के लिए मजबूत दावेदार मानी जा रही हैं।
भारत्तोलन में मीराबाई चानू का दबदबा एक और साल कायम रहा। लगातार पीठ की समस्या से जूझने के बावजूद उन्होंने कॉमनवेल्थ चैंपियनशिप में स्वर्ण और विश्व चैंपियनशिप में रजत पदक जीता। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि 49 किलोग्राम वर्ग के ओलंपिक से बाहर होने के बाद वह 2028 ओलंपिक की तैयारी कैसे करती हैं।
कुश्ती में भी अंतिम पंघाल ने विश्व चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीतकर साल को खास बना दिया। डोपिंग विवादों और कुछ पहलवानों के खराब प्रदर्शन के बीच उनका यह पदक भारत के लिए बेहद अहम रहा।
कुल मिलाकर, 2025 भारत की खेल महिलाओं के साहस, संघर्ष और सफलता का साल रहा—एक ऐसा साल जिसने साबित कर दिया कि भारतीय महिलाएं हर मैदान में अजेय हैं।








